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रुद्रपुर/देहरादून।उत्तराखंड सरकार में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू का बयान इन दिनों उसी तरह चर्चा में है, जैसे अक्सर “अनजाने में निकले” बयान बाद में सफाई के मंच पर पहुंच जाते हैं। महिलाओं के सम्मान पर उठे विवाद के बाद साहू ने सफाई देते हुए कहा है कि देश की समस्त बहन-बेटियां उनके लिए सम्माननीय हैं और यदि किसी को ठेस पहुंची हो तो वे क्षमा चाहते हैं।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)
अब सवाल यह है कि जब सम्मान इतना व्यापक है, तो फिर “बिहार में लड़की 20-25 हजार में मिल जाती है” जैसे वाक्य मंच से कैसे फिसल गए? क्या यह भी उसी तरह का “हास्य” था, जो आजकल सार्वजनिक मंचों पर बिना निमंत्रण के आ धमकता है और बाद में माफी के लिफाफे में बंद कर दिया जाता है?
गिरधारी लाल साहू का कहना है कि सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के दौलाघट में आयोजित माताओं-बहनों के स्वागत समारोह में उन्होंने मित्र की शादी से जुड़ा एक प्रसंग केवल मज़ाक में साझा किया था, जिसे विपक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़कर पेश किया। यानी समस्या बयान में नहीं, उसे सुनने-समझने वालों में है—यह तर्क भी अब भारतीय राजनीति का स्थायी हथियार बन चुका है।
साहू ने अपने सामाजिक योगदान गिनाते हुए बताया कि वे वर्षों से बरेली में 101 निर्धन बेटियों के विवाह में सहयोग करते आ रहे हैं। यह भी कहा कि प्रदेश ही नहीं, देश की हर बेटी उनके लिए देवी स्वरूप है।
कटाक्ष यह है कि देवी स्वरूप बेटियों का मूल्यांकन जब आंकड़ों और “हज़ारों” में उतर आए, तो देवी भी हैरान हो जाए।
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस समेत विपक्ष ने इसे महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। वहीं, सत्ता पक्ष इसे “अनावश्यक तूल” और “हास्य का गलत अर्थ” बता रहा है। माफी भी दे दी गई, बयान भी दे दिया गया—अब शायद उम्मीद यही है कि मामला वहीं समाप्त हो जाए, जैसे कई बार होता आया है।
लेकिन सवाल बाकी है—
क्या महिला सशक्तिकरण केवल फाइलों, आयोजनों और सफाई बयानों तक सीमित रहेगा?
और क्या हर विवाद के बाद “अगर किसी की भावना आहत हुई हो” कह देना ही सार्वजनिक जिम्मेदारी का अंतिम पड़ाव बन गया है?
देवभूमि में यह बहस सिर्फ एक बयान की नहीं, उस सोच की है जो मंच पर फिसल जाती है और कैमरे के सामने पकड़ी जाती है।
बाकी, माफी तो अब राजनीति का सबसे सुरक्षित कुशन बन चुकी है।
