Breaking News

उत्तराखण्ड

View All

वैदिक पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए है।

संगम नगरी प्रयागराज अपनी धार्मिक और पौराणिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखती है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल को ‘तीर्थराज’ कहा जाता है। इसी पवित्र नगरी की रक्षा करने वाले देवता के रूप में भगवान विष्णु के वेणी माधव स्वरूप को पूजा जाता है।

नेशनल डिफेंस एकेडमी और नवल एकेडमी (NDA NA 2) एवं कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज एग्जामिनेशन (CDS 2) भर्ती के लिए आवेदन की लास्ट डेट आज यानी 9 जून निर्धारित है। ऐसे में जो भी अभ्यर्थी इन भर्ती परीक्षाओं में भाग लेना चाहते हैं और किसी कारणवश अभी तक फॉर्म नहीं भर सके हैं वे बिना देरी करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ऑफिशियल वेबसाइट

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने योजना के तहत सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या घटा दी है। इसे 9 से सीधे 4 कर दिया गया है।

देश

View All

तीनपानी डैम का निर्माण बरसात से पहले पूरा करें: विकास शर्मामहापौर ने किया पुनर्निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों को दिए निर्देश

रुद्रपुर। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-1 फुलसुंगा स्थित तीनपानी डैम के पुनर्निर्माण कार्य का…

पहाड़ स्वाभिमान यात्रा ऋषिकेश पहुंची, हिमालय क्रांति पार्टी ने निकाला  रोड शो

उत्तराखंड, ऋषिकेश पहाड़ स्वाभिमान यात्रा ऋषिकेश पहुंची, हिमालय क्रांति पार्टी ने निकाला भव्य रोड शो।हिमालय…

किच्छा के कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारी, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने किया भव्य स्वागत

किच्छा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न आयोगों, परिषदों एवं…

खैट पर्वत की परियां और दयारा बुग्याल की रहस्यमयी गुमशुदगी: आस्था, लोककथा और हकीकत के बीच”पहाड़ सिर्फ पत्थरों और जंगलों का नाम नहीं हैं, वे स्मृतियों, मान्यताओं, देवताओं और रहस्यों की जीवित दुनिया हैं।”

उत्तराखंड के ऊंचे-ऊंचे हिमालयी पर्वत, हरे-भरे बुग्याल और घने जंगल सदियों से रहस्यों और लोककथाओं…

दुनिया

View All

संगम नगरी प्रयागराज अपनी धार्मिक और पौराणिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखती है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल को ‘तीर्थराज’ कहा जाता है। इसी पवित्र नगरी की रक्षा करने वाले देवता के रूप में भगवान विष्णु के वेणी माधव स्वरूप को पूजा जाता है।

नेशनल डिफेंस एकेडमी और नवल एकेडमी (NDA NA 2) एवं कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज एग्जामिनेशन (CDS 2) भर्ती के लिए आवेदन की लास्ट डेट आज यानी 9 जून निर्धारित है। ऐसे में जो भी अभ्यर्थी इन भर्ती परीक्षाओं में भाग लेना चाहते हैं और किसी कारणवश अभी तक फॉर्म नहीं भर सके हैं वे बिना देरी करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ऑफिशियल वेबसाइट

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने योजना के तहत सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या घटा दी है। इसे 9 से सीधे 4 कर दिया गया है।

नई दिल्ली में शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक सम्पन्न, संगठन विस्तार और राज्यों में मजबूती पर हुआ मंथन

Express News

View All

संगम नगरी प्रयागराज अपनी धार्मिक और पौराणिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखती है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल को ‘तीर्थराज’ कहा जाता है। इसी पवित्र नगरी की रक्षा करने वाले देवता के रूप में भगवान विष्णु के वेणी माधव स्वरूप को पूजा जाता है।

मान्यता है कि प्रयागराज की तीर्थयात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक श्रद्धालु ‘त्रिवेणी रक्षक’ श्री वेणी माधव…

Read More

नेशनल डिफेंस एकेडमी और नवल एकेडमी (NDA NA 2) एवं कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज एग्जामिनेशन (CDS 2) भर्ती के लिए आवेदन की लास्ट डेट आज यानी 9 जून निर्धारित है। ऐसे में जो भी अभ्यर्थी इन भर्ती परीक्षाओं में भाग लेना चाहते हैं और किसी कारणवश अभी तक फॉर्म नहीं भर सके हैं वे बिना देरी करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ऑफिशियल वेबसाइट

योग्यता एवं मापदंड नवल डिफेंस एकेडमी (NDA) पदों पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड/ संस्थान…

Read More

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने योजना के तहत सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या घटा दी है। इसे 9 से सीधे 4 कर दिया गया है।

नई दिल्ली में शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक सम्पन्न, संगठन विस्तार और राज्यों में मजबूती पर हुआ मंथन

दिल्ली मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके के ‘फ्लोरिश स्टे’ होटल (गैस्ट हाउस) में लगी भीषण आग मामले में कार्रवाई जारी है। इस कड़ी में अब MCD दक्षिण जोन के DHO को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।

दिल्ली में इंडिया गठबंधन ने आख़िरी बैठक की थी. इसके ठीक दो साल बाद छह जून को दिल्ली में ही इस प्रमुख विपक्षी गठबंधन की बैठक हुई है.

तीनपानी डैम का निर्माण बरसात से पहले पूरा करें: विकास शर्मामहापौर ने किया पुनर्निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों को दिए निर्देश

रुद्रपुर। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-1 फुलसुंगा स्थित तीनपानी डैम के पुनर्निर्माण कार्य का महापौर विकास शर्मा ने स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और समयसीमा का…

Read More

पहाड़ स्वाभिमान यात्रा ऋषिकेश पहुंची, हिमालय क्रांति पार्टी ने निकाला  रोड शो

उत्तराखंड, ऋषिकेश पहाड़ स्वाभिमान यात्रा ऋषिकेश पहुंची, हिमालय क्रांति पार्टी ने निकाला भव्य रोड शो।हिमालय क्रांति पार्टी (एचकेपी) की "पहाड़ स्वाभिमान यात्रा" मंगलवार को पहाड़ों से उतरकर योगनगरी ऋषिकेश पहुंची।…

Read More

किच्छा के कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारी, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने किया भव्य स्वागत

किच्छा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न आयोगों, परिषदों एवं बोर्डों में किच्छा क्षेत्र के समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण दायित्व दिए जाने पर पूर्व विधायक…

Read More

खैट पर्वत की परियां और दयारा बुग्याल की रहस्यमयी गुमशुदगी: आस्था, लोककथा और हकीकत के बीच”पहाड़ सिर्फ पत्थरों और जंगलों का नाम नहीं हैं, वे स्मृतियों, मान्यताओं, देवताओं और रहस्यों की जीवित दुनिया हैं।”

उत्तराखंड के ऊंचे-ऊंचे हिमालयी पर्वत, हरे-भरे बुग्याल और घने जंगल सदियों से रहस्यों और लोककथाओं का घर रहे हैं। यहां की संस्कृति में जितना महत्व देवताओं का है, उतना ही…

Read More

उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

Read More

हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

Read More

ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

Read More

कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

Read More

तीनपानी डैम का निर्माण बरसात से पहले पूरा करें: विकास शर्मामहापौर ने किया पुनर्निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों को दिए निर्देश

रुद्रपुर। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-1 फुलसुंगा स्थित तीनपानी डैम के पुनर्निर्माण कार्य का महापौर विकास शर्मा ने स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और समयसीमा का […]

पहाड़ स्वाभिमान यात्रा ऋषिकेश पहुंची, हिमालय क्रांति पार्टी ने निकाला  रोड शो

उत्तराखंड, ऋषिकेश पहाड़ स्वाभिमान यात्रा ऋषिकेश पहुंची, हिमालय क्रांति पार्टी ने निकाला भव्य रोड शो।हिमालय क्रांति पार्टी (एचकेपी) की “पहाड़ स्वाभिमान यात्रा” मंगलवार को पहाड़ों से उतरकर योगनगरी ऋषिकेश पहुंची। […]

किच्छा के कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारी, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने किया भव्य स्वागत

किच्छा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न आयोगों, परिषदों एवं बोर्डों में किच्छा क्षेत्र के समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण दायित्व दिए जाने पर पूर्व विधायक […]

खैट पर्वत की परियां और दयारा बुग्याल की रहस्यमयी गुमशुदगी: आस्था, लोककथा और हकीकत के बीच”पहाड़ सिर्फ पत्थरों और जंगलों का नाम नहीं हैं, वे स्मृतियों, मान्यताओं, देवताओं और रहस्यों की जीवित दुनिया हैं।”

उत्तराखंड के ऊंचे-ऊंचे हिमालयी पर्वत, हरे-भरे बुग्याल और घने जंगल सदियों से रहस्यों और लोककथाओं का घर रहे हैं। यहां की संस्कृति में जितना महत्व देवताओं का है, उतना ही […]

भीमताल की बदहाल सड़कों पर फिर गरजे हरीश पनेरू, एक सप्ताह में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

हल्द्वानी, 9 जून। भीमताल क्षेत्र की जर्जर सड़कों और वर्षों से लंबित सड़क परियोजनाओं को लेकर प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू के नेतृत्व में मंगलवार को दर्जनों ग्रामीणों ने हल्द्वानी […]

09 June 2026: आज 9 जून 2026, दिन मंगलवार है. वैदिक पंचांग के अनुसार ग्रहों की चाल आज कुछ ऐसा अद्भुत और कल्याणकारी चक्रव्यूह रच रही है, जो कई राशियों के जीवन में सुख-समृद्धि के नए द्वार खोलने वाला है.

आज ज्येष्ठ अधिक मास की नवमी तिथि है. आज का दिन मुख्य रूप से कर्क राशि में बनने जा रहे ‘गजलक्ष्मी राजयोग’ पर केंद्रित रहेगा, जो कुछ राशियों के लिए […]

सोमवती अमावस्या 2026: जानिए क्यों की जाती हैं पीपल की 108 परिक्रमा, क्या है इसका दिव्य रहस्यपति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए सोमवती अमावस्या पर करें यह विशेष पूजा15 जून को सोमवती अमावस्या: पीपल की 108 परिक्रमा से मिलता है त्रिदेवों का आशीर्वादसोमवती अमावस्या का महापर्व: सौभाग्य, समृद्धि और दांपत्य सुख का अद्भुत संयोगपीपल की परिक्रमा से खुलते हैं सुख-समृद्धि के द्वार, जानें सोमवती अमावस्या का महत्वसोमवती अमावस्या पर 108 परिक्रमा का रहस्य: पौराणिक कथा से जुड़ा है विशेष महत्व

सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन किसी महापर्व से कम नहीं होता. इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए […]

सनातन धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, साहस, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि करोड़ों श्रद्धालु उन्हें संकटमोचन और अपने कष्टों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करता है, उसके जीवन में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम हो जाता […]

वैदिक पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए है।

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि तिथि पर प्रद्युम्न चतुर्थी (Pradyumna Chaturthi 2026) मनाई जाती है। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण […]

संगम नगरी प्रयागराज अपनी धार्मिक और पौराणिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखती है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल को ‘तीर्थराज’ कहा जाता है। इसी पवित्र नगरी की रक्षा करने वाले देवता के रूप में भगवान विष्णु के वेणी माधव स्वरूप को पूजा जाता है।

मान्यता है कि प्रयागराज की तीर्थयात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक श्रद्धालु ‘त्रिवेणी रक्षक’ श्री वेणी माधव के दर्शन न कर लें। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान […]