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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल को बताया विकसित भारत की मजबूत नींव

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 11 जून का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन वर्ष 1897 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म हुआ था।

11 जून (आईएएनएस)। केंद्र में अपनी सरकार के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘किसान समृद्धि’ का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी कई पहल किसानों की आय की सुरक्षा के साथ-साथ खेती को अधिक सशक्त बना रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक होगी। इस बैठक में भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने का लक्ष्य पाने के लिए समावेशी मानव विकास की रणनीति और उसे देश के हर नागरिक तक पुख्ता नतीजों के रूप में पहुंचाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

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20 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्ला, 29 जून से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलानसीमाओं की सुरक्षा का प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं का लंबा संघर्ष, सरकार से रोजगार और सम्मानजनक समाधान की मांग

देहरादून। उत्तराखण्ड के एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्लाओं ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर एक बार…

पीयूष धामी की अनूठी मुहिमः निःशुल्क कार्यशाला के जरिए छात्र-छात्राओं को सौंपी उत्तराखंडी लोक वाद्यों की विरासत

पिथौरागढ़। आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच जहां नई पीढ़ी अपनी लोक…

स्व. संदीप संधू की स्मृति में 15वां रक्तदान शिविर आयोजित, पूर्व विधायक ठुकराल ने किया रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन

रुद्रपुर। छात्र नेता स्वर्गीय संदीप संधू की स्मृति में 15वें रक्तदान शिविर का आयोजन किच्छा…

किसानों की दुर्दशा और पलायन के बीच विकास मॉडल पर बहस तेजखेत नहीं बचे तो पहाड़ भी नहीं बचेगा: उत्तराखंड की जमीनी हकीकतनारे बनाम वास्तविकता: खेत बचाओ अभियान पर जनता के तीखे सवाल

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों “खेत बचाओ” और किसानों के उत्थान की बातें खूब…

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल को बताया विकसित भारत की मजबूत नींव

11 जून (आईएएनएस)। केंद्र में अपनी सरकार के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘किसान समृद्धि’ का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी कई पहल किसानों की आय की सुरक्षा के साथ-साथ खेती को अधिक सशक्त बना रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक होगी। इस बैठक में भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने का लक्ष्य पाने के लिए समावेशी मानव विकास की रणनीति और उसे देश के हर नागरिक तक पुख्ता नतीजों के रूप में पहुंचाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक महिला ने अपनी पति की पोल खोलने के लिए पुलिस की मदद मांगी। उसने शहर के सीसीटीवी फुटेज मांगे। इनकार करने पर महिला को सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करना पड़ा।

Express News

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11 जून (आईएएनएस)। केंद्र में अपनी सरकार के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘किसान समृद्धि’ का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी कई पहल किसानों की आय की सुरक्षा के साथ-साथ खेती को अधिक सशक्त बना रही हैं।

इसके साथ ही, पीएम मोदी ने कहा कि हमारे किसान भाई-बहन देश की अन्न सुरक्षा, पोषण और समृद्धि के आधारस्तंभ…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक होगी। इस बैठक में भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने का लक्ष्य पाने के लिए समावेशी मानव विकास की रणनीति और उसे देश के हर नागरिक तक पुख्ता नतीजों के रूप में पहुंचाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस वर्ष की बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल भाग लेंगे। बैठक में समावेशी…

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक महिला ने अपनी पति की पोल खोलने के लिए पुलिस की मदद मांगी। उसने शहर के सीसीटीवी फुटेज मांगे। इनकार करने पर महिला को सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करना पड़ा।

कुत्तों की खाप का बढ़ता साम्राज्य: रुद्रपुर से पिथौरागढ़ तक आवारा कुत्तों के आतंक में कैद उत्तराखंड:रेबीज के संदिग्ध मामलों से दहशत, सड़कों पर झुंडों का कब्जा, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवाल—क्या उत्तराखंड में आवारा कुत्तों का संकट नियंत्रण से बाहर हो चुका है?

शिक्षा विभाग में तबादलों का खेल: दुर्गम में शिक्षक रिटायर, सुगम में पूरी नौकरी—क्या 2017 की तबादला नीति सिर्फ कागजों तक सीमित?

हल्द्वानी। उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की लंबे समय से चल रही कवायद एक बार फिर शुरू हो गई है।

20 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्ला, 29 जून से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलानसीमाओं की सुरक्षा का प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं का लंबा संघर्ष, सरकार से रोजगार और सम्मानजनक समाधान की मांग

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पीयूष धामी की अनूठी मुहिमः निःशुल्क कार्यशाला के जरिए छात्र-छात्राओं को सौंपी उत्तराखंडी लोक वाद्यों की विरासत

पिथौरागढ़। आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच जहां नई पीढ़ी अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से दूर होती जा रही है, वहीं कुछ युवा ऐसे भी…

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स्व. संदीप संधू की स्मृति में 15वां रक्तदान शिविर आयोजित, पूर्व विधायक ठुकराल ने किया रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन

रुद्रपुर। छात्र नेता स्वर्गीय संदीप संधू की स्मृति में 15वें रक्तदान शिविर का आयोजन किच्छा रोड स्थित सरकारी ब्लड बैंक में किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं एवं…

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उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों "खेत बचाओ" और किसानों के उत्थान की बातें खूब सुनाई देती हैं। सरकारें अपने विज्ञापनों, भाषणों और उपलब्धियों के दस्तावेजों में किसानों को विकास…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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20 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्ला, 29 जून से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलानसीमाओं की सुरक्षा का प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं का लंबा संघर्ष, सरकार से रोजगार और सम्मानजनक समाधान की मांग

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खेत बचाओ अभियान या खेत मिटाओ अभियान?

उत्तराखंड की धरती पर एक बड़ा सवालउत्तराखंड सरकार जब भी किसानों और खेती की बात करती है तो बड़े-बड़े दावे सामने रखे जाते हैं। किसान सम्मान निधि, कृषि योजनाएं, पहाड़ी […]

12 वर्षों की उपलब्धियों के बीच उत्तराखंड के अनसुलझे सवाल?12 साल बेमिसाल या अधूरे सवाल? उत्तराखंड अब भी जवाब का इंतजार कर रहा है

उत्तराखंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर देशभर में उपलब्धियों का बखान किया जा रहा है। सड़कों, रेल, डिजिटल सेवाओं और कई […]

उज्ज्वला योजना में कटौती: गरीबों के हक पर डाका या राहत का दिखावा?पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की आवाज में प्रतिक्रिया

रुद्रपुर, उत्तराखंड केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या को पहले 12 से घटाकर 9 और अब केवल 4 कर देना बेहद चिंताजनक […]

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वे उन अग्रणी स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका और युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत की। अवतार सिंह बिष्ट | […]

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इसके साथ ही, पीएम मोदी ने कहा कि हमारे किसान भाई-बहन देश की अन्न सुरक्षा, पोषण और समृद्धि के आधारस्तंभ हैं। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( […]