पीयूष धामी ने शोध के माध्यम से जागर संस्कृति को दिया सम्मान, पद्मश्री बसंती बिष्ट को सौंपा लघु शोध

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उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक गायन विधा जागर को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाली पहली महिला जागर गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट के जीवन और संघर्षों को अब युवा पीढ़ी शोध के माध्यम से सहेजने का प्रयास कर रही है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

इसी कड़ी में युवा कलाकार एवं शोधार्थी पीयूष धामी ने बसंती बिष्ट के जीवन पर आधारित एक विस्तृत लघु शोध तैयार कर उन्हें भेंट किया।
पीयूष धामी द्वारा तैयार किए गए इस शोध में बसंती बिष्ट के बचपन, लोकगायन के क्षेत्र में उनके प्रवेश की कठिनाइयों, सामाजिक चुनौतियों तथा जागर विधा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा को विस्तार से रेखांकित किया गया है। पीयूष ने बताया कि इस शोध का उद्देश्य उत्तराखंड की लोक परंपराओं को दस्तावेज़ी रूप में सुरक्षित कर भावी पीढ़ी तक पहुँचाना है।
इस अवसर पर पद्मश्री बसंती बिष्ट ने पीयूष धामी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि, “जब युवा अपनी जड़ों और लोक कलाओं पर शोध करते हैं, तभी हमारी संस्कृति जीवंत बनी रहती है।” उन्होंने पीयूष को उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद भी दिया।
लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण में सक्रिय पीयूष धामी का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य न केवल वरिष्ठ कलाकारों को सम्मान प्रदान करते हैं, बल्कि नए शोधार्थियों के लिए भी सशक्त संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराते हैं। इस उपलब्धि पर क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने पीयूष धामी को बधाई दी है।


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