मना जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। पूजा के बाद मां कालरात्रि की आरती जरूर करें, तभी आपकी पूजा संपन्न मानी जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं मां भगवती के सातवें स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए कौन सी आरती करनी चाहिए और उनका प्रिय भोग क्या है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
Maa Kalratri Ki Aarti: मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली माँ जिसे बचाबे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि मां तेरी जय॥
Maa Kalratri Ka Mantra: मां कालरात्रि का मंत्र
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
Maa Kalratri Ka Bhog: मां कालरात्रि का प्रिय भोग
मान्यता है कि नवरात्रि की सप्तमी तिथि की पूजा के बाद मां कालरात्रि को गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए, गुड़ और गुड़ से बनी चीजें माता को बहुत प्रिय है। इसमें आप गुड़ और आटे से बना हलवा, गुड़ और आटे के गुलगुले, गुड़ और कदूद से बनी खीर, कद्दू और गुड़ के गुलगुले, गुड़ और ड्ऱॉय फ्रूट से बने लड्डू, गुड़ से बने मालपुए आदि चीजों को आप मां कालरात्रि के भोग में शामिल कर सकते हैं।
उनका रूप भले ही भयंकर हो, लेकिन वे अपने भक्तों को सदैव शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इन्हें शुभंकारी भी कहा जाता है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और सही भोग अर्पित करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो सकते हैं. आइए जानते हैं मां कालरात्रि को कौन सा भोग सबसे प्रिय है और कैसे करें उनकी पूजा.
कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप?
मां कालरात्रि का वर्ण श्याम (काला) होता है, उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में बिजली की माला सुशोभित रहती है. वे गधे पर सवार होती हैं. उनके चार हाथ होते हैं, एक में खड्ग, दूसरे में लोहे का कांटा और बाकी दो हाथ अभय व वर मुद्रा में होते हैं.
इस भोग से प्रसन्न होंगी मां, कटेगा हर कष्ट
शास्त्रों में हर देवी के लिए एक विशेष भोग बताया गया है. मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम भोग गुड़ माना गया है.सप्तमी के दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं. ऐसा माना जाता है कि भोग लगाने के बाद इस गुड़ का कुछ अंश दक्षिणा के साथ ब्राह्मण को दान करना चाहिए.मान्यता है कि गुड़ का भोग लगाने से व्यक्ति शोक, दरिद्रता और आकस्मिक आने वाले संकटों से बच जाता है. इससे शत्रुओं का नाश होता है और नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकल जाती है.
मां कालरात्रि की पूजा के लाभ
यदि आपको अज्ञात भय सताता है या बुरे सपने आते हैं, तो मां कालरात्रि की पूजा अमोघ फल देती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह को नियंत्रित करने के लिए मां कालरात्रि की पूजा सर्वोत्तम मानी जाती है. मां की कृपा से भक्त पर किसी भी प्रकार के टोने-टोटके या ऊपरी बाधा का असर नहीं होता.

