Breaking News

उत्तराखण्ड

View All

मेष आर्थिक दृष्टि से मित्रों या संपर्कों के माध्यम से लाभ के संकेत हैं, कोई भी निर्णय लेने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। सोच-समझकर किए गए निवेश या योजनाएं अधिक फलदायक साबित होंगी।

शुक्‍ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. आज चैत्र शुक्‍ल चतुर्थी है, जिसमें गणेश जी की पूजा की जाएगी. साथ ही चैत्र नवरात्रि की भी चतुर्थी है, जिसमें मां कुष्‍मांडा की पूजा की जाती है.

: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधिवत पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

भगवान शिव यदि काल हैं और उनकी पत्नी काली हैं। इसलिए मां काली (Kali Mata) को समय, शक्ति, विनाश और मृत्यु की देवी कहा जाता है। महाकाली और भद्रकाली आदिशक्ति के दोनों ही देवी काली के स्वरूप हैं।

देश

View All

“विकास या विस्थापन? उत्तराखंड में आंकड़ों की चमक के पीछे का स्याह सच

उत्तराखंड सरकार अपनी उपलब्धियों का लंबा-चौड़ा बखान कर रही है—जी-20 समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर समिट, राष्ट्रीय…

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध ने भारत की रसोई तक अपनी तपिश पहुँचा दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव पर विचार कर रही है।

अब आपको 14.2 किलो के भारी-भरकम सिलेंडर के बजाय कम वजन वाले सिलेंडर से काम…

नवरात्रि का आठवां दिन दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी शांति, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं।

इस दिन विधि-विधान से पूजा, हवन और कन्या पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर…

विकास के दावे बनाम जमीनी सच्चाई: उत्तराखंड में ‘चार साल बेमिसाल’ या सवालों का जाल?

हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित “जन-जन की सरकार, चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम…

दुनिया

View All

मेष आर्थिक दृष्टि से मित्रों या संपर्कों के माध्यम से लाभ के संकेत हैं, कोई भी निर्णय लेने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। सोच-समझकर किए गए निवेश या योजनाएं अधिक फलदायक साबित होंगी।

शुक्‍ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. आज चैत्र शुक्‍ल चतुर्थी है, जिसमें गणेश जी की पूजा की जाएगी. साथ ही चैत्र नवरात्रि की भी चतुर्थी है, जिसमें मां कुष्‍मांडा की पूजा की जाती है.

: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधिवत पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

भगवान शिव यदि काल हैं और उनकी पत्नी काली हैं। इसलिए मां काली (Kali Mata) को समय, शक्ति, विनाश और मृत्यु की देवी कहा जाता है। महाकाली और भद्रकाली आदिशक्ति के दोनों ही देवी काली के स्वरूप हैं।

Express News

View All

भगवान शिव यदि काल हैं और उनकी पत्नी काली हैं। इसलिए मां काली (Kali Mata) को समय, शक्ति, विनाश और मृत्यु की देवी कहा जाता है। महाकाली और भद्रकाली आदिशक्ति के दोनों ही देवी काली के स्वरूप हैं।

लेकिन दोनों के स्वरूप और उत्पत्ति में अंतर है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। अवतार…

Read More

रुद्रपुर से रमज़ान तक: दुनिया भर में डर के साये में ईद, आधी नमाज़ और पूरा सवाल

उत्तराखंड ईद-उल-फितर, जो आमतौर पर खुशियों, मेल-मिलाप और इबादत का प्रतीक होता है, इस बार दुनिया के कई हिस्सों में…

Read More

तीन  हफ्ते से चल रहे अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध में अब नई स्थिति बन गई है। तेहरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर 3000 से ज्यादा तरह-तरह के प्रोजेक्टाइल (मिसाइल, ड्रोन आदि) दागे हैं।

21 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने 2003 के 55 लाख रुपए के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) घोटाले के मामले में आठ अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव शनिवार सुबह एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नतांज़ यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर हवाई हमले किए।

“राजस्व का जश्न और नशा मुक्ति का स्वप्न” — धामी सरकार का आबकारी मॉडल या विरोधाभास का महाकाव्य?

“विकास या विस्थापन? उत्तराखंड में आंकड़ों की चमक के पीछे का स्याह सच

उत्तराखंड सरकार अपनी उपलब्धियों का लंबा-चौड़ा बखान कर रही है—जी-20 समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर समिट, राष्ट्रीय खेलों जैसे बड़े आयोजन, लाखों करोड़ के निवेश समझौते, और रोजगार के दावे। मुख्यमंत्री पुष्कर…

Read More

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध ने भारत की रसोई तक अपनी तपिश पहुँचा दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव पर विचार कर रही है।

अब आपको 14.2 किलो के भारी-भरकम सिलेंडर के बजाय कम वजन वाले सिलेंडर से काम चलाना पड़ सकता है। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य…

Read More

नवरात्रि का आठवां दिन दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी शांति, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं।

इस दिन विधि-विधान से पूजा, हवन और कन्या पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। लेकिन साल 2026 में अष्टमी तिथि दो दिनों…

Read More

विकास के दावे बनाम जमीनी सच्चाई: उत्तराखंड में ‘चार साल बेमिसाल’ या सवालों का जाल?

हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित “जन-जन की सरकार, चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विकास के बड़े-बड़े दावे…

Read More

उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

Read More

हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

Read More

ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

Read More

कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

Read More

“विकास या विस्थापन? उत्तराखंड में आंकड़ों की चमक के पीछे का स्याह सच

उत्तराखंड सरकार अपनी उपलब्धियों का लंबा-चौड़ा बखान कर रही है—जी-20 समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर समिट, राष्ट्रीय खेलों जैसे बड़े आयोजन, लाखों करोड़ के निवेश समझौते, और रोजगार के दावे। मुख्यमंत्री पुष्कर […]

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध ने भारत की रसोई तक अपनी तपिश पहुँचा दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव पर विचार कर रही है।

अब आपको 14.2 किलो के भारी-भरकम सिलेंडर के बजाय कम वजन वाले सिलेंडर से काम चलाना पड़ सकता है। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य […]

नवरात्रि का आठवां दिन दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। महागौरी शांति, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं।

इस दिन विधि-विधान से पूजा, हवन और कन्या पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। लेकिन साल 2026 में अष्टमी तिथि दो दिनों […]

विकास के दावे बनाम जमीनी सच्चाई: उत्तराखंड में ‘चार साल बेमिसाल’ या सवालों का जाल?

हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित “जन-जन की सरकार, चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विकास के बड़े-बड़े दावे […]

“विकास के नाम पर बाहरी कब्जा? उत्तराखंड में रोजगार और संसाधनों पर उठते सवाल”

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) उत्तराखंड की पहचान कभी “देवभूमि” और “रोजगार के अवसरों वाले शांत प्रदेश” के रूप में […]

चार धाम यात्रा शुरू होने से पहले, केदारनाथ-बद्रीनाथ और गंगोत्री मंदिर समितियों के बीच गैर-हिंदुओं के प्रवेश के नियमों को लेकर खुले मतभेद सामने आए हैं। इससे एक नई बहस छिड़ गई है। जहाँ बद्रीनाथ-केदारनाथ समिति ने प्रवेश चाहने वाले गैर-हिंदुओं से एक हलफनामा (affidavit) देने की मांग की है, वहीं गंगोत्री समिति ने इसे “निजी राय” करार दिया है और कहा है कि बिना किसी ऐसे हलफनामे के भी प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

विशेष रूप से, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा था कि मंदिर आने वाले गैर-हिंदुओं को समिति के पास एक हलफनामा जमा करना होगा-जो प्रवेश के लिए […]

मेष आर्थिक दृष्टि से मित्रों या संपर्कों के माध्यम से लाभ के संकेत हैं, कोई भी निर्णय लेने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। सोच-समझकर किए गए निवेश या योजनाएं अधिक फलदायक साबित होंगी।

वृषभकार्यस्थल पर सराहा जाएगा, भले ही महसूस ना हो लेकिन सहयोग सभी के दिमाग में रहेगा। रिश्तों में थोड़ी दूरी महसूस हो सकती है, जिससे आप अकेले रहना पसंद करेंगे। […]

शुक्‍ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. आज चैत्र शुक्‍ल चतुर्थी है, जिसमें गणेश जी की पूजा की जाएगी. साथ ही चैत्र नवरात्रि की भी चतुर्थी है, जिसमें मां कुष्‍मांडा की पूजा की जाती है.

चैत्र नवरात्रि के दौरान पड़ने वाली इस विनायक चतुर्थी का विशेष महत्‍व है. अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) साथ ही […]

: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधिवत पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से आयु, यम, बल और आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। जीवन से नकारात्मकता हट जाती हैं और शुभ फलों की प्राप्ति […]

भगवान शिव यदि काल हैं और उनकी पत्नी काली हैं। इसलिए मां काली (Kali Mata) को समय, शक्ति, विनाश और मृत्यु की देवी कहा जाता है। महाकाली और भद्रकाली आदिशक्ति के दोनों ही देवी काली के स्वरूप हैं।

लेकिन दोनों के स्वरूप और उत्पत्ति में अंतर है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य […]