NBW पर गिरफ्तारी: पार्षद पति व भाजपा नेता सचिन मुंजाल को पुलिस ने दबोचा, चेक बाउंस मामले में सजा के बाद भी नहीं हो रहे थे पेश

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रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जनपद में कानून की अवहेलना करने वाले जनप्रतिनिधियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इसी क्रम में ट्रांजिट कैंप थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पार्षद पति एवं भाजपा नेता सचिन मुंजाल को न्यायालय द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के आधार पर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह कार्रवाई माननीय न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में की।
क्या है पूरा मामला

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


जानकारी के अनुसार, यह मामला फौजदारी वाद संख्या 22/97 वर्ष 2021 से संबंधित है, जिसमें वादी रमेश कुमार धींगड़ा ने सचिन मुंजाल के खिलाफ धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के तहत चेक बाउंस का मामला दर्ज कराया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने 27 फरवरी 2025 को अपना निर्णय सुनाया।
अदालत ने मामले में सचिन मुंजाल को दोषी पाते हुए 6 माह के साधारण कारावास और 70 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह फैसला उनके खिलाफ वित्तीय लेनदेन में अनियमितता और कानूनी दायित्वों की अनदेखी को लेकर आया था।
अपील के बाद भी नहीं हुए पेश
सजा के खिलाफ सचिन मुंजाल ने सत्र न्यायाधीश, ऊधमसिंह नगर की अदालत में फौजदारी अपील संख्या 86/25 दाखिल की थी। हालांकि, अपील दायर करने के बाद वह नियमित रूप से न्यायालय में पेश नहीं हो रहे थे। सुनवाई के दौरान उनकी लगातार गैरहाजिरी ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया।
न्यायालय ने कई बार उन्हें पेश होने का अवसर दिया, लेकिन बार-बार अनुपस्थित रहने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद ट्रांजिट कैंप थाना पुलिस हरकत में आई और सचिन मुंजाल की तलाश शुरू की। पुलिस टीम ने सक्रियता दिखाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया और नियमानुसार माननीय न्यायालय में पेश किया।
राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां विपक्ष इसे भाजपा की अंदरूनी अनुशासनहीनता से जोड़कर देख रहा है, वहीं भाजपा समर्थक इसे व्यक्तिगत मामला बताकर संगठन से अलग रखने की बात कह रहे हैं।
कानून से ऊपर कोई नहीं
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह स्पष्ट करता है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति—चाहे वह राजनीतिक पद पर ही क्यों न हो—विशेषाधिकार नहीं रखता। न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने पर कार्रवाई तय है।


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