

“गदा राजनीति: रुद्रपुर में ‘हनुमानी हथियार’ से 2027 की जंग, पूर्व–वर्तमान विधायक आमने-सामने!”
रुद्रपुर। राजनीति में जहां कभी फूल-मालाओं से स्वागत होता था, अब वहां “गदा कूटनीति” ने एंट्री मार ली है। जी हां, रुद्रपुर की सियासत में इन दिनों गदा सिर्फ भगवान हनुमान जी की शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि नेताओं की “भक्ति और शक्ति प्रदर्शन” का नया ट्रेंड बन गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
हाल ही में भाजपा विधायक शिव अरोड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को गदा भेंट कर अपनी निष्ठा का परिचय दिया। उधर, कांग्रेस के स्वागत समारोह में प्रभारी कुमारी शैलजा के आगमन पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भी बिल्कुल “सेम टू सेम” गदा भेंट कर दी।
गदा राजनीति: रुद्रपुर में ‘हनुमानी संकेत’, 2027 की जंग कांटे की टक्कर!
रुद्रपुर की सियासत में इस बार प्रतीकों ने गहरा संदेश दिया है। वर्तमान और पूर्व विधायक—दोनों द्वारा ‘गदा’ भेंट करना केवल परंपरा का निर्वाह नहीं माना जा रहा, इसे आध्यात्मिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय संस्कृति में गदा शक्ति, पराक्रम और धर्मयुद्ध का प्रतीक है, जो सीधे तौर पर भगवान हनुमान की ऊर्जा से जुड़ा हुआ माना जाता है।
जब दोनों नेता एक ही प्रतीक को अपनाते हैं, तो यह संकेत देता है कि उनके आत्मबल, राजनीतिक ऊर्जा और जनाधार में समानता दिखाई दे रही है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी समान प्रतीकों का चयन ऊर्जा संतुलन को दर्शाता है, जिससे मुकाबला बराबरी का माना जाता है।
यदि किसी एक पक्ष ने कोई अलग प्रतीक चुना होता, तो परिस्थिति और संकेत अलग दिशा में जाते। गदा का समान चयन यह स्पष्ट करता है कि 2027 का चुनाव कांटे की टक्कर वाला होगा, जिसमें जीत-हार का अंतर बेहद सूक्ष्म रह सकता है।
अब दिलचस्प बात ये है कि दोनों गदाएं एक ही कारीगर की बनाई बताई जा रही हैं—यानि “आस्था भी कॉमन, सप्लायर भी कॉमन, बस आका अलग-अलग!”
गदा में छिपा 2027 का संदेश!
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये गदा सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव का “ट्रेलर” है।
एक तरफ वर्तमान विधायक गदा से “सत्ता की रक्षा” का संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व विधायक उसी गदा से “वापसी का वार” करने की तैयारी में दिख रहे हैं।
कहा जा रहा है कि—
गदा = शक्ति
शक्ति = संगठन
और संगठन = 2027 का टिकट
यानि गदा अब सिर्फ हाथ में नहीं, रणनीति में भी घूम रही है।
आध्यात्मिकता या सियासी स्टंट?
धार्मिक दृष्टि से गदा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लेकिन रुद्रपुर में ये सवाल उठ रहा है कि— “यह गदा किस बुराई के खिलाफ उठेगी—विपक्ष या विरोधी गुट?”
कुछ लोग इसे “हनुमान भक्ति” बता रहे हैं, तो कुछ इसे “हनुमान मार्केटिंग” कहकर मुस्कुरा रहे हैं।
जनता भी ले रही मजे
स्थानीय लोग अब चुटकी ले रहे हैं— “अगली बार चुनाव चिन्ह ही गदा कर दो, कम से कम पहचान तो आसान होगी!”
तो वहीं कुछ बुजुर्गों का कहना है— “पहले नेता काम दिखाते थे, अब गदा दिखाते हैं!”
निष्कर्ष: गदा नहीं, गजब की राजनीति!
रुद्रपुर की सियासत में गदा अब सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं रही, बल्कि “प्रभाव, प्रदर्शन और प्रचार” का नया हथियार बन चुकी है।
अब देखना ये है कि 2027 में ये गदा किसके हाथ में विजय दिलाएगी—
वर्तमान विधायक की “सत्ता रक्षा” या पूर्व विधायक की “वापसी की प्रहार शक्ति”।
फिलहाल तो जनता यही कह रही है—
“नेता जी, गदा कम घुमाइए… काम ज्यादा दिखाइए!”




