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संपादकीय:इन दिनों एक धारणा जोर पकड़ रही है कि ‘ग्लोबल विलेज’ या वसुधैव कुटुंबकम् यानी धरती का हर कोना अपना है और हर मनुष्य का धरती के हर कोने में रहने का अधिकार है। पर इस बदलती हुई दुनिया की चकाचौंध ने आधुनिक मनुष्य को घर परिवार से तोड़ कर इस तरह से एक नया रोबोट और कंप्यूटर इंसान बना दिया है, जिसकी शायद पहले कभी कल्पना भी नहीं की गई थी।उत्तराखंड में 3946 गांवों में से 117,981 ग्रामीणों ने पूरी तरह पलायन कर लिया था. हैरानी की बात तो ये है कि साल 2018 में ही 6338 गांव के 383,726 ग्रामीणों ने अस्थाई पलायन भी किया है. साल 2022 में 2067 गांव में से 28,531 लोगों ने स्थाई पलायन किया है.उत्तराखंड राज्य स्थापना के 23 साल बाद भी नहीं रुकी पलायन की रफ्तार, तमाम योजनाओं के बाद भी खाली हो रहा पहाड़!
- Avtar Singh Bisht
- October 11, 2024
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