भाजपा सरकारी मंच पर सियासी रिहर्सल! रुद्रपुर में मिशन 2027 की पटकथा या नारेबाजी का महोत्सव?एक चेहरा, दो नारे! जिस तरफ देखी भीड़, उसी तरफ बुलंद हुई आवाज़”

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रुद्रपुर। नगर निगम सभागार में आयोजित सरकारी कार्यक्रम का उद्देश्य विकास योजनाओं, जनसंवाद और जनहित के मुद्दों पर चर्चा था। कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, विधायक शिव अरोड़ा, महापौर विकास शर्मा, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। मगर कार्यक्रम के दौरान माहौल उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब सभागार में अलग-अलग पक्षों के समर्थन में नारे गूंजने लगे।
एक ओर “हमारा नेता कैसा हो, विकास शर्मा जैसा हो” के नारे लगे, तो दूसरी ओर “हमारा नेता कैसा हो, विधायक शिव अरोड़ा जैसा हो” का जवाब भी सुनाई दिया। इससे सरकारी कार्यक्रम कुछ समय के लिए राजनीतिक रंग में रंगता दिखाई दिया। मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि क्या यह विकास कार्यों का मंच था या फिर वर्ष 2027 के राजनीतिक समीकरणों की शुरुआती झलक।
व्यंग्य यह भी है कि कुछ चेहरे ऐसे दिखाई दिए जो दोनों पक्षों के समर्थन में बराबर उत्साह से नारे लगा रहे थे। इसे देखकर कई लोगों ने मुस्कराते हुए कहा—”इनकी प्रतिबद्धता व्यक्ति से नहीं, नारे से है।” कुछ ने मजाक में यह भी कहा कि “जहां जो नारा, वहीं हमारा सहारा।”
इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जारी है कि भाजपा के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर अलग-अलग दावेदारी की चर्चाएं तेज हो रही हैं। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल को संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, जिस मंच पर विकास योजनाओं और जनसमस्याओं पर चर्चा होनी थी, वहां राजनीतिक संदेश अधिक चर्चा में रहा। अब सवाल यही है कि क्या 2027 की लड़ाई विकास के मुद्दों पर लड़ी जाएगी या फिर नारेबाजी से ही राजनीतिक दिशा तय होगी?


नारे किसके पक्ष में गूंजे, फायदा किसे? रुद्रपुर की सियासत में नए सवाल,रुद्रपुर। नगर निगम के सरकारी कार्यक्रम में पहले महापौर विकास शर्मा के समर्थन में “हमारा नेता कैसा हो, विकास शर्मा जैसा हो” के नारे लगे। कुछ ही देर बाद दूसरे पक्ष की ओर से विधायक शिव अरोड़ा के समर्थन में भी नारेबाजी शुरू हो गई। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
शहर में चर्चा है कि भाजपा के दो प्रमुख चेहरों के समर्थकों के बीच सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा लाभ कहीं कांग्रेस या पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल को तो नहीं मिलेगा। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स में पहले प्रकाशित राजनीतिक विश्लेषण में दावा किया गया था कि रुद्रपुर विधानसभा में कांग्रेस का लगभग 42 हजार का पारंपरिक वोट बैंक है, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राजकुमार ठुकराल को करीब 26 हजार वोट मिले थे। इसी आधार पर कुछ राजनीतिक विश्लेषक विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
हालांकि, यह केवल राजनीतिक चर्चाएं और आकलन हैं, जिनकी पुष्टि किसी आधिकारिक चुनावी परिणाम या सर्वेक्षण से नहीं होती। रुद्रपुर विधानसभा में लगभग दो लाख मतदाता हैं और चुनावी नतीजे अनेक स्थानीय, क्षेत्रीय तथा राजनीतिक कारकों पर निर्भर करते हैं। ऐसे में सरकारी मंच पर हुई नारेबाजी ने 2027 की राजनीति को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।

पहाड़ की एक पुरानी कहावत है—दरती अपनी ओर कटती है।” नगर निगम के कार्यक्रम में महापौर विकास शर्मा के समर्थन में “हमारा नेता कैसा हो, हमारा विधायक कैसा हो” जैसे नारे गूंजे तो राजनीतिक गलियारों में इस कहावत की चर्चा भी तेज हो गई। लोग इसे उस दौर से जोड़कर देख रहे हैं, जब राजकुमार ठुकराल विधायक थे और शिव अरोड़ा के समर्थक भी इसी तरह के नारे लगाते थे। राजनीति में समय का चक्र तेजी से घूमता है और जो घटनाएं कभी दूसरों के साथ होती हैं, वही परिस्थितियां आगे चलकर अपने सामने भी खड़ी दिखाई देती हैं।


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