1 सितंबर शहीद दिवस पर राज्य आंदोलनकारियों की हुंकार: चिन्हीकरण, 10 प्रतिशत आरक्षण और सम्मानजनक पेंशन की मांग?

Spread the love


राज्य आंदोलनकारियों की हुंकार: हक और सम्मान के लिए सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान
चिन्हीकरण, 10% आरक्षण और ₹20 हजार पेंशन की मांग पर आंदोलनकारी लामबंद, 1 सितंबर को खटीमा में सरकार को घेरने की चेतावनी

खटीमा। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान खटीमा गोलीकांड में शहीद हुए आंदोलनकारियों की स्मृति में मनाए जाने वाले 1 सितंबर शहीद दिवस से पहले कुमाऊं मंडल के वंचित, पीड़ित और शोषित राज्य आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। राज्य आंदोलनकारियों की ओर से जिलाधिकारी खटीमा के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित मांगपत्र भेजकर पूरे जिले में वंचित वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कराने, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करते हुए पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने, दोहरी पेंशन के कारण प्रभावित पूर्व सैनिकों एवं अन्य राज्य आंदोलनकारियों की बंद पेंशन बहाल करने तथा चिन्हित आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा देने की मांग की गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

ज्ञापन देने वालों में भगवान जोशी की अध्यक्षता में मुख्य रूप से सुरेश चंद्र, रमेश चंद पांडे, हरीश चन्द्र फुलेरा, नारायण दत्त तिवारी, वीर बहादुर चंद्र, धनी चंद्र, राम सिंह धामी, प्रकाश चंद्र, नारायण सिंह दानू, नारायण चंद्र, गीता कांडपाल, निर्मला मेहता, पूरन जोशी, विशन भंडारी, राकेश धामी, हरीश कॉलोनी, चंचल सिंह खोलिया, दया किशन, विक्रम चंद्र, दीवान सिंह। आदि उपस्थित थे।


राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बाद भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अनेक लोग सरकारी अभिलेखों में चिन्हीकरण से वंचित हैं। आंदोलनकारियों ने मांगपत्र में कहा है कि राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए सरकार को ठोस एवं समान नीति बनानी चाहिए। उनका आरोप है कि अलग-अलग जिलों और तहसीलों में चिन्हीकरण के अलग मानक अपनाए जाने से वास्तविक आंदोलनकारियों का एक बड़ा वर्ग सरकारी सुविधाओं से वंचित रह गया है।
मांगपत्र में खटीमा क्षेत्र के ऐसे आंदोलनकारियों का विशेष उल्लेख किया गया है, जिनका चिन्हीकरण विभिन्न कारणों से लंबित या निरस्त हुआ है। आंदोलनकारियों के अनुसार खटीमा में करीब 253 आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इसी प्रकार की स्थिति कुमाऊं मंडल के अन्य क्षेत्रों में भी सामने आ रही है। आंदोलनकारियों ने पूरे जिले में विशेष अभियान चलाकर पात्र लोगों का पुनः परीक्षण और चिन्हीकरण कराने की मांग उठाई है।
10 प्रतिशत आरक्षण में नियुक्ति की मांग
राज्य आंदोलनकारियों ने 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को लेकर भी सरकार के समक्ष गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आरक्षण लागू होने के बाद भी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल आंदोलनकारी परिवारों के अनेक अभ्यर्थियों को नियुक्ति का लाभ नहीं मिल पाया है। मांगपत्र में दावा किया गया है कि नियुक्ति से वंचित केवल सात अभ्यर्थियों को शासन स्तर से नियुक्ति दी गई, जबकि अन्य पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।
आंदोलनकारियों के अनुसार देहरादून स्थित शहीद स्थल पर नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 65 दिनों से धरना चल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से धरना जारी रहने के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित गति से निर्णय सामने नहीं आया है। उन्होंने सरकार से सभी पात्र एवं नियुक्ति से वंचित राज्य आंदोलनकारी परिवारों के अभ्यर्थियों की स्थिति की समीक्षा कर शीघ्र नियुक्ति देने की मांग की है।
आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि अनेक राज्य आंदोलनकारी परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं। ऐसे परिवारों के युवाओं को आरक्षण का लाभ मिलने से रोजगार का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने सरकार से नियुक्ति संबंधी मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और पात्र अभ्यर्थियों को जल्द अवसर देने की मांग की है।
5500 रुपये की पेंशन बढ़ाकर 20 हजार करने की मांग
राज्य आंदोलनकारियों ने वर्तमान पेंशन व्यवस्था को भी अपर्याप्त बताते हुए इसमें सम्मानजनक वृद्धि की मांग की है। मांगपत्र में कहा गया है कि राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले चिन्हित आंदोलनकारियों को वर्तमान में अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर पेंशन दी जा रही है। कई आंदोलनकारी परिवारों के लिए मौजूदा पेंशन राशि बढ़ती महंगाई के दौर में पर्याप्त सहारा प्रदान करने की स्थिति में नहीं है।
आंदोलनकारियों ने मांग की है कि सभी चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को एक समान सम्मान देते हुए उन्हें ‘राज्य निर्माण सेनानी’ का दर्जा दिया जाए और मासिक पेंशन बढ़ाकर 20 हजार रुपये की जाए। उनका कहना है कि राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को सरकार की प्राथमिकता में शामिल किया जाना चाहिए।
दोहरी पेंशन के कारण प्रभावित पूर्व सैनिकों की पेंशन बहाल हो
मांगपत्र में पूर्व सैनिक राज्य आंदोलनकारियों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया है। आंदोलनकारियों के अनुसार दोहरी पेंशन से जुड़े नियमों के कारण कई पूर्व सैनिकों और अन्य घोषित राज्य आंदोलनकारियों की आंदोलनकारी पेंशन बंद हो गई है। उन्होंने ऐसी पेंशन को पुनः सुचारू करने की मांग की है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में पूर्व सैनिकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे आंदोलनकारियों को पेंशन संबंधी नियमों के कारण सम्मान से वंचित किए जाने की स्थिति का समाधान सरकार को मानवीय दृष्टिकोण से करना चाहिए। उन्होंने दोहरी पेंशन संबंधी प्रावधानों की समीक्षा कर प्रभावित आंदोलनकारियों को राहत देने की मांग की है।
1 सितंबर को मुख्यमंत्री के समक्ष विरोध का ऐलान
राज्य आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शासन स्तर से गंभीरता के साथ कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो 1 सितंबर को खटीमा गोलीकांड के शहीद दिवस के अवसर पर कुमाऊं मंडल के विभिन्न जिलों से आंदोलनकारी एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। आंदोलनकारियों ने कहा कि शहीद दिवस उनके लिए केवल स्मरण का अवसर नहीं, राज्य निर्माण आंदोलन के उद्देश्यों और संघर्ष की याद को जीवंत रखने का दिन भी है।
उनका कहना है कि जिन लोगों ने राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया, उनके परिवारों और वंचित आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान लंबे समय से लंबित है। सरकार से अपेक्षा है कि शहीद दिवस से पहले मांगों पर ठोस निर्णय लेकर आंदोलनकारियों को सकारात्मक संदेश दिया जाएगा।
मांगपत्र में जिला चम्पावत, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल समेत पूरे कुमाऊं मंडल के वंचित राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं को सामूहिक रूप से उठाने की बात कही गई है। आंदोलनकारियों ने सरकार से संवाद स्थापित कर समस्याओं के समाधान की दिशा में तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
आंदोलनकारियों ने रखीं प्रमुख मांगें
राज्य आंदोलनकारियों की ओर से रखी गई प्रमुख मांगों में पूरे जिले में वंचित वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण, चिन्हीकरण में समान मानक लागू करना, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति, नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों के मामलों की समीक्षा, दोहरी पेंशन के कारण बंद पेंशन की बहाली, सभी चिन्हित आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा और मासिक पेंशन को बढ़ाकर 20 हजार रुपये करना शामिल है।
आंदोलनकारियों ने सरकार से यह भी मांग की है कि राज्य आंदोलन से जुड़े मामलों में जिला स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसी पात्र व्यक्ति को दस्तावेजी या प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण वर्षों तक इंतजार की स्थिति से गुजरना न पड़े।
शहीद दिवस से पहले बढ़ी सक्रियता
1 सितंबर का दिन उत्तराखंड के राज्य आंदोलन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। खटीमा गोलीकांड में आंदोलनकारियों के बलिदान ने राज्य निर्माण आंदोलन को नई दिशा दी थी। ऐसे में शहीद दिवस से पहले आंदोलनकारियों की ओर से उठाई गई मांगों ने एक बार फिर राज्य आंदोलन के मूल मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
कुमाऊं मंडल के आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य निर्माण की रजत जयंती के दौर में सरकार को आंदोलनकारियों की लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान करना चाहिए। उनका कहना है कि सम्मान, रोजगार, पेंशन और चिन्हीकरण से जुड़े मामलों का समाधान राज्य आंदोलन के शहीदों और आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मांगपत्र में निवेदक के रूप में भगवान जोशी सहित राज्य आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने अधिकारों और सम्मान से जुड़े विषयों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। 1 सितंबर को खटीमा में आयोजित होने वाले शहीद दिवस कार्यक्रम के दौरान सरकार की ओर से दिए जाने वाले संदेश और आंदोलनकारियों की मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर कुमाऊं मंडल के आंदोलनकारियों की नजर रहेगी।


Spread the love