रुद्रपुर। अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस के अवसर पर रुद्रपुर में वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह, सेवा संकल्प अभियान और स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान बुजुर्गों का सम्मान किया गया और स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
कार्यक्रम की तस्वीर सामने आने के साथ ही एक बड़ा सवाल भी चर्चा में है—क्या वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और स्वास्थ्य शिविर के जरिए मिशन 2027 की राजनीतिक जमीन तैयार की जा रही है?
वरिष्ठ नागरिक किसी भी समाज की महत्वपूर्ण सामाजिक पूंजी माने जाते हैं। उनके अनुभव, समस्याएं और अपेक्षाएं सीधे तौर पर सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में बुजुर्गों के बीच पहुंच बनाना सामाजिक सरोकार भी है और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भी।
हालांकि, एक दिवसीय स्वास्थ्य शिविर से आगे बढ़कर प्रदेश की स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, अस्पतालों में जांच और उपचार की व्यवस्था तथा बुजुर्गों के लिए नियमित चिकित्सा सेवाएं लंबे समय से चर्चा के विषय रहे हैं।
स्वास्थ्य कैंप में जांच करा लेना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रदेश के हर बुजुर्ग को अपने घर के आसपास नियमित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है?
विशेषकर पहाड़ी जिलों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए अस्पताल तक पहुंचना अपने आप में चुनौती है। कई जगहों पर सामान्य उपचार के लिए भी लोगों को जिला मुख्यालय या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में केवल आयोजन आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय स्थायी व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और नियमित स्वास्थ्य जांच की जरूरत महसूस होती है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान निश्चित रूप से सामाजिक संदेश देता है, लेकिन सम्मान के साथ उनकी मूल समस्याओं पर भी निरंतर काम होना जरूरी है। बुजुर्गों को समय पर पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा, दवाइयां, अस्पतालों में प्राथमिकता और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना किसी भी कल्याणकारी व्यवस्था की बड़ी कसौटी हो सकती है।
अब सवाल राजनीतिक भी है और सामाजिक भी—क्या यह कार्यक्रम केवल वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान तक सीमित रहेगा या आने वाले समय में बुजुर्गों की स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस नीति और नियमित व्यवस्था दिखाई देगी?
क्योंकि 2027 की राजनीतिक चर्चा तेज होने से पहले जनता के बीच ऐसे आयोजनों को केवल कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज और भविष्य की प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में भी देखा जा सकता है।
रुद्रपुर से अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
