

देश के हर कोने में जब प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पी.एम. जनमन) का बिगुल बजा, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि सीमांत राज्य उत्तराखंड का एक जिला — उधमसिंह नगर — पूरे भारत में चौथे स्थान पर आकर एक नई मिसाल कायम करेगा। यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि जब इच्छाशक्ति, समन्वय और संवेदनशीलता मिलकर काम करते हैं, तो विकास सबसे कमजोर तबके तक पहुँच सकता है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
नई दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू द्वारा जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया को सम्मानित किया जाना, न केवल एक अधिकारी की मेहनत का प्रतीक है, बल्कि पूरे उत्तराखंड प्रशासन की जनजातीय समाज के प्रति संवेदनशील प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है। यह सम्मान उस जनपद के नाम हुआ है, जिसने जनजातीय बस्तियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, और आजीविका को धरातल पर उतारा है — वह भी केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि परिणाम के रूप में।
पी.एम. जनमन योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। यह पहल मात्र एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि “न्याय और समावेशिता की पुनर्प्रतिष्ठा” है। जनपद उधमसिंह नगर में इस योजना के अंतर्गत 43 जनजातीय गाँवों को जोड़ा गया है, जहाँ 99 तोक (छोटे समूह) में 40 हजार से अधिक जनसंख्या निवास करती है। इनमें से 6886 परिवार ‘विशेष रूप से कमजोर’ श्रेणी में आते हैं — और इन्हीं तक आवास, जल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएँ पहुँचाना इस योजना का वास्तविक लक्ष्य है।
जिलाधिकारी भदौरिया के नेतृत्व में गदरपुर, बाजपुर और अन्य क्षेत्रों में जो कार्य हुए — जैसे कुल्हा गाँव में 100 बेड के छात्रावास का निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्रों का विस्तार, सिंचाई नहरों और पेयजल संयोजन की स्थापना — वे इस बात के साक्ष्य हैं कि “विकास केवल शहरी नहीं, ग्राम्य भी हो सकता है।”
यह उपलब्धि केवल आँकड़ों में नहीं झलकती, बल्कि उन मुस्कुराते चेहरों में दिखती है जिनके घरों में पहली बार बिजली जली, जिन बच्चों को पहली बार छात्रावास और शिक्षा का अवसर मिला, और जिन माताओं को पहली बार सुरक्षित प्रसव और मातृत्व योजना का लाभ मिला।
आज जब देश समावेशी विकास के मार्ग पर अग्रसर है, तब उधमसिंह नगर का यह चौथा स्थान वास्तव में पहले स्थान के भाव को जीता है — क्योंकि यहाँ विकास “कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर” उतरा है।
इस सम्मान का श्रेय केवल एक अधिकारी को नहीं, बल्कि उस पूरी टीम को जाता है — ग्राम प्रधानों से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों, वन धन केंद्रों के संचालकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक — जिन्होंने मिलकर जनजातीय समाज के सपनों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा।
अब ज़रूरत इस बात की है कि यह मॉडल उत्तराखंड के अन्य जनपदों — जैसे चंपावत, बागेश्वर, और पिथौरागढ़ — तक पहुँचे, जहाँ जनजातीय समुदाय अभी भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
पी.एम. जनमन योजना केवल सरकार की पहल नहीं, यह “भारत के जन-मन” की सच्ची अभिव्यक्ति है।
उधमसिंह नगर ने इसे साबित किया है कि जब विकास का “मन” जागता है, तो “जन” का जीवन भी बदल जाता है।
– अवतार सिंह बिष्ट
संपादकीय, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स / शैल ग्लोबल टाइम्स




