

उत्तराखंड की राजनीति में एक समय ऐसा था जब हर सरकार के अंतिम वर्ष में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो जाती थीं। लेकिन Pushkar Singh Dhami ने इस परंपरा को तोड़ते हुए न केवल अपने नेतृत्व को स्थिर किया, बल्कि पांचवें वर्ष में मंत्रिमंडल विस्तार कर यह संकेत भी दे दिया कि भाजपा अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी उसी चेहरे के साथ कर रही है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई देती है। भीमताल से राम सिंह कैड़ा, राजपुर रोड से खजान दास, रुड़की से प्रदीप बत्रा, रुद्रप्रयाग से भरत सिंह चौधरी और हरिद्वार से मदन कौशिक को शामिल कर सरकार ने संगठन और सत्ता के बीच तालमेल मजबूत करने का प्रयास किया है। यह विस्तार केवल पदों का वितरण नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
2027 का रोडमैप: स्थिरता बनाम सवाल
धामी सरकार का यह कदम साफ करता है कि भाजपा अब “चेहरा बदलो” की राजनीति से हटकर “प्रदर्शन के आधार पर चुनाव” की ओर बढ़ रही है। लेकिन क्या केवल स्थिर नेतृत्व ही चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त होगा?
प्रदेश में कई ज्वलंत मुद्दे आज भी जनता के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं—
भ्रष्टाचार: क्या सरकारी तंत्र में पारदर्शिता आई है या शिकायतें अभी भी जस की तस हैं?
नशा मुक्ति: युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर सरकार कितना नियंत्रण कर पाई?
खनन माफिया: क्या अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगी या यह नेटवर्क और मजबूत हुआ?
लैंड जिहाद और भू-अतिक्रमण: क्या सख्त कार्रवाई हुई या यह केवल राजनीतिक मुद्दा बनकर रह गया?
महिलाओं की सुरक्षा: बढ़ते अपराधों पर क्या ठोस सुधार दिखाई देता है?
स्वास्थ्य सेवाएं: पहाड़ से लेकर मैदान तक अस्पतालों की स्थिति क्या बदली?
जनता से सीधा सवाल—2027 में किस पर होगा भरोसा?
अब सबसे बड़ा सवाल उत्तराखंड की जनता के सामने है—
क्या आप 2027 में Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में फिर से सरकार बनते देखना चाहते हैं?
क्या मंत्रिमंडल विस्तार से आपको लगता है कि सरकार और मजबूत हुई है?
क्या आपके क्षेत्र में विकास की गति तेज हुई है या केवल दावे किए जा रहे हैं?
क्या भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और नशे जैसे मुद्दों पर सरकार सफल रही है?
क्या आप चाहते हैं कि 2027 का चुनाव धामी के चेहरे पर ही लड़ा जाए?
स्थिरता का दावा, परीक्षा बाकी
धामी सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह राजनीतिक अस्थिरता के दौर से आगे निकल चुकी है। लेकिन 2027 का चुनाव केवल स्थिरता के आधार पर नहीं, बल्कि जनता के अनुभव और जमीन पर दिखने वाले बदलावों के आधार पर तय होगा।
अब गेंद जनता के पाले में है—
क्या स्थिर नेतृत्व ही आपकी पहली पसंद है, या आप बदलाव चाहते हैं?




