पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय, अल्मोड़ा में इन दिनों ऑडियोमैट्री कक्ष का तेज़ी से हो रहा निर्माण केवल एक इमारत का निर्माण नहीं, बल्कि एक लंबे संघर्ष और जनसेवा की सशक्त मिसाल है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के अथक प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिनकी निष्ठा और संकल्प ने वर्षों से उपेक्षित पड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं को नई जीवनरेखा दी है।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
संजय पाण्डे ने केवल नए ऑडियोमैट्री कक्ष के निर्माण तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि वर्षों से बंद पड़े ऑडियोमैट्री विभाग को पुनः सक्रिय करवाकर सैकड़ों श्रवण बाधित मरीजों को बड़ी राहत दिलाई। आज लोग जो महंगे परीक्षणों के लिए मैदानों का रुख करते थे, वही सुविधाएँ अब अपने ही जिले में उपलब्ध हैं।
उनकी पहल पर अल्मोड़ा जिला अस्पताल में अब लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की भी नियमित शुरुआत हो चुकी है, जहाँ हर सप्ताह औसतन छह सफल ऑपरेशन हो रहे हैं। इससे न केवल मरीजों का आर्थिक और मानसिक बोझ कम हुआ है, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढांचे पर भी लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है।
इतना ही नहीं, ENT की एंडोस्कोपिक सर्जरी, कान के पर्दे का आधुनिक विधि से प्रत्यारोपण, महिला अस्पताल में बंद पड़ी सर्जिकल सेवाओं का पुनः संचालन—ये सभी उपलब्धियाँ उसी एक सामाजिक संकल्प की कड़ियाँ हैं। एक्स-रे मशीन का आवश्यक पार्ट पहुँच चुका है और जल्द ही वह भी फिर से चालू होने जा रही है। नई एक्स-रे मशीन, आधुनिक ऑडियोमैट्री उपकरण और कलर डॉपलर मशीन के प्रस्ताव भी उच्च स्तर पर अनुमोदन की प्रक्रिया में हैं।
सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि इन सभी बदलावों के पीछे न कोई राजनीतिक दबाव है, न आंदोलन, न धरना—केवल एक जागरूक नागरिक की ईमानदार कोशिश है। संजय पाण्डे इन सभी उपलब्धियों का श्रेय अपने दिवंगत माता-पिता और ईश्वर को देते हैं, जो उनकी विनम्रता और संस्कारों को दर्शाता है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स का मानना है कि संजय पाण्डे जैसे सामाजिक कार्यकर्ता आज के समय में समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी दूरदृष्टि, समर्पण और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता ने अल्मोड़ा की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा और नई गति दी है। यह उदाहरण साबित करता है कि जब नीयत साफ हो और उद्देश्य जनसेवा का हो, तो बदलाव अवश्य संभव है।
