रुद्रपुर में परिवर्तन की दस्तक: क्या 2027 में राम प्रकाश गुप्ता बन सकते हैं जनता की पहली पसंद?अवतार सिंह बिष्ट, विशेष विश्लेषण | हिन्दुस्तान ग्लोबल टाइम्स

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रुद्रपुर की राजनीति इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। शहर के राजनीतिक और सामाजिक वातावरण में परिवर्तन की जो लहर धीरे-धीरे उठ रही थी, वह अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। पिछले कुछ महीनों में हिन्दुस्तान ग्लोबल टाइम्स की टीम ने शहर के 35 से अधिक वार्डों का भ्रमण कर स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, युवाओं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से संवाद किया। इस संवाद के दौरान जो बात सबसे प्रमुख रूप से सामने आई, वह थी—परिवर्तन की इच्छा।
लोगों की आस्था आज भी भारतीय जनता पार्टी में दिखाई देती है, लेकिन साथ ही यह भावना भी मजबूत होती जा रही है कि अब रुद्रपुर को नए नेतृत्व की आवश्यकता है। इसी चर्चा के बीच जिस नाम का सबसे अधिक उल्लेख सामने आया, वह है राम प्रकाश गुप्ता।
36 वर्षों का लंबा राजनीतिक और सामाजिक सफर
राम प्रकाश गुप्ता का राजनीतिक और सामाजिक जीवन लगभग 36 वर्षों से अधिक का है। वे उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने युवावस्था से ही राष्ट्रवादी विचारधारा को अपनाया और संगठन के साथ जुड़कर काम किया।
उनकी राजनीतिक यात्रा का प्रारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से हुआ। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी, बजरंग दल और राम जन्मभूमि आंदोलन से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। यह वह दौर था जब देश में वैचारिक संघर्ष और संगठनात्मक विस्तार का समय था। राम प्रकाश गुप्ता ने इस दौर में बिना किसी पद या स्वार्थ के संगठन को मजबूत करने का कार्य किया।
उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही। वे उपभोक्ता कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय रहे और उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाते रहे।
प्रशासनिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का अनुभव
राम प्रकाश गुप्ता का अनुभव केवल संगठनात्मक राजनीति तक सीमित नहीं है। उन्होंने समय-समय पर कई महत्वपूर्ण समितियों और बोर्डों में सदस्य के रूप में भी कार्य किया।
1997 से 2000 तक वे नैनीताल जिले की राज्य खाद्य एवं रसद सलाहकार समिति के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने खाद्य वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने का कार्य किया।
इसी अवधि में 1999 से 2000 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशानुसार गठित सिंथेटिक दूध जांच समिति में भी वे सदस्य रहे। उस समय सिंथेटिक दूध का मुद्दा देशभर में चिंता का विषय बना हुआ था और इस समिति का उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
इसके बाद 2001 से 2004 तक उन्होंने किशोर कल्याण बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य किया, जहां बाल अधिकारों और किशोर न्याय से जुड़े मामलों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
भाजपा संगठन में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां
राम प्रकाश गुप्ता की पहचान भाजपा के उन कार्यकर्ताओं में रही है जिन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया।
उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारियां समय के साथ लगातार बढ़ती गईं:
2002 – युवा मोर्चा नगर उपाध्यक्ष
2003 – भाजपा नगर उपाध्यक्ष (मेन बॉडी)
2004 – भाजपा नगर महामंत्री, रुद्रपुर
2007 – जिला अध्यक्ष, निर्मल प्रकोष्ठ उधमसिंह नगर
2009 – लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव प्रभारी
इन पदों पर रहते हुए उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और नए कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़ने का कार्य किया।
प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच
राम प्रकाश गुप्ता की सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें समय-समय पर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां भी मिलीं।
2012 – प्रदेश सहसंयोजक, श्रम प्रकोष्ठ
2013 – प्रदेश मंत्री, भारतीय मजदूर मोर्चा (भाजपा)
2015 – पुनः प्रदेश सहसंयोजक, श्रम प्रकोष्ठ
इसके बाद उन्हें केंद्र सरकार से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं।
2017 – ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) सदस्य, भारत सरकार
2018 – प्रदेश उपाध्यक्ष, ओबीसी मोर्चा भाजपा
2020 – EPF बोर्ड सदस्य, भारत सरकार
यह दोनों जिम्मेदारियां आज भी उनके पास हैं, जो यह दर्शाती हैं कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर उनके अनुभव और कार्यशैली पर भरोसा किया जाता है।
इसके अलावा
2022 – भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
2024 – उत्तराखंड संगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड सदस्य
के रूप में भी वे सक्रिय हैं।
जमीनी स्तर से जुड़ा नेतृत्व
राम प्रकाश गुप्ता की सबसे बड़ी पहचान यह मानी जाती है कि वे जमीनी नेता हैं। वे केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहते बल्कि सामाजिक कार्यक्रमों, शिक्षा और जनसमस्याओं से भी जुड़े रहते हैं।
वे लंबे समय से शिक्षा जगत से जुड़े हुए हैं और निजी शिक्षण संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। यही कारण है कि युवाओं और अभिभावकों के बीच भी उनकी पहचान एक शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है।
रुद्रपुर के वार्डों में उठती परिवर्तन की आवाज
हिन्दुस्तान ग्लोबल टाइम्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण में रुद्रपुर के 35 से अधिक वार्डों का भ्रमण किया गया। इस दौरान केवल मुख्य बाजार या विकसित क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों सहित कई इलाकों में लोगों से संवाद किया गया।
इन वार्ताओं में जो बात सामने आई, वह यह थी कि शहर में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
लोगों का कहना है कि रुद्रपुर में लंबे समय से एक ही समुदाय का प्रतिनिधित्व अधिक रहा है, जबकि शहर की सामाजिक संरचना काफी विविध है। कई समुदायों को लगता है कि उन्हें पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
देसी समाज का बढ़ता राजनीतिक महत्व
रुद्रपुर की सामाजिक संरचना का अध्ययन करने पर एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है कि यहां देसी समाज की आबादी सबसे अधिक है।
अन्य समुदायों का प्रतिशत कहीं 15%, 20% या 25% तक है, जबकि देसी समाज का अनुपात इन सभी से अधिक माना जाता है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आए कई परिवार भी इसी समाज से जुड़े हैं।
ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा भी सुनने को मिलती है कि देसी समाज को भी अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
क्यों चर्चा में हैं राम प्रकाश गुप्ता?
जब विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई तो एक नाम बार-बार सामने आया—राम प्रकाश गुप्ता।
लोगों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत है:
सरल और व्यवहार कुशल व्यक्तित्व
विवादों से दूर रहना
संगठन में लंबा अनुभव
सभी समाजों से संवाद
कई लोगों ने यह भी बताया कि आज जो कई नेता बड़े पदों पर हैं, उनमें से कई को भाजपा से जोड़ने में राम प्रकाश गुप्ता की भूमिका रही है।
क्या 2027 में मिल सकता है टिकट?
रुद्रपुर में राजनीतिक चर्चा का केंद्र अब 2027 का विधानसभा चुनाव बनने लगा है। ऐसे में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या भाजपा इस बार नए चेहरे को मौका दे सकती है।
अगर पार्टी संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक स्वीकार्यता और लंबे समर्पण को आधार बनाती है तो राम प्रकाश गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में आता है।
जीत का गणित
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक निष्ठा को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार का चयन करती है, तो राम प्रकाश गुप्ता एक मजबूत दावेदार हो सकते हैं।
उनके पक्ष में कई बातें जाती हैं:
36 वर्षों का संगठनात्मक अनुभव
विभिन्न सामाजिक और सरकारी समितियों में कार्य
शिक्षा क्षेत्र से जुड़ाव
विभिन्न समाजों में स्वीकार्यता
देसी समाज का समर्थन
भाजपा के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय
रुद्रपुर सीट भाजपा के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। यदि पार्टी यहां सही रणनीति अपनाती है तो यह सीट तीसरी बार धामी सरकार बनने की राह को मजबूत कर सकती है।
लेकिन अगर स्थानीय असंतोष को नजरअंदाज किया गया तो यह विरोध का कारण भी बन सकता है।
निष्कर्ष
रुद्रपुर की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। शहर में बदलाव की इच्छा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। ऐसे समय में यदि कोई नेता अनुभव, संगठनात्मक निष्ठा और सामाजिक स्वीकार्यता का संतुलन प्रस्तुत करता है, तो वह स्वाभाविक रूप से चर्चा में आ जाता है।
राम प्रकाश गुप्ता का नाम भी इसी कारण तेजी से उभर रहा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा किस रणनीति के साथ मैदान में उतरती है और क्या पार्टी अपने पुराने और समर्पित कार्यकर्ता को मौका देती है या नहीं।
लेकिन इतना तय है कि रुद्रपुर की जनता अब परिवर्तन की राजनीति पर गंभीरता से विचार कर रही है।


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