संपादकीय लेख🚨 “मायावी बाबाओं से लेकर नशा तस्करों तक – SSP मणिकांत मिश्रा का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ अपराध पर” 🚨 ✍️ अवतार सिंह बिष्ट राज्य आंदोलनकारी / संपादक, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

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रुद्रपुर,उत्तराखंड में जिस तरह से अपराध की परछाइयों ने अपने पांव पसारने शुरू किए थे, खासकर उधमसिंहनगर जनपद में, वह समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका था। मायावी बाबाओं की ठगी, नशे के नेटवर्क, बंधक बनाकर मारपीट और खुलेआम फायरिंग की घटनाएं – ये सब मिलकर राज्य के शांतिप्रिय और देवभूमि की छवि को गहरा आघात पहुंचा रहे थे। लेकिन अब इस पर अंकुश लगता नजर आ रहा है – और इसका श्रेय जाता है उधमसिंहनगर के पुलिस कप्तान एसएसपी मणिकांत मिश्रा को, जिनके नेतृत्व में कानून की धार ने अपराधियों की कमर तोड़नी शुरू कर दी है।


🔴 ‘इच्छाधारी बाबा’ की गिरफ्तारी: अंधविश्वास पर करारी चोट!रुद्रपुर में गिरफ्तार किया गया वह कथित ‘इच्छाधारी बाबा’, जो लोगों को वशीकरण, तंत्र-मंत्र और सौभाग्य का झांसा देकर करोड़ों की ठगी कर चुका था – वह वर्षों से सिस्टम की आंखों में धूल झोंकता रहा। यह बाबा उन पाखंडी धंधेबाजों की कड़ी का हिस्सा है जो धर्म और आध्यात्मिकता के नाम पर भोले-भाले लोगों का शोषण करते हैं।

एसएसपी मिश्रा की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से यह फर्जी बाबा मुंबई भागने से पहले ही धर दबोचा गया। यह न केवल पुलिस की दक्षता को दर्शाता है बल्कि समाज के लिए यह स्पष्ट संदेश देता है कि अब अंधविश्वास के नाम पर कोई बच नहीं पाएगा।


🔫 सितारगंज फायरिंग और बंधक प्रकरण: त्वरित न्याय, तत्पर पुलिस

गांव उकरौली की घटना, जिसमें मामूली विवाद में एक महिला को गोली मारी गई, ने कानून व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए। लेकिन जवाब मिला 12 घंटे के भीतर – जब आरोपी को तमंचा, जिंदा कारतूस और खोखे के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

इसी प्रकार युवक को बंधक बनाकर पीटने वाले दो अपराधियों को सिर्फ 8 घंटे में पकड़ लेना – ये दर्शाता है कि एसएसपी महोदय का “जवाबदेही आधारित और तेजी से न्याय देने वाला मॉडल” अब धरातल पर काम कर रहा है।


💉 नशे के खिलाफ युद्ध: 135 ग्राम स्मैक के साथ तस्कर धराया!नशा – उत्तराखंड की युवा नस्ल को निगलता यह धीमा ज़हर अब किसी महामारी से कम नहीं रहा। जब कोतवाली रुद्रपुर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में एक तस्कर को 135 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया – तो यह न केवल एक तस्कर की गिरफ़्तारी थी, बल्कि एक पूरी आपराधिक श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में अहम कड़ी भी थी।

यह साबित करता है कि एसएसपी मिश्रा का रुख केवल “आकस्मिक कार्रवाई” का नहीं, बल्कि “नियोजित, रणनीतिक और निरंतर दबाव” बनाए रखने का है।


🛡️ एक मजबूत और भरोसेमंद पुलिसिंग की नींव!

इन घटनाओं की रोशनी में हमें यह स्वीकार करना होगा कि एक संवेदनशील, सजग और सतत चौकस नेतृत्व ही किसी जिले को अपराध-मुक्त बनाने की दिशा में ले जा सकता है। एसएसपी मणिकांत मिश्रा की कार्यशैली में ना केवल तेज़ी है, बल्कि जनविश्वास को पुनः स्थापित करने की कुशलता भी है।

चाहे वह पाखंडी बाबा हों, हथियारबंद हमलावर हों या नशे के सौदागर – इन पर कार्रवाई का एक ही संदेश है:

“उत्तराखंड अब ठगी, अंधविश्वास और अपराध का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा!”


🔔 जनता से अपील

इस अवसर पर समाज को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। पाखंडी बाबाओं के चक्कर में ना पड़ें, नशा बेचने-खरीदने वालों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और अपराधियों से डरकर चुप ना बैठें। जब प्रशासन, पुलिस और जनता एकजुट होती है – तभी अपराध हारता है और समाज जीतता है।


एसएसपी मणिकांत मिश्रा के नेतृत्व में उधमसिंहनगर पुलिस की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध, चाहे जिस भी रूप में हो – अब छिप नहीं सकता। यह एक ऐसा मॉडल बन रहा है, जिसे पूरे उत्तराखंड को अपनाना चाहिए।यदि सभी जिलों में इसी तरह की तत्पर, निर्णायक और समाज-हितैषी पुलिसिंग हो – तो वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड को ‘अपराध मुक्त देवभूमि’ कहा जाएगा, केवल एक नारा नहीं, बल्कि यथार्थ के रूप में।


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