उत्तराखंड। उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न संभावित आपदा के जोखिम को कम करने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में स्थित 13 संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का विशेषज्ञ दल व्यापक सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। अध्ययन में झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले बदलाव, आसपास के भू-भाग, संभावित खतरे के कारकों और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन किया जाएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की स्थिति का नियमित आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर आपदा से पहले प्रभावी तैयारी सुनिश्चित की जाएगी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
जोखिम कम करने पर फोकस
ग्लेशियर झीलों की निरंतर निगरानी के लिए अत्याधुनिक सेंसर लगाए जाएंगे और रियल टाइम डेटा प्राप्त करने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। निगरानी उपकरणों की संख्या बढ़ाने के साथ चेतावनी जारी करने के लिए वैकल्पिक संचार माध्यम भी विकसित किए जाएंगे। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की राहत एवं बचाव तैयारियों को भी मजबूत किया जाएगा।
नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी
आपदा प्रबंधन विभाग की राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों से काफी हद तक समान हैं। नेपाल में हाल में सामने आई आपदा से सीख लेते हुए उत्तराखंड में संभावित जोखिमों का पूर्व आकलन और समय रहते तैयारी आवश्यक है। नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट सिस्टम को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सैनिक कल्याण को प्राथमिकता, अग्निवीरों के लिए बनेगा रोजगार सेल
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के कल्याण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इसी दिशा में अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए पृथक रोजगार सेल गठित करने का निर्णय लिया गया है। सेना में चार वर्ष की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार उपलब्ध कराने और उनके पुनर्वास में यह सेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उत्तराखंड सरकार पहले ही सरकारी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ले चुकी है।
शहीदों के पैतृक गांवों में स्थापित होंगी प्रतिमाएं
देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य शहीदों की वीरता और बलिदान की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके परिवारों के प्रति सम्मान प्रकट करना है। कैबिनेट की बैठक में इस संबंध में अहम निर्णय लिया गया है।
परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को ₹2 करोड़
धामी सरकार ने बलिदानी सैनिकों के परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में भी बड़ी वृद्धि की है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को अब ₹1.5 करोड़ के स्थान पर ₹2 करोड़ की अनुग्रह राशि मिलेगी। अन्य बलिदानी सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गई है।
सैन्य धाम का निर्माण पूरा, लोकार्पण की तैयारी
देहरादून में निर्मित सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब इसके लोकार्पण की तैयारियां चल रही हैं। शहीद सैनिकों की स्मृति में बनाए गए सैन्य धाम में उनके घर-आंगन की मिट्टी को सम्मानपूर्वक लाया गया है। यहां बलिदानी सैनिकों की शौर्य गाथाओं को भी प्रदर्शित किया गया है। सैन्य धाम को उत्तराखंड की सैन्य परंपरा, वीरता और गौरवशाली विरासत के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है।
28 शहीद परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी
बलिदानी परिवारों के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने की नीति के तहत अब तक 28 आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है। सरकार ने सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की समय सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी है। इससे शहीद परिवारों के पात्र आश्रितों को सरकारी सेवा का अवसर प्राप्त करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
सैनिकों को संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में राहत
सेवारत और पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीद में भी आर्थिक राहत दी जा रही है। ₹25 लाख तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य सैनिक एवं पूर्व सैनिक परिवारों को आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।
ग्लेशियर झीलों की निगरानी से लेकर सैनिक परिवारों के सम्मान और अग्निवीरों के पुनर्वास तक, राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन और सैनिक कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को प्राथमिकता दी है।
