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रुद्रपुर में खड़ी होली का ऐतिहासिक आयोजन: जगदीश बिष्ट एवं गीता बिष्ट दंपति का पार्वतीय समाज को आमंत्रण

रुद्रपुर।देवभूमि की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को जीवित रखने की…

सरस मेला या मिशन 2027? रुद्रपुर की सांस्कृतिक शाम में राजनीति, पास-संस्कृति और प्रशासनिक चूक की परछाइयाँ

रुद्रपुर में आयोजित सरस मेला एक बार फिर चर्चा में है—लेकिन इस बार वजह रंगीन…

लोक मार्गों व सार्वजनिक स्थलों से अवैध धार्मिक संरचनाएँ हटेंगी2016 की राज्य नीति फिर चर्चा में, कलेक्टर व एसडीएम को दी गई जिम्मेदारी

रुद्रपुर/देहरादून।उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2016 में जारी की गई नीति के तहत लोक मार्गों, लोक…

कोट ब्लॉक में हिमालय क्रांति पार्टी की सशक्त शुरुआत, 20 से अधिक नए सदस्य जुड़े

लैंसडाउन/पालीखाल, 22 फरवरी 2026।हिमालय क्रांति पार्टी (एचकेपी) ने विकास खंड कोट में संगठन विस्तार की…

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श्रीनगर गढ़वाल (पौड़ी)। पौड़ी जिले के श्रीनगर स्थित धारी देवी मंदिर क्षेत्र में अलकनंदा झील में संचालित दो बोटों की आमने-सामने टक्कर हो गई।

हादसे में एक चालक संतुलन खोकर झील में गिर पड़ा, जबकि बोट कुछ देर तक अनियंत्रित होकर घूमती रही। ✍️…

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पहाड़ी सिंगर–पहाड़ी डांसर का जलवा: सरस मेले में गूंजा देवभूमि का दम, गांधी पार्क बना सांस्कृतिक रणभूमि”पहाड़ की धुनों पर झूमा रुद्रपुर

रुद्रपुर, 20 फरवरी 2026 | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स✍️ अवतार सिंह बिष्टसरस मेला: गांधी पार्क से त्रिशूल चौक तक गूंजा उत्तराखंड…

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गांधी पार्क की कल रात: जब Gandhi Park बना सुरों, ठुमकों और बदलाव का मंच?युवाओं की धूम… और 50 पार युवाओं की झूम ! बदली हुई पुलिस की छवि?

नर सेवा ही नारायण सेवा” का जीवंत उदाहरण: रुद्रपुर के महाराजा अग्रसेन चौक से प्रतिदिन प्रस्फुटित होती मानवता, संस्कार और निःस्वार्थ सेवा की प्रेरक गाथा

एसएसपी ऊधमसिंहनगर अजय गणपति के निर्देशन में बड़ी कार्रवाई, फर्जी आधार कार्ड सेंटर का भंडाफोड़

गांधी पार्क का सरस मेला: जब कुर्सियाँ सुरक्षित थीं… और जनता असुरक्षित!मुख्यमंत्री की सभा और वही कहानी

रुद्रपुर में खड़ी होली का ऐतिहासिक आयोजन: जगदीश बिष्ट एवं गीता बिष्ट दंपति का पार्वतीय समाज को आमंत्रण

रुद्रपुर।देवभूमि की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को जीवित रखने की मिसाल एक बार फिर वसुंधरा ग्रीन, फुलसूँगी में देखने को मिलेगी। हर वर्ष की भाँति…

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सरस मेला या मिशन 2027? रुद्रपुर की सांस्कृतिक शाम में राजनीति, पास-संस्कृति और प्रशासनिक चूक की परछाइयाँ

रुद्रपुर में आयोजित सरस मेला एक बार फिर चर्चा में है—लेकिन इस बार वजह रंगीन रोशनी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ या स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं की विफलता, राजनीतिक…

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लोक मार्गों व सार्वजनिक स्थलों से अवैध धार्मिक संरचनाएँ हटेंगी2016 की राज्य नीति फिर चर्चा में, कलेक्टर व एसडीएम को दी गई जिम्मेदारी

रुद्रपुर/देहरादून।उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2016 में जारी की गई नीति के तहत लोक मार्गों, लोक पार्कों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति निर्मित धार्मिक संरचनाओं को हटाने, पुनर्स्थापित करने…

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कोट ब्लॉक में हिमालय क्रांति पार्टी की सशक्त शुरुआत, 20 से अधिक नए सदस्य जुड़े

लैंसडाउन/पालीखाल, 22 फरवरी 2026।हिमालय क्रांति पार्टी (एचकेपी) ने विकास खंड कोट में संगठन विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए पालीखाल में अपनी प्रथम ब्लॉक स्तरीय बैठक आयोजित की।…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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रुद्रपुर में खड़ी होली का ऐतिहासिक आयोजन: जगदीश बिष्ट एवं गीता बिष्ट दंपति का पार्वतीय समाज को आमंत्रण

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9 नवम्बर 2026 से पूर्व कार्रवाई की मांग, स्व. इंद्रमणि बडोनी की स्मृति में पार्क व प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव“स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह में समाजसेवा, शिक्षा और संस्कृति के पुरोधाओं का हुआ सम्मान

22 फरवरी 2026 को नगर निगम सभागार, रुद्रपुर में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के बैनर तले आयोजित “स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह” आत्ममंथन का अवसर भी […]

डॉ. नागेंद्र शर्मा को ‘स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान’ से सम्मानित

रुद्रपुर। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के बैनर तले नगर निगम सभागार, रुद्रपुर में आयोजित “स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह” में खेल जगत की प्रतिष्ठित हस्ती डॉ. […]

ake Universities List by UGC 2026: अगर आप या आपका कोई अपना किसी नई यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने की सोच रहा है, तो रुक जाइए. आपकी एक छोटी सी लापरवाही सालों की मेहनत और लाखों रुपये बर्बाद कर सकती है.

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने साल 2026 की ताजा लिस्ट जारी की है, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों के 32 विश्वविद्यालयों को फर्जी (Fake) घोषित किया गया है . ✍️ […]

सार्वजनिक भूमि, आस्था और कानून: क्या उत्तराखंड अब भी गंभीर है?

सार्वजनिक भूमि पर अवैध धार्मिक निर्माण पर सख्ती, राज्यों को छह सप्ताह में नीति बनाने के निर्देशनई दिल्ली। सार्वजनिक सड़कों, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बने अवैध धार्मिक ढाँचों […]

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के चिन्यालीसौड़ आगमन पर राज्य आंदोलनकारी संगठन ने उनका भव्य स्वागत एवं सम्मान किया।

चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी), 19 फरवरी।आज जन-जन की सरकार के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी जनपद के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक में आयोजित जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन […]

श्रीनगर गढ़वाल (पौड़ी)। पौड़ी जिले के श्रीनगर स्थित धारी देवी मंदिर क्षेत्र में अलकनंदा झील में संचालित दो बोटों की आमने-सामने टक्कर हो गई।

हादसे में एक चालक संतुलन खोकर झील में गिर पड़ा, जबकि बोट कुछ देर तक अनियंत्रित होकर घूमती रही। ✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड […]