इस दौरान ईडी ने चंदन जीना के घर से लाखों का कैश, सोना और के 12 लग्जरी गाड़ियां व घड़ियां बरामद की हैं। बताया जा रहा है कि अब तक बरामद माल की कीमत करोड़ों में है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
ईडी की कार्रवाई UKSSSC की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा 2016 में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं से जुड़े मामले में की गई है। 10 साल बाद हुई इस कार्रवाई से प्रदेश का सियासी माहौल गरमा गया है। सुबह -सुबह खबर आई कि पूर्व सीएम हरीश रावत ने कांग्रेस के पदों से इस्तीफा दे दिया है।
इस्तीफा दे सकते हैं, अगर पार्टी कहेगीहालांकि खुद हरीश रावत ने सामने आकर कहा कि उनके निजी सचिव पर हुई कार्रवाई से कांग्रेस की भ्रष्ट्राचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर न हो, इसके लिए वे कांग्रेस से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर पार्टी कहेगी। साफ है कि हरदा ने इस्तीफा दिया नहीं इस्तीफे की पेशकश की है। जो पार्टी को तय करना है। ये पहली बार नहीं जब हरीश रावत या उनके करीबी इस तरह किसी बड़े विवाद में फंसे हुए हैं।
3 बार सीएम एक भी कार्यकाल पूरा नहीं
हरीश रावत उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे बड़े और मजबूत नेता है। 1980 में अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी को हराकर वह सबसे पहले संसद पहुंचे। वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। तीन बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी बने। हालांकि एक बार भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं।
9 विधायकों ने की थी हरदा की बगावतमूल रूप से अल्मोड़ा के हरीश रावत ने वकालत की हुई है। अपनी सियासी चालों से विरोधियों को घायल करने वाले हरदा खुद भी कई बार सियासी बवंडर में फंस चुके हैं। हरदा जब उत्तराखंड के सीएम रहे तो मार्च 2016 में उनके खिलाफ कांग्रेसियों ने ही बगावत कर दी। कांग्रेस के 9 विधायकों ने बगावत कर बीजेपी का दामन थामा इसके बाद राज्य में कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुए फ्लोर टेस्ट में हरीश रावत अपनी सरकार बचाने में सफल रहे और फिर से सीएम की कुर्सी पर बैठे।
विधायकों के खरीद फरोख्त का स्टिंग ऑपरेशन2016 के उस समय एक स्टिंग ऑपरेशन भी सामने आया। तब सरकार बचाने के लिए हरदा पर विधायकों के खरीद फरोख्त का आरोप लगा। इस मामले की सीबीआई जांच चलने के साथ ही नोटिस भी भेज चुकी है। इस विवाद से भी हरदा काफी समय तक विवादों में रहे।
मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने का वादा2022 के विधानसभा चुनाव में हरदा का मुस्लिम यूनिवर्सिटी सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। हरीश रावत ने लगातार इस बात का खंडन किया है कि उन्होंने कभी भी राज्य में कोई मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने का वादा किया था। भाजपा का आरोप था कि हरदा ने कांग्रेस की सरकार आने पर उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी का वादा किया है। जो कि आज तक हरदा का पीछा नहीं छुड़ा पाए हैं।
पंजाब प्रभारी रहते की विवादित टिप्पणीहरीश रावत ने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी रहते नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य कार्यकारी अध्यक्षों की तुलना सिख इतिहास के पवित्र पंज प्यारों से कर दी थी। इस टिप्पणी पर भारी सिख समुदाय और राजनीतिक दलों ने गहरी आपत्ति जताई, जिसके बाद काफी विवाद हुआ। इसके बाद हरीश रावत ने विवाद को खत्म करने के लिए माफी मांगी और प्रायश्चित के रूप में गुरुद्वारे में जाकर सेवा की थी।
