रुद्रपुर। हरेला पर्व की पावन बेला पर नवस्थापित ‘दीपा पहाड़ी’ प्रतिष्ठान में लोक संस्कृति और परंपरा का मनमोहक संगम देखने को मिला। उद्घाटन समारोह के उपरांत बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक हरेला गीत गाकर प्रतिष्ठान की सुख-समृद्धि, उन्नति और मंगलमय भविष्य की कामना की। पूरे परिसर में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत की मधुर स्वर लहरियां गूंज उठीं और वातावरण भक्तिमय तथा लोक संस्कृति के रंग में रंग गया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
रुद्रपुर। नगर निगम रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा ने हरेला पर्व के शुभ अवसर पर ‘दीपा पहाड़ी’ प्रतिष्ठान का विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुभ उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने फीता काटकर प्रतिष्ठान का शुभारंभ किया तथा दीप प्रज्वलित कर सफलता और समृद्धि की कामना की।
अपने संबोधन में मेयर विकास शर्मा ने कहा कि ‘दीपा पहाड़ी’ केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पादों और पहाड़ की पहचान को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे प्रयासों से स्थानीय महिलाओं, कारीगरों और स्वरोजगार को नई ऊर्जा मिलेगी। हरेला जैसे प्रकृति और संस्कृति के पर्व पर इस प्रतिष्ठान का शुभारंभ विशेष महत्व रखता है। मैं दीपा माटेला और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं देता हूं तथा ईश्वर से प्रतिष्ठान की निरंतर प्रगति, समृद्धि और सफलता की कामना करता हूं।
महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से प्रकृति, हरियाली, समृद्धि और देवभूमि की संस्कृति का संदेश दिया। उन्होंने प्रतिष्ठान की संचालिका दीपा माटेला को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह केंद्र पहाड़ की संस्कृति, परंपरा और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने का माध्यम बने तथा निरंतर प्रगति करता रहे।
इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं ने एक-दूसरे को हरेला पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। महिलाओं ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी लोक संस्कृति, लोकगीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से है, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
‘दीपा पहाड़ी’ प्रतिष्ठान में पहाड़ के पारंपरिक उत्पाद, पूजा-अर्चना में उपयोग होने वाली सामग्री, हस्तशिल्प और स्थानीय संस्कृति से जुड़े अनेक उत्पाद उपलब्ध हैं। हरेला जैसे शुभ अवसर पर महिलाओं द्वारा लोकगीत गाकर दिया गया आशीर्वाद इस प्रतिष्ठान के लिए एक शुभ संदेश माना गया। कार्यक्रम का समापन सभी के मंगल, समृद्धि और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की कामना के साथ हुआ।
