वहीं, पावर कारपोरेशन ने 31 मार्च तक सभी उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाने का आदेश दिया है, अन्यथा अनुदान नहीं मिलने की चेतावनी दी है। अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो, प्रदेश में 9,79,371 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, जबकि 45,734 चेक मीटर स्थापित किए गए हैं। लेकिन अभी तक इन मीटरों का मिलान नहीं किया गया है, जो कि योजना के तहत एक जरूरी कदम था। इसके अलावा, सरकारी कार्यालयों में से 1,15,055 के मुकाबले केवल 17,440 में ही स्मार्ट मीटर लग पाए हैं।

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
आरडीएसएस योजना और स्मार्ट मीटर की समयबद्ध स्थापना
आरडीएसएस योजना के तहत, पहले स्मार्ट मीटरों की स्थापना सरकारी कार्यालयों और औद्योगिक वाणिज्यिक श्रेणी के उपभोक्ताओं के यहां करने का निर्णय लिया गया था। इसका उद्देश्य था कि पहले इन मीटरों की सफलता का आकलन किया जाए और फिर इसके बाद घरेलू उपभोक्ताओं के घरों में इन्हें लगाया जाए। लेकिन, परिषद का कहना है कि आदेश के विपरीत, स्मार्ट मीटर पहले ही आम उपभोक्ताओं के घरों में लगा दिए गए हैं, जबकि इनकी पूरी तकनीकी तैयारी और मिलान नहीं हुआ था।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का आरोप है कि वर्तमान में लगाए गए स्मार्ट मीटरों के भीतर उपयोग किए गए कलपुर्जों की गुणवत्ता संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि इनमें बड़ी संख्या में चीन के घटिया कलपुर्जे इस्तेमाल किए गए हैं, जिससे प्रोजेक्ट के बाद उत्तर प्रदेश को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। स्मार्ट मीटर का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर और सटीक बिलिंग देना था, लेकिन यदि इनकी गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, तो इसका परिणाम अंततः प्रदेश के लोगों को ही भुगतना पड़ेगा।

