संपादकीय | उत्तराखंड की राजनीति में तीसरे विकल्प की दस्तक: हिमालय क्रांति पार्टी

Spread the love

उत्तराखंड की राजनीति लंबे समय से दो ध्रुवों—सत्ता और मुख्य विपक्ष—के बीच सिमटी रही है। ऐसे में हिमालय क्रांति पार्टी का उभार केवल एक नई पार्टी का आगमन नहीं, बल्कि उस जन-आकांक्षा की अभिव्यक्ति है, जो खुद को उपेक्षित, ठगा और अनसुना महसूस कर रही है। समाजवादी विचारधारा पर आधारित यह पार्टी आज राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में गंभीरता से चर्चा में है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


वर्ष 2025 का उत्कृष्ट कार्यकर्ता सम्मान प्रदेश महासचिव श्री दिनेश सिंह बिष्ट को देकर पार्टी ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन केवल चेहरे नहीं, बल्कि जमीनी कार्य और निष्ठा को महत्व देता है। श्री बिष्ट के नेतृत्व में पार्टी में जो सांगठनिक ऊर्जा, अनुशासन और समन्वय देखने को मिला है, उसने हिमालय क्रांति पार्टी को एक आंदोलनात्मक समूह से आगे बढ़ाकर एक स्थापित राजनीतिक विकल्प की छवि दी है। यह सम्मान दरअसल हर उस कार्यकर्ता की उम्मीद है, जो यह सोचता है कि उसका संघर्ष भी कभी पहचाना जाएगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


पौड़ी में आयोजित पार्टी सम्मेलन और युवाओं के बीच दिखता जबरदस्त क्रेज इस बात का प्रमाण है कि यह पार्टी केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही। हालांकि इसकी जड़ें सोशल मीडिया पर सक्रिय सामाजिक संगठनों से निकलीं, लेकिन आज यह जमीनी राजनीति में दखल देने की स्थिति में है। बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और न्याय जैसे मुद्दों पर पार्टी की मुखरता उसे अन्य दलों से अलग खड़ा करती है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड, कुमाऊं क्षेत्र में कशिश हत्याकांड से जुड़ा न्यायिक असंतोष, बेरोजगार संगठनों के आंदोलन और अब यूजीसी से जुड़े नए कानून को लेकर उपजा जनाक्रोश—ये सभी घटनाएं राज्य के भीतर गहरे असंतोष को दर्शाती हैं। हर मोहल्ले में बने व्हाट्सएप समूह, हर चाय की दुकान पर होती बहसें यह बताती हैं कि जनता अब केवल वोटर नहीं, बल्कि सवाल पूछने वाला नागरिक बन चुकी है। इन आंदोलनों में हिमालय क्रांति पार्टी की अग्रणी भूमिका उसे जनभावनाओं का स्वाभाविक प्रतिनिधि बनाती है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यदि क्षेत्रीय दलों के बीच आपसी समझ बने और कांग्रेस जैसे दल भी सीटों के सम्मानजनक बंटवारे पर सहमत हों, तो सत्ता परिवर्तन की लहर से इनकार नहीं किया जा सकता। बॉबी पवार जैसे नेताओं का यह कहना कि “विपक्ष का एक भी वोट बाहर नहीं जाना चाहिए”, इस ओर संकेत करता है कि आने वाले समय में महागठबंधन की राजनीति में हिमालय क्रांति पार्टी की भूमिका अहम हो सकती है।
कुल मिलाकर, हिमालय क्रांति पार्टी का उभार उत्तराखंड की राजनीति में एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी—चेतावनी उन दलों के लिए जो जनभावनाओं से कट चुके हैं, और अवसर उन नागरिकों के लिए जो समाजवादी सोच के साथ न्याय, बराबरी और जवाबदेही की राजनीति चाहते हैं। यदि पार्टी इसी सांगठनिक मजबूती और जनसरोकारों के साथ आगे बढ़ती है, तो 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।


Spread the love