रुद्रपुर, 29 जुलाई। उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ने अपने वक्तव्य के अंतिम भाग में कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन का उद्देश्य केवल पृथक राज्य प्राप्त करना भर कभी रहा ही था, ऐसी सोच आंदोलनकारियों की भावना से मेल ही न खाती। आंदोलन की आत्मा सुशासन, पारदर्शिता, संवेदनशील प्रशासन, युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं का सम्मान और न्यायपूर्ण व्यवस्था थी। आज समय की मांग है कि उन्हीं मूल उद्देश्यों को फिर से केंद्र में रखा जाए।
RTI डेटा से उत्तराखंड में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रशासनिक नाकामी उजागर हुई है, जहां 5 वर्षों में 10,500 महिलाएं लापता हुईं और 757 अभी भी लापता हैं। पिछले तीन वर्षों में 1,822 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 318 अज्ञात शवों में से केवल 87 की पहचान हो पाई है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए तीव्र आक्रोश व्यक्त किया
परिषद ने कहा कि देवभूमि की पहचान हिमालय, गंगा, संस्कृति, लोक परंपराओं और मातृशक्ति के सम्मान से जुड़ी रही है। इस पहचान को सुरक्षित रखने का दायित्व सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, उद्योगों, सामाजिक संगठनों और प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से आता है। किसी भी बेटी के साथ घटित गंभीर अपराध पूरे समाज की पीड़ा बन जाता है। ऐसी घटनाओं के बाद केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त माना जाना कठिन है। स्थायी सुधार की दिशा में ठोस निर्णय अपेक्षित हैं।
परिषद ने कहा कि रुद्रपुर की हालिया घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक समीक्षा की आवश्यकता को सामने रखा है। प्रत्येक औद्योगिक इकाई में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की जाए। प्रत्येक वाहन का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए। रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान कंपनी प्रबंधन की जवाबदेही तय हो। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
परिषद ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए जनभागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, उद्योगों और ग्राम सभाओं में नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाएं। आत्मरक्षा प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा शिक्षा और महिला अधिकारों की जानकारी प्रत्येक युवती तक पहुंचाई जाए। समाज में ऐसा वातावरण विकसित हो, जहां पीड़ित परिवार बिना किसी भय या सामाजिक दबाव के न्याय की प्रक्रिया में आगे आ सकें।
परिषद ने यह भी कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों का नियमित विश्लेषण किया जाए। अपराध के कारणों का अध्ययन कर रोकथाम की नीति तैयार हो। महिला सुरक्षा को लेकर जिला स्तर पर मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित हों। जनता के सुझावों को भी नीति निर्माण का हिस्सा बनाया जाए।
परिषद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि महिला सुरक्षा पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। इस विषय को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठाकर देखा जाए। देवभूमि की प्रत्येक बेटी का सम्मान पूरे उत्तराखण्ड का सम्मान है।
परिषद ने कहा कि जनता की अपेक्षा है कि शासन अपराध नियंत्रण, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करे। कानून का समान रूप से पालन प्रत्येक नागरिक के विश्वास को मजबूत करता है। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
ज्ञापन में परिषद ने प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा—
रुद्रपुर प्रकरण की समयबद्ध जांच और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जाए।
महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में प्राथमिकता से कराई जाए।
राज्य के सभी औद्योगिक क्षेत्रों का महिला सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
रात्रिकालीन ड्यूटी करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था अनिवार्य बनाई जाए।
सभी औद्योगिक इकाइयों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की नियमित समीक्षा हो।
पुलिस, श्रम विभाग और जिला प्रशासन का संयुक्त निरीक्षण अभियान नियमित रूप से संचालित किया जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और नियमित महिला पुलिस गश्त सुनिश्चित की जाए।
पर्वतीय क्षेत्रों से रोजगार के लिए आने वाली महिलाओं हेतु सुरक्षित छात्रावास और आवास योजनाएं विकसित की जाएं।
महिला हेल्पलाइन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाया जाए।
विद्यालयों, महाविद्यालयों और उद्योगों में महिला सुरक्षा एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण नियमित रूप से संचालित किया जाए।
नशे और संगठित अपराध के विरुद्ध प्रभावी अभियान चलाया जाए।
महिला सुरक्षा पर मुख्यमंत्री स्तर से नियमित समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
परिषद के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखण्ड के राज्य आंदोलनकारियों ने जिस देवभूमि का सपना देखा था, उस सपने की सबसे मजबूत नींव सुरक्षित मातृशक्ति थी। प्रत्येक बेटी सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सके, यही राज्य निर्माण आंदोलन की भावना रही है। परिषद ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी और ऐसे कदम उठाएगी जिनसे प्रदेश की प्रत्येक बेटी स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सके।
अंत में परिषद ने प्रदेशवासियों से भी आह्वान किया कि महिला सम्मान, सामाजिक जागरूकता, कानून के प्रति विश्वास और अपराध के विरुद्ध सामूहिक सहयोग की भावना को मजबूत करें। सुरक्षित उत्तराखण्ड का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव माना जाना कठिन है। समाज, परिवार, उद्योग, प्रशासन और नागरिकों की साझी भागीदारी ही देवभूमि को उसकी मूल पहचान के अनुरूप आगे बढ़ा सकती है।
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