नवरात्रि की सप्तमी तिथि मां अंबे की सातवीं शक्ति को समर्पित है, जिसे मां कालरात्रि के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि देवी दुर्गा के मां कालरात्रि स्वरूप की आराधना करने से साधक को कभी बुरी शक्तियों परेशान नहीं कर पाती है और उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।

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मना जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। पूजा के बाद मां कालरात्रि की आरती जरूर करें, तभी आपकी पूजा संपन्न मानी जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं मां भगवती के सातवें स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए कौन सी आरती करनी चाहिए और उनका प्रिय भोग क्या है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

Maa Kalratri Ki Aarti: मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली माँ जिसे बचाबे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि मां तेरी जय॥

Maa Kalratri Ka Mantra: मां कालरात्रि का मंत्र

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥

Maa Kalratri Ka Bhog: मां कालरात्रि का प्रिय भोग

मान्यता है कि नवरात्रि की सप्तमी तिथि की पूजा के बाद मां कालरात्रि को गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए, गुड़ और गुड़ से बनी चीजें माता को बहुत प्रिय है। इसमें आप गुड़ और आटे से बना हलवा, गुड़ और आटे के गुलगुले, गुड़ और कदूद से बनी खीर, कद्दू और गुड़ के गुलगुले, गुड़ और ड्ऱॉय फ्रूट से बने लड्डू, गुड़ से बने मालपुए आदि चीजों को आप मां कालरात्रि के भोग में शामिल कर सकते हैं।


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