उत्तराखंड में फल उत्पादन को आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनाने और किसानों की आय में दीर्घकालिक वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में सेब की अति सघन बागवानी योजना को तेज गति से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।

Spread the love

इस कड़ी में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को किसानों को क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा, ताकि उत्पादन, तकनीकी सहायता और विपणन की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सके।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

सचिवालय में शुक्रवार को मुख्य सचिव ने अति सघन सेब बागवानी के संबंध में बैठक की। इस दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट के उत्पादन को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ में राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता और अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि सेब की अति सघन बागवानी योजना के अंतर्गत नवीनतम किस्मों के बागान बड़े पैमाने पर स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए जिलों में किसानों को क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि उत्पादन, तकनीकी सहायता और विपणन की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सके।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश की वास्तविक क्षमता का वैज्ञानिक आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद के लिए वर्ष 2030, वर्ष 2040 और वर्ष 2050 को ध्यान में रखते हुए उत्पादन लक्ष्य तय किए जाएं और उसी अनुरूप योजनाओं को धरातल पर उतारा जाए।

उन्होंने झाला (हर्षिल, उत्तरकाशी) स्थित कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कोल्ड स्टोरेज विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नर्सरियों को अपग्रेड करने, बड़े स्तर पर पौध उत्पादन और फुल टाइम तकनीकी सहयोग के लिए पीएमयू गठित करने पर भी बल दिया गया। बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव दिलीप जावलकर, वी षणमुगम, एसएन पांडेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


Spread the love