उत्तराखंड!देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों के संगठनात्मक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश संगठन के महत्वपूर्ण पद पर फणीन्द्र नाथ शर्मा को प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी सौंपी है। दूसरी ओर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। शिक्षा क्षेत्र में एमबीबीएस दाखिलों में सामने आए संदिग्ध प्रमाणपत्रों के बाद उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने आयुष-यूजी दाखिलों में भी दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया कड़ी कर दी है। वहीं आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर मतदान केंद्रों और चुनावी व्यवस्थाओं की चरणबद्ध तैयारी के निर्देश दिए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
1. 2027 चुनाव से पहले भाजपा संगठन में नई जिम्मेदारी, फणीन्द्र नाथ शर्मा बने प्रदेश महामंत्री संगठन
उत्तराखंड भाजपा ने प्रदेश महामंत्री संगठन के रिक्त पद पर फणीन्द्र नाथ शर्मा की नियुक्ति की है। भाजपा के राष्ट्रीय स्तर से जारी संगठनात्मक नियुक्तियों में उत्तराखंड को भी नई जिम्मेदारी मिली है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे संगठनात्मक स्तर पर तेज हो रही हैं।
फणीन्द्र नाथ शर्मा का संगठनात्मक अनुभव लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के संगठनात्मक कार्यों से जुड़ा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने असम में विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। हरियाणा भाजपा में प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली। बूथ सशक्तीकरण, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और मंडल स्तर के संगठन को सक्रिय रखने का उनका अनुभव इस नई जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि शर्मा के संगठनात्मक अनुभव से प्रदेश भाजपा को लाभ मिलेगा। उनके अनुसार बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के अभियान में नई ऊर्जा आ सकती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी फणीन्द्र नाथ शर्मा को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री ने उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे संगठन को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में प्रदेश महामंत्री संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यह पद प्रदेश नेतृत्व और जमीनी संगठन के बीच समन्वय, कार्यकर्ता संपर्क, मंडल एवं बूथ स्तर की गतिविधियों तथा पार्टी कार्यक्रमों के संचालन से जुड़ा रहता है।
फणीन्द्र नाथ शर्मा की नियुक्ति से पहले यह पद अजय कुमार के राजस्थान में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने के बाद रिक्त था। अब नए संगठन महामंत्री के सामने उत्तराखंड जैसे भौगोलिक और सामाजिक रूप से विविध राज्य में संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय रखने की जिम्मेदारी होगी।
उत्तराखंड में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में बूथ स्तर पर कार्यकर्ता नेटवर्क, मतदाता संपर्क, पार्टी कार्यक्रमों का संचालन और संगठनात्मक गतिविधियों का समन्वय नई जिम्मेदारी के प्रमुख हिस्से होंगे।
भाजपा ने हाल में प्रदेश स्तर पर अन्य संगठनात्मक जिम्मेदारियों में भी बदलाव किए हैं। फणीन्द्र नाथ शर्मा की नियुक्ति को उसी संगठनात्मक प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि किसी नियुक्ति से आगामी चुनाव के परिणाम को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इतना स्पष्ट है कि भाजपा ने चुनाव से पहले संगठनात्मक ढांचे में रिक्त महत्वपूर्ण पद को भर दिया है और अब नई जिम्मेदारी के साथ संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
2. SIR को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, महेंद्र भट्ट बोले—मतदाताओं की मदद पर ध्यान दे कांग्रेस
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस को SIR के संबंध में भ्रम फैलाने के बजाय मतदाताओं की सहायता करनी चाहिए।
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले चुनावी हार के संदर्भ में ईवीएम को मुद्दा बनाया गया और अब SIR को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में नहीं है अथवा किसी प्रविष्टि को लेकर आपत्ति है तो निर्धारित निर्वाचन प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारी के सामने मामला रखा जा सकता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था में किसी मुद्दे पर अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श और अलग-अलग राय होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
SIR को लेकर उत्तराखंड में पहले से ही मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया में बूथ स्तर के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मतदाता अपने नाम और संबंधित विवरण की जांच कर सकते हैं तथा आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची का शुद्धीकरण और सत्यापन निर्वाचन तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भाजपा का कहना है कि यदि किसी मतदाता को सूची में किसी प्रकार की समस्या आती है तो राजनीतिक दलों को उसकी सहायता करनी चाहिए। वहीं SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का अंतिम समाधान निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और उसके आधिकारिक निर्णयों के आधार पर ही होगा।
ऐसे में मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपनी मतदाता सूची में नाम, पता और अन्य आवश्यक विवरणों की जांच करें। किसी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित समयसीमा और आधिकारिक प्रक्रिया के तहत सुधार या आपत्ति दर्ज कराना आवश्यक होगा।
SIR पर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है, लेकिन मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी दावा आधिकारिक निर्वाचन रिकॉर्ड और सक्षम निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से ही सत्यापित किया जाना चाहिए।
3. एमबीबीएस विवाद के बाद आयुष-यूजी दाखिलों में भी सख्ती, प्रमाणपत्रों की होगी दोहरी जांच
उत्तराखंड में मेडिकल दाखिलों से जुड़े संदिग्ध प्रमाणपत्रों के मामले सामने आने के बाद अब आयुष-यूजी दाखिलों में भी दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया कड़ी कर दी गई है।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने अपने परिसरों और संबद्ध आयुर्वेद महाविद्यालयों को प्रमाणपत्रों की जांच के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। विशेष रूप से आरक्षित वर्ग और उप-श्रेणी के तहत सीट प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन अधिक सावधानी से किया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार काउंसलिंग के दौरान किसी अभ्यर्थी को सीट आवंटित होना अंतिम प्रवेश की गारंटी नहीं होगा। सीट आवंटन को औपबंधिक माना जाएगा और अंतिम प्रवेश प्रमाणपत्रों की जांच पूरी होने तथा अभ्यर्थी की पात्रता सही पाए जाने के बाद ही मान्य होगा।
कॉलेज स्तर पर मूल प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है या नहीं और वह संबंधित नियमों के अनुरूप वैध है या नहीं।
इसके बाद प्रमाणपत्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत विश्वविद्यालय भेजा जाएगा। विश्वविद्यालय की ओर से संबंधित जिलाधिकारी कार्यालयों से प्रमाणपत्रों की पुष्टि कराई जाएगी।
इस व्यवस्था का विशेष महत्व आरक्षित श्रेणी और उप-श्रेणी के प्रमाणपत्रों के मामले में है। यदि किसी प्रमाणपत्र की वैधता अथवा अभ्यर्थी की पात्रता को लेकर संदेह होता है तो कॉलेज अपने स्तर पर अंतिम प्रवेश नहीं दे सकेगा और विश्वविद्यालय से आवश्यक मार्गदर्शन लेना होगा।
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना उचित सत्यापन अथवा नियमों के विपरीत प्रवेश दिए जाने की स्थिति में संबंधित कॉलेज और प्राचार्य की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
यह फैसला उत्तराखंड में सामने आए मेडिकल प्रवेश से जुड़े संदिग्ध प्रमाणपत्र मामलों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार एमबीबीएस और बीडीएस दाखिलों से संबंधित कई प्रमाणपत्रों की जांच जिलों को भेजी गई है और कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई है।
मेडिकल दाखिलों में आरक्षण या विशेष श्रेणी का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रमाणपत्रों की वैधता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए आयुष-यूजी में दस्तावेजों की दोहरी जांच की व्यवस्था का उद्देश्य पात्र अभ्यर्थियों की श्रेणी संबंधी पात्रता की पुष्टि करना और गलत दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश की संभावना को रोकना है।
अब कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में केवल काउंसलिंग परिणाम के आधार पर अंतिम प्रवेश देने के बजाय प्रमाणपत्रों की सत्यता सुनिश्चित करनी होगी।
4. 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर CEO सख्त, मतदान केंद्रों का होगा स्थलीय निरीक्षण
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन की प्रशासनिक तैयारियां भी तेज हो गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने गुरुवार को सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की और चुनाव तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्वाचन आयोग की निर्धारित गाइडलाइन और इलेक्शन प्लानर के अनुसार चरणबद्ध तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को मतदान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने को कहा। निरीक्षण के दौरान मतदान केंद्र के भवन की स्थिति, बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मतदान केंद्र केवल चुनाव के दिन मतदान कराने की जगह नहीं होते, बल्कि वहां मतदाताओं के लिए न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता भी चुनाव प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण प्रशासन को समय रहते सभी मतदान केंद्रों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने को कहा गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला स्तर पर निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों और प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी निर्देश दिए। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनरों को आयोग द्वारा निर्धारित तिथियों के अनुसार प्रशिक्षण में प्रतिभाग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इसके साथ ही सभी जिलों को स्वीप प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वीप यानी मतदाता जागरूकता से संबंधित गतिविधियों के माध्यम से मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया, मतदान और मतदाता सूची से जुड़े विषयों के बारे में जानकारी देने की व्यवस्था की जाती है।
बैठक में बूथ और विधानसभा स्तर पर आवश्यक कार्मिकों का विवरण तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही चुनावी कार्यों के लिए आवश्यक वाहनों और कार्मिकों की सूची तैयार करने को कहा गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि आगामी माह में निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उत्तराखंड का दौरा किया जा सकता है। इस दौरान जिलों में चल रही चुनावी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा संभावित है। इसलिए जिलाधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रगति की भी जानकारी ली गई। इससे स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनाव के प्रशासनिक प्रबंधन में मतदाता सूची का सत्यापन भी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
चार खबरों का संयुक्त संदेश
24 सितंबर 2026 को उत्तराखंड में सामने आई इन चार प्रमुख गतिविधियों को एक साथ देखें तो प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संगठन, मतदाता सूची, चुनावी प्रशासन और प्रवेश व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्तरों पर गतिविधियां बढ़ी हुई दिखाई देती हैं।
भाजपा ने संगठन महामंत्री के रिक्त पद पर फणीन्द्र नाथ शर्मा को जिम्मेदारी दी है। SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस चल रही है। मेडिकल दाखिलों से जुड़े संदिग्ध प्रमाणपत्रों के बाद आयुष-यूजी में सत्यापन व्यवस्था मजबूत की गई है। वहीं निर्वाचन विभाग मतदान केंद्रों, कार्मिकों, प्रशिक्षण, स्वीप प्लान और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर जिलों को चरणबद्ध निर्देश दे रहा है।
अब आने वाले महीनों में इन सभी प्रक्रियाओं की प्रगति पर राजनीतिक दलों, प्रशासन और मतदाताओं की नजर रहेगी। विशेष रूप से मतदाता सूची में नाम और विवरण की शुद्धता, मतदान केंद्रों की सुविधाएं और चुनावी अधिकारियों का प्रशिक्षण आगामी विधानसभा निर्वाचन की प्रशासनिक तैयारियों के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
