रुद्रपुर में पहली बार पर्वतीय समाज की रामलीला का भव्य शुभारंभ, मनोकामना माता मंदिर से गूंजी रामभक्तिभक्ति की गूंज, पर्वतीय संस्कृति का गौरव और सामाजिक एकता का संकल्प बना रामलीला रिहर्सल का आधार

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रुद्रपुर में पहली बार पर्वतीय समाज की रामलीला का भव्य शुभारंभ, मनोकामना माता मंदिर से गूंजी रामभक्ति
भक्ति की गूंज, पर्वतीय संस्कृति का गौरव और सामाजिक एकता का संकल्प बना रामलीला रिहर्सल का आधार
रुद्रपुर। धर्म, आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम रविवार को श्री श्री मनोकामना माता मंदिर, हंस विहार फेस-2 में देखने को मिला, जब रुद्रपुर में पहली बार पर्वतीय समाज की ओर से आयोजित होने जा रही रामलीला के मंचन की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ किया गया। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, हनुमान जी की स्तुति, श्री रामचंद्र कृपालु भज मन और हनुमान चालीसा के पावन पाठ के साथ रामलीला की रिहर्सल का श्रीगणेश हुआ। भक्ति संगीत और प्रभु श्रीराम के जयघोष से पूरा वातावरण राममय हो उठा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


यह आयोजन पर्वतीय समाज के लिए एक सामान्य सांस्कृतिक कार्यक्रम से कहीं अधिक महत्व रखता है। यह उस सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, जो पहाड़ की मिट्टी से निकलकर मैदानी क्षेत्रों में भी अपनी जड़ों, परंपराओं और धार्मिक विरासत को मजबूती से जीवंत रखे हुए है। रुद्रपुर जैसे औद्योगिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर में पर्वतीय समाज की ओर से रामलीला का आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
हनुमान स्तुति से हुआ पावन श्रीगणेश
रामलीला रिहर्सल के प्रथम दिन की शुरुआत भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी की स्तुति से हुई। इसके बाद श्री रामचंद्र कृपालु भज मन का भावपूर्ण गायन और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। जैसे ही मंदिर परिसर में भक्ति के स्वर गूंजे, श्रद्धालुओं और समाज के लोगों के बीच आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया।
हारमोनियम पर पीसी शर्मा ने भक्ति संगीत की मधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भाव के साथ भजन एवं हनुमान चालीसा में सहभागिता की। मंदिर परिसर में ऐसा वातावरण बना, मानो रामलीला का मंचन आरंभ होने से पहले ही प्रभु श्रीराम की कथा का आध्यात्मिक भाव उपस्थित हो गया हो।
इस अवसर पर पर्वतीय समाज समिति के अध्यक्ष गिरीश जोशी, डॉ. एल.एम. उप्रेती सहित समाज के अनेक वरिष्ठजन, पदाधिकारी, कलाकार और श्रद्धालु उपस्थित रहे। समाज के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
पर्वतीय समाज के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक
रुद्रपुर में पहली बार पर्वतीय समाज की ओर से रामलीला का आयोजन अपने आप में सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रामलीला की समृद्ध परंपरा रही है। गांवों और कस्बों में रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, उसने धार्मिक शिक्षा, लोकभाषा, लोकसंगीत, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक संस्कारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य किया है।
पर्वतीय समाज के लोग रोजगार, शिक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से देश के विभिन्न हिस्सों में बसे हैं। रुद्रपुर भी ऐसे ही शहरों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में पर्वतीय समाज के परिवार लंबे समय से निवास कर रहे हैं। ऐसे में अपनी जन्मभूमि की संस्कृति और परंपराओं को कर्मभूमि में जीवंत रखना समाज की सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है और गौरव भी।
इसी भावना के साथ आयोजित होने जा रही यह रामलीला पर्वतीय समाज की सामूहिक शक्ति, संगठन क्षमता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का परिचय देगी।
आस्था के साथ नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल
आज की युवा पीढ़ी आधुनिक शिक्षा, तकनीक और बदलती जीवनशैली के बीच आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में रामलीला जैसे आयोजन युवाओं और बच्चों को भारतीय संस्कृति, मर्यादा, त्याग, सेवा, कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।
प्रभु श्रीराम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्य का संदेश देता है। माता सीता त्याग और धैर्य की प्रेरणा हैं, लक्ष्मण सेवा और समर्पण के प्रतीक हैं तथा हनुमान जी भक्ति, शक्ति और निष्ठा के आदर्श हैं। रामलीला के माध्यम से इन आदर्शों को मंच पर जीवंत करने का प्रयास समाज के बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण में भी योगदान दे सकता है।
आयोजकों का उद्देश्य केवल मंच पर पात्रों को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि रामकथा के मूल संदेश को समाज तक पहुंचाना है। यही कारण है कि रिहर्सल के शुभारंभ से पहले धार्मिक विधि-विधान और भक्ति कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया गया।
तैयारियों में जुटे कलाकार और आयोजन समिति
रिहर्सल के शुभारंभ के साथ ही कलाकारों और आयोजन समिति से जुड़े सदस्यों की तैयारियां तेज हो गई हैं। पात्रों के चयन, संवाद, अभिनय, मंच व्यवस्था, वेशभूषा, संगीत और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कार्य शुरू कर दिया गया है।
रामलीला की सफलता के लिए कलाकारों का अभ्यास सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। संवादों की शुद्धता, भाव-भंगिमा, मंच पर प्रस्तुति, पात्रों की भूमिका और संगीत के समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था को भी आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है।
आयोजन समिति की आगामी बैठक में रामलीला मंचन की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा तथा आयोजन को व्यवस्थित और भव्य स्वरूप देने के लिए समाज के लोगों से सहयोग लिया जाएगा।
सामाजिक एकता का संदेश
पर्वतीय समाज की विशेष पहचान उसकी सामूहिकता और आपसी सहयोग की भावना रही है। गांवों में सामूहिक पर्व, धार्मिक आयोजन, मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज की एकता मजबूत होती रही है। रुद्रपुर में रामलीला का आयोजन इसी परंपरा को नई जमीन और नई पीढ़ी के साथ जोड़ने का प्रयास है।
आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि रामलीला समाज के हर वर्ग को एक मंच पर लाने का माध्यम बनेगी। इसमें वरिष्ठजन अपने अनुभव और मार्गदर्शन देंगे, युवा अपनी ऊर्जा और रचनात्मकता से आयोजन को गति देंगे तथा बच्चे अभिनय और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
इस तरह यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सहभागिता का भी संदेश देगा।
पहाड़ की संस्कृति, रुद्रपुर की पहचान
रुद्रपुर लंबे समय से विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों का संगम रहा है। यहां उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से आए परिवारों ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और सामाजिक योगदान से शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पर्वतीय समाज की रामलीला इस योगदान के साथ उसकी सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाने का अवसर प्रदान करेगी।
यह आयोजन यह संदेश भी देगा कि स्थान बदलने से संस्कृति की जड़ें समाप्त नहीं होतीं। अपनी भाषा, लोकगीत, देवी-देवताओं, पर्व-त्योहारों और परंपराओं के प्रति सम्मान समाज को अपनी पहचान से जोड़े रखता है।
श्री श्री मनोकामना माता मंदिर से शुरू हुआ यह धार्मिक और सांस्कृतिक अभियान आने वाले दिनों में व्यापक रूप लेने की उम्मीद है। रिहर्सल के प्रथम दिन समाज में जिस प्रकार का उत्साह दिखाई दिया, उससे आयोजन को लेकर लोगों की भावनाएं स्पष्ट रूप से सामने आईं।
रामलीला के साथ जीवंत होगी सांस्कृतिक विरासत
पर्वतीय समाज की इस रामलीला में धार्मिक कथा के साथ पहाड़ की सांस्कृतिक संवेदना की झलक भी देखने को मिल सकती है। पारंपरिक संगीत, सामूहिक सहभागिता और समाज के वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन आयोजन को विशिष्ट पहचान देगा।


रामलीला रिहर्सल के प्रथम दिन उपस्थित गणमान्यजन एवं समिति पदाधिकारी
गिरीश चंद्र जोशी — अध्यक्ष, पर्वतीय समाज समिति
हीरा बल्लभ पाण्डेय — महामंत्री, पर्वतीय समाज समिति
संजय अधिकारी — कोषाध्यक्ष, पर्वतीय समाज समिति
रमेश चंद्र जोशी — महामंत्री, रामलीला कमेटी
रमेश चंद्र ओली — अध्यक्ष, रामलीला कमेटी
शिवपाल सिंह भाकुनी — कोषाध्यक्ष, रामलीला कमेटी
डॉ. ललित मोहन उप्रेती
कल्याण जी — निदेशक
लीलाधर — निदेशक
पी.सी. शर्मा, निर्देशक
पुष्पा रावत
पुष्पा शर्मा
कविता रावत
रेखा पनेरू
यमुना बोरा
ममता नेगी
कल्याण सिंह परिहार
अंबा दत्त जोशी
देवेंद्र सिंह
शिवपाल सिंह भाकुनी
जीवन पनेरू
फकीर सिंह बिष्ट
चंद्र शेखर पंत
मेहरबान सिंह नेगी
हेम पनेरू
पुराण सिंह
कल्याण सिंह धामी
गौरी शंकर विनवाल
पूरन चंद्र जोशी
रमेश चंद्र जोशी
आनंद सिंह कपकोटी
धन सिंह नेगी
सुरेंद्र सिंह
मनोज पालिवाल
चंचल मोहन सिंह नेगी
बी.जी. रावत
जगदीश चंद्र जोशी
मोहन सिंह राणा
रामलीला रिहर्सल के प्रथम दिन कार्यकारिणी का गठन कर उपस्थित सदस्यों को विभिन्न जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं।


यह अवसर समाज के उन बुजुर्गों के लिए भी विशेष होगा, जिन्होंने अपने गांवों में रामलीला और धार्मिक आयोजनों की परंपरा को देखा और जिया है। उनके अनुभव नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।
आयोजकों की यह पहल रुद्रपुर में पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक एकता को नई दिशा देने वाली पहल के रूप में सामने आई है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह रामलीला एक मजबूत परंपरा का रूप लेगी और समाज के हर परिवार को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

रुद्रपुर में पहली बार पर्वतीय समाज की ओर से आयोजित होने जा रही इस रामलीला के शुभारंभ पर हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की ओर से सभी आयोजकों, कलाकारों, पदाधिकारियों, समाज के वरिष्ठजनों और सहयोगियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
श्रीराम की मर्यादा, हनुमान जी की भक्ति और पर्वतीय समाज की सामूहिक शक्ति के इस संगम से निकलने वाला सांस्कृतिक संदेश निश्चित रूप से समाज को नई ऊर्जा देगा। यह रामलीला रुद्रपुर की सांस्कृतिक धरती पर पर्वतीय समाज की आस्था, परंपरा और गौरव की एक नई पहचान स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मनोकामना माता मंदिर से गूंजे रामभक्ति के स्वर अब आने वाले दिनों में मंच पर रामकथा का रूप लेंगे। पर्वतीय समाज की यह पहल अपनी जड़ों से जुड़े रहने, नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और सामूहिक सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने का सुंदर संकल्प है।


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