होली : रंगों से आगे आत्मा का उत्सवअवतार सिंह बिष्टसंपादक,अध्यक्ष,

Spread the love


प्रिय प्रदेशवासियों,आप सभी को रंगों, उमंगों और आत्मिक उल्लास के महापर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं। होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि यह आत्मा की पवित्रता, मन की निर्मलता और समाज की समरसता का उत्सव है। यह वह अवसर है जब हम अपने भीतर जमी कटुता, द्वेष और अहंकार की परतों को उतारकर प्रेम, करुणा और भाईचारे के रंगों में रंग जाते हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


भारतीय सनातन परंपरा में होली का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व हमें भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और सत्य के प्रति उनकी निष्ठा की याद दिलाता है। असत्य, अत्याचार और अहंकार का प्रतीक होलिका जब अग्नि में भस्म हो गई, तब यह संदेश स्पष्ट हुआ कि अंततः विजय सत्य और भक्ति की ही होती है। आज भी हमारे समाज और राष्ट्र जीवन में अनेक चुनौतियाँ हैं, लेकिन हमें विश्वास है कि सत्य, संयम और सामूहिक संकल्प से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।
उत्तराखंड की पावन देवभूमि में होली का स्वरूप और भी दिव्य हो उठता है। कुमाऊँ और गढ़वाल की खड़ी होली, बैठकी होली और महिला होली केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोकआस्था और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वर हैं। ढोलक, मंजीरे और रागों की मधुर धुनों के बीच जब “रंग डालो” के स्वर गूंजते हैं, तब ऐसा लगता है मानो स्वयं प्रकृति भी इस आनंद में सहभागी हो रही हो।
आज आवश्यकता है कि हम इस पर्व को केवल बाहरी उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि इसे आत्ममंथन का अवसर बनाएं। अपने भीतर झांकें—क्या हम समाज, राज्य और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं? क्या हम उस उत्तराखंड के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसके लिए अनगिनत आंदोलनकारियों ने संघर्ष किया?
होली हमें सिखाती है कि जैसे रंग मिलकर एक सुंदर चित्र बनाते हैं, वैसे ही समाज के सभी वर्ग—युवा, महिलाएं, किसान, सैनिक, कर्मचारी और व्यापारी—मिलकर ही एक सशक्त राज्य और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। परस्पर सम्मान, सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों की रक्षा ही सच्ची होली है।
मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि इस होली पर हम पर्यावरण की रक्षा का भी संकल्प लें। प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, जल की बचत करें और प्रेमपूर्वक, मर्यादित आचरण के साथ उत्सव मनाएं।
आइए, इस होली पर हम अपने मन की नकारात्मकता को होलिका दहन में समर्पित कर दें और नई ऊर्जा, नए संकल्प तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। देवभूमि उत्तराखंड की उन्नति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव के लिए हम सब मिलकर कार्य करें—यही इस पावन पर्व की सच्ची साधना होगी।
एक बार पुनः आप सभी प्रदेशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।
रंगों का यह पर्व आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए।
जय उत्तराखंड! जय भारत!


Spread the love