बिहार चुनाव नतीजे कांग्रेस के लिए सिर्फ हार नहीं, बल्कि राहुल गांधी की उस चुनावी रणनीति पर भी बड़ा सवाल हैं जिसके लिए उन्होंने पूरे राज्य में महीनों तक दौरे किए थे. वोट चोरी के आरोपों से लेकर ‘वोटर अधिकार यात्रा’ तक कांग्रेस ने बड़ा नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जनता पर इसका असर ना के बराबर हुआ.

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यात्रा का कोई असर क्यों नहीं दिखा?

राहुल गांधी ने अगस्त में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली थी. सासाराम से पटना तक 1,300 किमी का सफर तय किया. इस यात्रा में 25 जिले, 110 विधानसभा सीटें कवर किया. लेकिन हैरानी की बात ये इस पूरी यात्रा रूट की एक भी सीट कांग्रेस की ओर झुकती नहीं दिखी. कांग्रेस 61 सीटों में उतरी, रुझानों में सिर्फ 4 सीटों वाल्मीकि नगर, किशनगंज, मनिहारी बेगूसराय में बढ़त मिलती हुई अब तक नजर आ रही है.

गांधी-मैजिक क्यों फीका पड़ा?

कांग्रेस मानती रही है कि राहुल गांधी की पिछली यात्राओं ने उन्हें लोकसभा 2024 तेलंगाना चुनाव में फायदा दिलाया था. लेकिन बिहार में तस्वीर एकदम उलट रही बीजेपी 92 पर आगे, जेडीयू 82 पर, दोनों ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा था. एलजेपी (RV) 28 में से 19 सीटों पर आगे है. आरएलएम 6 में से 4 HAM 6 में से 5 पर बने हुए हैं. मतलब एनडीए की आंधी में महागठबंधन बुरी तरह उड़ गया.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

‘वोट चोरी’ वाला नैरेटिव क्यों नहीं चला?

कांग्रेस ने चुनाव से पहले बीजेपी चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया था कि SIR (Special Intensive Revision) के जरिए लाखों वोटरों को लिस्ट से हटाया जा रहा है. यात्रा को कांग्रेस ने “लोगों के वोट बचाने की लड़ाई” बताया था, पर जनता ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया. स्वयं चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पहले ही खारिज कर दिया था.
नतीजों में दिख रहा है कि बिहार के मतदाताओं ने भी इसे नकार दिया.

हार की वजहें क्या रहीं?

कांग्रेस ने पोस्ट-मार्टम शुरू नहीं किया है, लेकिन जमीन पर कुछ बातें साफ दिखती हैं. महागठबंधन की एकता ‘कागज पर’ ही रही. RJD कांग्रेस एक-दूसरे से तालमेल बिठा ही नहीं पाए. कांग्रेस तेजस्वी यादव को सीएम फेस मानने पर भी असहज रही. ये चुनाव के आखिरी दिन तक देखने को मिला था. यहां तक सीटों के बंटवारा को लेकर भी काफी खींचतान हुई.

संयुक्त रणनीति का अभाव काफी दिखा

मतदाताओं को यह स्पष्ट नहीं दिखा कि गठबंधन किस मुद्दे पर लड़ रहा है. राहुल की यात्रा से जो शुरुआती जोश आया था, प्रचार खत्म होते-होते वो गायब हो गया. कांग्रेस की ग्राउंड विज़िबिलिटी काफी कम हो गई. ग्राउंड पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जोश नहीं नजर आया क्योंकि कांग्रेस ने बीजेपी जेडीयू की तुलना में कम प्रचार-प्रसार किया.बिहार विधानसभा चुनाव


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