हिंदू परंपरा में यह समय न केवल शुभ माना गया है, बल्कि मान्यता है कि महाभारत युद्ध की शुरुआत का आदेश स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसी मुहूर्त में दिया था. इसलिए राम मंदिर के ध्वजारोहण से पहले इसका चयन एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक आधार रखता है.
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
अभिजीत मुहूर्त क्या होता है?
ज्योतिष शास्त्र में दिन को कई खंडों में बांटा जाता है, जिनमें कुछ शुभ और कुछ अशुभ माने जाते हैं. इन सभी में अभिजीत मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत प्रभावी माना गया है.
अर्थ और महत्व
‘अभिजीत’ का अर्थ है, जो विजय प्राप्त कर चुका हो. माना जाता है कि यह समय सभी तरह की बाधाओं, दोषों और नकारात्मक प्रभावों को समाप्त कर देता है. इसलिए इसे किसी भी नए और मंगल कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम माना गया है.
कब आता है यह मुहूर्त?
अभिजीत मुहूर्त दिन के मध्य भाग में आता है, यानी दोपहर के समय. सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को 15 समान भागों में बाँटने पर आठवां भाग अभिजीत कहलाता है. इसकी औसत अवधि लगभग 48 मिनट होती है.
स्वयं सिद्ध मुहूर्त
यह समय स्वयं सिद्ध माना गया है, अर्थात् यह तिथि, नक्षत्र, वार या अन्य पंचांग संबंधित दोषों से प्रभावित नहीं होता. इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत बेधड़क इस समय में की जा सकती है.
महाभारत में अभिजीत मुहूर्त की भूमिका
अभिजीत मुहूर्त की महिमा का सबसे बड़ा उल्लेख महाभारत में मिलता है. कथा के अनुसार, युद्ध शुरू करने से पहले कई ज्योतिषियों ने अलग-अलग मत दिए थे. लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य दृष्टि से अभिजीत मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए अर्जुन को इसी समय शंखनाद कर युद्ध का आरंभ करने का आदेश दिया. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्य में विजय की संभावना अत्यंत प्रबल होती है, और पांडवों की जीत इसका प्रमाण मानी जाती है.
राम मंदिर के लिए अभिजीत मुहूर्त का चयन क्यों?
अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था, संघर्ष और धैर्य की पराकाष्ठा का प्रतीक है. ऐसे में ध्वजारोहण के लिए सर्वोत्तम और विजयदायक मुहूर्त का चयन बेहद अर्थपूर्ण है.
विजय का प्रतीक
राम मंदिर का निर्माण सदियों के विवादों और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद संभव हुआ है. इसे एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विजय माना जाता है. अभिजीत मुहूर्त स्वयं विजय का सूचक है, इसलिए यह क्षण और अधिक पवित्र और सार्थक माना गया है.
बाधाओं का निवारण
माना जाता है कि यह मुहूर्त किसी भी नकारात्मक ऊर्जा या अवरोध को दूर कर कार्य को सिद्धि प्रदान करता है. राम मंदिर जैसे विशाल आध्यात्मिक प्रकल्प के लिए यह विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
भगवान राम से भी जुड़ी है यह घड़ी
कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम का जन्म भी अभिजीत मुहूर्त में हुआ था. इसलिए उनके मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराने के लिए यही समय सबसे उपयुक्त और भावनात्मक रूप से गहरे अर्थ वाला माना जा रहा है.✧ धार्मिक और अध्यात्मिक
