मेयर विकास शर्मा ने किया “दीपा पहाड़ी” का शुभारंभ, बोले— यह प्रतिष्ठान उत्तराखंड की संस्कृति और स्थानीय उत्पादों का सशक्त केंद्र बनेगा

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रुद्रपुर। गंगापुर रोड स्थित “दीपा पहाड़ी” प्रतिष्ठान का शुभारंभ रुद्रपुर नगर निगम के मेयर विकास शर्मा ने विधिवत पूजा-अर्चना और फीता काटकर किया। हरेला पर्व के शुभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। उद्घाटन के बाद महिलाओं ने प्रतिष्ठान में उपलब्ध उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों की जमकर खरीदारी की।

इस अवसर पर मेयर विकास शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “दीपा पहाड़ी केवल एक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और लोक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है। आज आवश्यकता है कि हम अपने स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक खाद्य पदार्थों और लोककलाओं को अपनाकर पहाड़ के किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों का उत्साह बढ़ाएं। दीपा माटेला का यह प्रयास आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है। मुझे विश्वास है कि यह प्रतिष्ठान आने वाले समय में उत्तराखंड की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।” उन्होंने प्रतिष्ठान की सफलता और निरंतर प्रगति के लिए शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद भी दिया।

प्रतिष्ठान संचालिका दीपा माटेला ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “दीपा पहाड़ी” के माध्यम से उत्तराखंड के शुद्ध पारंपरिक उत्पाद, जैविक अनाज, पहाड़ी मसाले, बुरांश, जड़ी-बूटियां, हस्तशिल्प और ऐपण कला जैसी सांस्कृतिक धरोहर को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका उद्देश्य पहाड़ के किसानों, महिलाओं और स्थानीय कारीगरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

कार्यक्रम में सुधा पटवाल ने कहा कि “उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराएं और पारंपरिक उत्पाद हमारी अमूल्य धरोहर हैं। ‘दीपा पहाड़ी’ जैसी पहल इन विरासतों को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। यह  व्यापार के  साथ साथ संस्कृति संरक्षण का अभियान है।”

नीलम कांडपाल ने अपने संबोधन में कहा कि “पहाड़ की मातृशक्ति वर्षों से पारंपरिक उत्पादों और लोककलाओं को जीवित रखे हुए है। ऐसे प्रतिष्ठान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उत्तराखंड की पहचान को देशभर में स्थापित करने का कार्य करेंगे।”

उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिष्ठान में उपलब्ध मंडुवा, झंगोरा, भट्ट, गहत, राजमा, पहाड़ी मसाले, बुरांश उत्पाद, शहद, अचार, जड़ी-बूटियों तथा ऐपण से सुसज्जित पूजा सामग्री को लोगों ने खूब सराहा और जमकर खरीदारी की। पूरे कार्यक्रम के दौरान हरेला पर्व की पारंपरिक संस्कृति और उत्तराखंड की लोक विरासत की झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने “दीपा पहाड़ी” की इस पहल को उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने वाला सराहनीय प्रयास बताया।


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