

सूर्य न केवल जीवन के लिए ऊर्जा का स्रोत हैं, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी इनका महत्व अत्यधिक है। सप्ताह के हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित किया गया है, लेकिन रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा के लिए निर्धारित है।

क्या आपने कभी सोचा है कि रविवार को ही सूर्य देव की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे न केवल ज्योतिषीय कारण हैं, बल्कि कई रोचक पौराणिक कथाएं और गहरा आध्यात्मिक महत्व भी छिपा हुआ है। आइए, इस विशेष दिन की महत्ता और इससे जुड़ी कथाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।
ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व
सप्ताह के सभी दिनों का संबंध नौ ग्रहों से है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रविवार का दिन सूर्य ग्रह से संबंधित है।
ग्रहों के राजा: सूर्य को नवग्रहों का राजा और आत्मा का कारक माना जाता है। यह व्यक्ति के आत्मबल, आत्मविश्वास, सम्मान, स्वास्थ्य और नेतृत्व क्षमता को प्रभावित करता है।
सूर्य को बल देना: कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति को मान-सम्मान, सफलता और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। रविवार को उनकी पूजा करने से कुंडली में कमजोर सूर्य को बल मिलता है और सभी दोष (जैसे पितृ दोष, ग्रह दोष) शांत होते हैं।
सात दिनों के फल की प्राप्ति: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन सूर्य देव की पूजा नहीं कर पाता है, तो रविवार को सच्चे मन से उनकी उपासना करने पर उसे सभी दिनों की पूजा का फल प्राप्त होता है।
रविवार को सूर्य पूजा से जुड़ी पौराणिक कथाएं
रविवार को सूर्य देव की उपासना का विधान स्थापित करने के पीछे दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं।
सूर्य देव के जन्म की कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि का आरंभ हुआ, तब ब्रह्मा जी के मुख से सबसे पहले ‘ओम’ शब्द निकला। यह ‘ओम’ सूर्य का तेजरूपी सूक्ष्म रूप माना जाता है। इसके बाद ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेदों की उत्पत्ति हुई। इस वैदिक तेज को आदित्य (सूर्य) कहा गया, जो सृष्टि के अविनाशी कारण हैं। चूंकि सूर्य का प्राकट्य सृष्टि के आरंभ में हुआ, इसलिए उन्हें पहला और सबसे महत्वपूर्ण देवता माना गया। सप्ताह में रविवार को पहला दिन माना जाता है, इसलिए यह दिन सूर्य देव को समर्पित हो गया।
रविवार व्रत और वृद्धा की कथा
रविवार व्रत कथा के अनुसार, एक नगर में एक गरीब और बूढ़ी महिला रहती थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत रखती थी और सूर्य देव को जल अर्पित करती थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उसे एक गाय प्रदान की। उस गाय के गोबर से उसे सोना प्राप्त होता था, जिससे वह समृद्ध हो गई।
वृद्धा की समृद्धि देखकर उसकी पड़ोसन को ईर्ष्या हुई। पड़ोसन के बहकावे में आकर राजा ने वृद्धा की गाय छीन ली। राजा के महल में गाय के आते ही, गोबर की जगह पूरे महल में गंदगी फैल गई। तब रात में सूर्य देव ने राजा को स्वप्न में दर्शन दिए और बताया कि यह गाय उस वृद्धा की है, जो उनकी परम भक्त है।
राजा ने अपनी भूल का पश्चाताप किया और गाय को वृद्धा को लौटा दिया। उसी दिन से राजा ने पूरे नगर में रविवार का व्रत रखने और सूर्य देव की उपासना करने का आदेश दिया। इस कथा से यह मान्यता स्थापित हुई कि रविवार का व्रत और पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है।
रविवार को सूर्य देव की पूजा कैसे करें?
अर्घ्य देना: सूर्योदय के समय स्नान करके, तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर ‘ओम घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
आदित्य हृदय स्तोत्र: इस दिन ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।
दान: इस दिन लाल वस्त्र, गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन आदि का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
इस प्रकार, धार्मिक, ज्योतिषीय और पौराणिक कथाओं के आधार पर, रविवार का दिन भगवान सूर्य देव की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। यह दिन भक्तों के जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सौभाग्य लेकर आता है।
सूर्य न केवल जीवन के लिए ऊर्जा का स्रोत हैं, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी इनका महत्व अत्यधिक है। सप्ताह के हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित किया गया है, लेकिन रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा के लिए निर्धारित है।
क्या आपने कभी सोचा है कि रविवार को ही सूर्य देव की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे न केवल ज्योतिषीय कारण हैं, बल्कि कई रोचक पौराणिक कथाएं और गहरा आध्यात्मिक महत्व भी छिपा हुआ है। आइए, इस विशेष दिन की महत्ता और इससे जुड़ी कथाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।
ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व
सप्ताह के सभी दिनों का संबंध नौ ग्रहों से है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रविवार का दिन सूर्य ग्रह से संबंधित है।
ग्रहों के राजा: सूर्य को नवग्रहों का राजा और आत्मा का कारक माना जाता है। यह व्यक्ति के आत्मबल, आत्मविश्वास, सम्मान, स्वास्थ्य और नेतृत्व क्षमता को प्रभावित करता है।
सूर्य को बल देना: कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति को मान-सम्मान, सफलता और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। रविवार को उनकी पूजा करने से कुंडली में कमजोर सूर्य को बल मिलता है और सभी दोष (जैसे पितृ दोष, ग्रह दोष) शांत होते हैं।
सात दिनों के फल की प्राप्ति: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन सूर्य देव की पूजा नहीं कर पाता है, तो रविवार को सच्चे मन से उनकी उपासना करने पर उसे सभी दिनों की पूजा का फल प्राप्त होता है।
रविवार को सूर्य पूजा से जुड़ी पौराणिक कथाएं
रविवार को सूर्य देव की उपासना का विधान स्थापित करने के पीछे दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं।
सूर्य देव के जन्म की कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि का आरंभ हुआ, तब ब्रह्मा जी के मुख से सबसे पहले ‘ओम’ शब्द निकला। यह ‘ओम’ सूर्य का तेजरूपी सूक्ष्म रूप माना जाता है। इसके बाद ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेदों की उत्पत्ति हुई। इस वैदिक तेज को आदित्य (सूर्य) कहा गया, जो सृष्टि के अविनाशी कारण हैं। चूंकि सूर्य का प्राकट्य सृष्टि के आरंभ में हुआ, इसलिए उन्हें पहला और सबसे महत्वपूर्ण देवता माना गया। सप्ताह में रविवार को पहला दिन माना जाता है, इसलिए यह दिन सूर्य देव को समर्पित हो गया।
रविवार व्रत और वृद्धा की कथा
रविवार व्रत कथा के अनुसार, एक नगर में एक गरीब और बूढ़ी महिला रहती थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत रखती थी और सूर्य देव को जल अर्पित करती थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उसे एक गाय प्रदान की। उस गाय के गोबर से उसे सोना प्राप्त होता था, जिससे वह समृद्ध हो गई।
वृद्धा की समृद्धि देखकर उसकी पड़ोसन को ईर्ष्या हुई। पड़ोसन के बहकावे में आकर राजा ने वृद्धा की गाय छीन ली। राजा के महल में गाय के आते ही, गोबर की जगह पूरे महल में गंदगी फैल गई। तब रात में सूर्य देव ने राजा को स्वप्न में दर्शन दिए और बताया कि यह गाय उस वृद्धा की है, जो उनकी परम भक्त है।
राजा ने अपनी भूल का पश्चाताप किया और गाय को वृद्धा को लौटा दिया। उसी दिन से राजा ने पूरे नगर में रविवार का व्रत रखने और सूर्य देव की उपासना करने का आदेश दिया। इस कथा से यह मान्यता स्थापित हुई कि रविवार का व्रत और पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है।
रविवार को सूर्य देव की पूजा कैसे करें?
अर्घ्य देना: सूर्योदय के समय स्नान करके, तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर ‘ओम घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
आदित्य हृदय स्तोत्र: इस दिन ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।
दान: इस दिन लाल वस्त्र, गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन आदि का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
इस प्रकार, धार्मिक, ज्योतिषीय और पौराणिक कथाओं के आधार पर, रविवार का दिन भगवान सूर्य देव की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। यह दिन भक्तों के जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सौभाग्य लेकर आता है।
✨ ग्रह नक्षत्र




