सिटी क्लब में यूकेडी की बैठक, संगठन विस्तार पर जोर
रुद्रपुर के सिटी क्लब में उत्तराखंड क्रांति दल की बैठक आयोजित हुई। कार्यक्रम में सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया, लेकिन एक पदाधिकारी ने सरकार बनने तक सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जो चर्चा का विषय बना। बैठक में उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों जैसे पलायन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर गंभीर मंथन हुआ। पदाधिकारियों ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, सदस्यता अभियान तेज करने और गांव-गांव तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए रणनीति तैयार करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर भी विशेष चर्चा की गई।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
रुद्रपुर के सिटी क्लब में आज आयोजित उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की महत्वपूर्ण बैठक ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया कि क्षेत्रीय राजनीति में अपनी जमीन तलाशने के लिए दल अब अधिक आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद सिंह असगोला, प्रदेश संगठन मंत्री भुवन विष्ट, दीपक ढोड़ीयाल, कांति भाकुनी, जानकी जोशी, बबीता बोरा, दिनेश भट्ट, दीपक चराया, जिला अध्यक्ष जीवन सिंह नेगी, राहुल कांडपाल, सुरेंद्र सिंह चिलवाल, राहुल पांडे, मनोज सिंह, त्रिभुवन सिंह कार्की, धीरज सिंह बिष्ट, सतपाल रावत, दान सिंह, ललित मोहन जोशी, भानु प्रताप सिंह मेहरा, सुनील राजपूत, रोशन बिष्ट सहित कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आनंद सिंह असगोला उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक ढोड़ीयाल, भुवन विष्ट, दिनेश भट्ट, दीपक चराया और रोशन बिष्ट ने सहभागिता की। इसके अलावा राजेन्द्र बिष्ट, दिनेश बिष्ट, वैभव मंदोलिया, मनीष राणा, गौरव और योगेश जोशी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
बैठक का एक महत्वपूर्ण और चर्चा का केंद्र बना क्षण वह रहा जब दीपक ढोड़ीयाल ने माल्यार्पण सम्मान को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उत्तराखंड क्रांति दल की सरकार नहीं बन जाती, तब तक वह इस प्रकार के सम्मान स्वीकार नहीं करेंगे। यह बयान न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि दल के भीतर बढ़ती राजनीतिक आकांक्षाओं का भी संकेत देता है।
जिला अध्यक्ष जीवन सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उत्तराखंड से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई। वक्ताओं ने राज्य में बढ़ते पलायन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और क्षेत्रीय असंतुलन जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि यदि यूकेडी को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित होना है, तो उसे जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक सशक्त बनाना होगा।
बैठक में संगठन विस्तार को लेकर स्पष्ट रणनीति पर भी विचार किया गया। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सदस्यता अभियान को तेज करने, युवा वर्ग को जोड़ने और गांव-गांव तक दल की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। नेताओं ने कहा कि अब समय केवल बैठकों का नहीं, बल्कि सक्रिय जनसंवाद और संघर्ष का है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड क्रांति दल अपने अस्तित्व की लड़ाई को नए संकल्प के साथ लड़ने की तैयारी में है। दीपक ढोड़ीयाल का माल्यार्पण ठुकराना जहां एक प्रतीकात्मक संदेश है, वहीं संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति पर मंथन यह दर्शाता है कि यूकेडी अब केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी साधने की कोशिश में है।
