रुद्रपुर कलक्ट्रेट पर तीसरे दिन भी किसानों का महाधरना, DM को बुलाने पर अड़े किसान!रुद्रपुर में किसानों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी, मांगों पर अड़े किसानकलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर धरना जारी, सात सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन; बारिश के बीच भी डटे रहे आंदोलनकारी

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रुद्रपुर। सात सूत्रीय मांगों को लेकर रुद्रपुर कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर किसानों का धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार से शुरू हुआ किसानों का आंदोलन शनिवार को रातभर चलने के बाद रविवार को भी जारी

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

रुद्रपुर कलक्ट्रेट पर तीसरे दिन भी किसानों का महाधरना, DM को बुलाने पर अड़े किसान,उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर कलक्ट्रेट के मुख्य गेट पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के आह्वान पर चल रहा किसानों का महाधरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। सैकड़ों किसान चार सूत्रीय मांगों को लेकर कलक्ट्रेट परिसर के बाहर डटे हुए हैं। किसानों ने जिलाधिकारी को मौके पर बुलाकर समस्याएं सुनने की मांग की है।
किसानों की प्रमुख मांगों में कृषि कार्यों के लिए बिजली बिल माफी, किसान पेंशन व्यवस्था बहाल करने और बाजपुर सहित अन्य क्षेत्रों में वर्षों से काबिज किसानों को भूमि का मालिकाना हक देने की मांग शामिल है। आंदोलनकारियों ने कलक्ट्रेट गेट के बाहर टेंट लगाकर लंगर की व्यवस्था भी की है।
किसान नेताओं ने आंदोलन को गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने समर्थन दिया, मगर उन्हें मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी गई। पहले दिन बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कलक्ट्रेट और एसपी कार्यालय के आसपास पुलिस व पीएसी तैनात है तथा यातायात के लिए रूट डायवर्ट किया गया है।
प्रशासन ने किसानों से वार्ता के लिए टीम गठित की है। किसान शाम को बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे।

रहा। लगातार बारिश और प्रशासन की ओर से की गई सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद किसान धरना स्थल पर डटे रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
आंदोलन के तीसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहे। मुख्य गेट पर किसानों की मौजूदगी के कारण कलेक्ट्रेट परिसर में आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेना पड़ा।
दूसरे दिन मिला था विपक्षी नेताओं का समर्थन
शनिवार को आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल धरना स्थल पर पहुंचे थे। तीनों नेताओं ने किसानों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और आंदोलन को समर्थन दिया।
नेताओं ने कहा था कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शासन-प्रशासन को मांगों के समाधान के लिए ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया था कि उनकी आवाज जनप्रतिनिधियों के स्तर पर भी उठाई जाएगी।
सात सूत्रीय मांगों पर किसान कायम
किसानों की प्रमुख मांगों में नलकूपों की बिजली पूरी तरह मुफ्त करना, 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की मांग और स्मार्ट मीटर अभियान को तत्काल रोकना शामिल है। किसानों का कहना है कि सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है और नलकूपों की बिजली किसानों की खेती से सीधे जुड़ी है।
किसानों ने बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की भूमि से जुड़े मामले का जल्द समाधान करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही सितारगंज की बंद पड़ी चीनी मिल से वर्ष 2011 से किसानों के बकाया करीब 25 करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान कराने की मांग की गई है।
भूमि से जुड़े मामलों में किसानों को मालिकाना हक देने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा है। किसान नेताओं का कहना है कि वर्षों से भूमि पर निर्भर परिवारों के अधिकारों को लेकर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
चुनावी वादे पूरे करने की मांग
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के किसान नेताओं ने सरकार पर चुनाव के दौरान किसानों से किए गए वादों को पूरा करने में देरी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया था। किसान अब उस वादे को धरातल पर लागू करने की मांग कर रहे हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर लेना चाहिए। खेती की लागत, बिजली, भूमि और गन्ना भुगतान से जुड़े मुद्दे हजारों किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति से जुड़े हुए हैं।
बारिश के बीच जारी रहा धरना
तीन दिनों से जारी आंदोलन में मौसम भी किसानों के हौसले को डिगा नहीं सका। बारिश के बीच किसान धरना स्थल पर मौजूद रहे। शनिवार को श्री नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी की ओर से आंदोलनकारियों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी। किसानों ने लंगर ग्रहण कर कमेटी का आभार जताया।
किसानों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि किसान हित से जुड़े कई सवालों को लेकर शुरू किया गया संघर्ष है। किसान नेताओं ने युवाओं से भी आंदोलन में भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
प्रशासन से वार्ता का प्रयास
शनिवार शाम अपर जिलाधिकारी प्रशासन मनोज उपाध्याय ऊर्जा निगम और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने किसानों की मांगों को सुना और शासन स्तर से जुड़े मामलों को उच्च स्तर पर भेजने तथा स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों से कार्रवाई कराने का भरोसा दिया।
प्रशासन की ओर से किसानों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की गई, हालांकि किसान अपनी मांगों पर ठोस निर्णय के बाद ही आंदोलन समाप्त करने की बात पर कायम रहे। इसके बाद रविवार को भी धरना जारी रखा गया।
कलेक्ट्रेट में लगातार तीसरे दिन बनी रही स्थिति
किसानों के आंदोलन के कारण कलेक्ट्रेट परिसर में लगातार तीसरे दिन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। मुख्य गेट पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। प्रशासन की ओर से भी अधिकारियों को मौके पर मौजूद रखा गया। किसानों की सभाओं के दौरान वक्ताओं ने सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग दोहराई।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए किसानों की सात सूत्रीय मांगों पर स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत के माध्यम से समाधान का रास्ता खुला है, लेकिन किसानों की मांगों पर ठोस कार्रवाई भी जरूरी है।
युवाओं से जुड़ने की अपील
धरना स्थल पर किसान नेताओं ने युवाओं से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जमीन और खेती से जुड़े मुद्दे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े हैं। युवाओं को किसान परिवारों की समस्याओं और अपने अधिकारों को लेकर जागरूक होना होगा।
किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है और आने वाले दिनों में किसानों की भागीदारी और बढ़ सकती है।
तीसरे दिन भी आंदोलन जारी
रुद्रपुर कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर किसानों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहने से प्रशासन के सामने किसानों की मांगों के समाधान की चुनौती बनी हुई है। तीन दिनों से धरना दे रहे किसान अपनी मांगों पर कायम हैं। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को जल्द ठोस निर्णय लेना चाहिए।
धरना स्थल पर भूमि बचाओ संघर्ष समिति और भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट से जुड़े पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद रहे।
किसानों ने दोहराया कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। अब आंदोलन के तीसरे दिन सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।


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