निचली व उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरधारी लाल साहू को जब गिरफ्तारी का डर सताने लगा तो उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए हर संभव प्रयास किया।

पुलिस की दबिश बढ़ने पर वह नेपाल तक पहुंच गया। इससे पहले वह कभी वाराणसी, कभी हैदराबाद तो कभी दिल्ली और आसपास के इलाकों में ठिकाने बदलकर रह रहा था।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए उसने अपनी लोकेशन लगातार बदलने के साथ ही संपर्क के तरीकों को भी बेहद गोपनीय रखा।
जानकारी के मुताबिक, साहू ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की भी कोशिश की थी।

उसने उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन वहां से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उसकी योजना सर्वोच्च न्यायालय पहुंचकर राहत पाने की थी। हालांकि, इस बीच उसे पुलिस की गतिविधियों की भनक लग गई।

गिरफ्तारी की आशंका होते ही वह संबंधित स्थान से निकल गया और पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गया। पुलिस से बचने के लिए साहू मोबाइल फोन और सिमकार्ड का भी बेहद सावधानी से इस्तेमाल कर रहा था।

वह एक बार फोन करने के बाद दोबारा उसी सिमकार्ड का इस्तेमाल नहीं करता था। इससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना और उस तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि साहू ने प्रापर्टी के कारोबार में लेनदेन के लिए कई कंपनियां शुरू की थीं।

इन कंपनियों के माध्यम से संपत्ति से जुड़े कारोबार और वित्तीय लेनदेन किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस अब इन कंपनियों के गठन, उनके बैंक खातों और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

दो दबिशों में घर पर नहीं मिला गिरधारी लाल साहू

गिरधारी लाल साहू के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही एसआइटी ने साहू पर शिकंजा शुरू कर दिया। 15 अक्टूबर मुकदमा दर्ज होने के बाद 17 अक्टूबर को पुलिस टीम साहू के बयान दर्ज करने और दस्तावेज खंगालने के लिए बरेली पहुंची, उस समय वह घर पर नहीं मिला।

पुलिस टीम कंपनियों के दस्तावेज एकत्रित करके ले आई। इसके बाद 23 अक्टूबर को फिर पुलिस टीमों ने बरेली व हल्द्वानी में दबिश दी। इस दौरान भी पुलिस टीमों को खाली हाथी लौटना पड़ा। जांच में पुलिस की लोकेशन नेपाल मिली।

आरोपित की गिरफ्तारी के लिए दो नवंबर को कोर्ट से गिरफ्तारी का गैर जमानती वारंट हासिल किया। विवेचक ने आरोपितों की ओर से तैयार किए गए सभी दस्तावेज कोर्ट के समक्ष रखे और अपना तर्क रखा कि आरोपित लगातार फरार चल रहा है। फर्जीवाड़े में उसकी गिरफ्तारी जरूरी है।

18 अक्टूबर को हुई थी जमानत याचिका खारिज

गिरफ्तारी से बचने के लिए गिरधारी लाल साहू ने 18 अक्टूबर को ही अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। आरोपित ने अपनी याचिका में आशंका जताई थी कि उनकी पत्नी राजनीतिक पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे गिरफ्तार करवा सकती है।

वहीं, अभियोजन ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मंत्री के सरकारी आवास पर स्टाफ के सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने माना कि निजी परिसर में भी अन्य लोगों की मौजूदगी में अपमान होने पर वह स्थान पब्लिक व्यू के दायरे में आ सकता है।

कर्मचारियों की मौजूदगी और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच साक्ष्यों के आधार पर होगी। अदालत ने एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत अग्रिम जमानत पर कानूनी प्रतिबंध को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।

जांच टीम व गिरफ्तारी टीम में यह रहे शामिल

– जया बलूनी, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, देहरादून (एसआइटी प्रभारी)
– अनुज कुमार, क्षेत्राधिकारी सहसपुर विवेचक
– निरीक्षक संतोष कुंवर
– उपनिरीक्षक संदीप लोहान, प्रभारी एसओजी
– उपनिरीक्षक संदीप कुमार, चौकी धारा
– महिला उपनिरीक्षक विनयता चौहान
– उपनिरीक्षक दीपक गैरोला
– उपनिरीक्षक धनीराम पुरोहित, एसओजी
– उपनिरीक्षक प्रवीण पुंडीर
– उपनिरीक्षक कमलेश गौर
– उपनिरीक्षक रफत अली, पटेलनगर
– कांस्टेबल रविशंकर झा, प्रेमनगर
– कांस्टेबल सौरभ रावत एसओजी
– कांस्टेबल देवेंद्र सिंह, एसओजी
– कांस्टेबल नरेंद्र, एसओजी
– कांस्टेबल मनोज सुन्द्रियाल, एसओजी
– कांस्टेबल ललित
– कांस्टेबल नवनीत एसओजी देहात
– हेड कांस्टेबल राजकुमार, पेशी सहसपुर
– कांस्टेबल आशीष राठी एसओजी नगर

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