

रुद्रपुर/देहरादून।उत्तराखंड की निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का एक सशक्त स्तंभ आज हमारे बीच नहीं रहा। वरिष्ठ पत्रकार भास्कर पोखरियाल का आज एम्स अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने मीडिया जगत ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी गहरी शोक की लहर दौड़ा दी है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
भास्कर पोखरियाल केवल एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि वह एक विचार थे—एक ऐसी आवाज, जो जल, जंगल और जमीन जैसे जनसरोकार के मुद्दों पर बिना किसी भय के उठती थी। उन्होंने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन में अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया और वर्तमान में दैनिक भास्कर से जुड़े हुए थे।
उनकी लेखनी की धार इतनी पैनी थी कि जब भी किसी भ्रष्टाचार, घोटाले या जनहित के मुद्दे पर उनकी कलम चलती थी, तो नौकरशाही से लेकर सत्ता के शीर्ष तक बैठे लोगों की कुर्सियां हिल जाती थीं। अक्सर यह चर्चा आम हो जाती थी कि “यह खबर जरूर भास्कर पोखरियाल की कलम से निकली होगी।” उनकी खबरें केवल सूचना नहीं देती थीं, बल्कि व्यवस्था को झकझोर देने की ताकत रखती थीं।
भास्कर पोखरियाल का व्यक्तित्व जितना मुखर और प्रखर था, उतना ही वह भीतर से आध्यात्मिक भी थे। अध्यात्म में उनकी गहरी आस्था थी, जो उनकी सोच और लेखनी दोनों में झलकती थी। उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण पत्रकारिता और समाज के प्रति समर्पित कर दिया।
आज जब वह हमारे बीच नहीं हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि पत्रकारिता के एक साहसी अध्याय का अंत है। उनके जाने से जो शून्य उत्पन्न हुआ है, उसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।
श्रद्धांजलि एवं मांग
उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों, पत्रकार संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भास्कर पोखरियाल की निर्भीकता और ईमानदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगी।
इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि स्वर्गीय भास्कर पोखरियाल के परिजनों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जाए और उन्हें समुचित सहायता प्रदान की जाए। परिषद का कहना है कि यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष अवतार सिंह विष्ट ने शोक व्यक्त करते हुए पत्र जारी कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से स्वर्गीय भास्कर पोखरियाल के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पोखरियाल ने जीवनभर जनसरोकार की पत्रकारिता कर समाज और प्रदेश की सेवा की, इसलिए सरकार का दायित्व बनता है कि उनके परिजनों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जाए। परिषद ने उम्मीद जताई है कि उत्तराखंड सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करेगी।
2017 के संपादकीय की झलक (सार)
वर्ष 2017 में लिखे गए अपने एक चर्चित संपादकीय में भास्कर पोखरियाल ने साफ शब्दों में लिखा था कि “जब तक पत्रकार सत्ता से सवाल पूछना नहीं छोड़ेगा, तब तक लोकतंत्र जीवित रहेगा। लेकिन जिस दिन पत्रकारिता समझौते की शिकार हो गई, उस दिन आम जनता की आवाज भी दम तोड़ देगी।”
आज उनके इस विचार की प्रासंगिकता और भी अधिक महसूस होती है।
अंतिम शब्द
भास्कर पोखरियाल का जाना एक ऐसी क्षति है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। उनकी कलम भले ही आज थम गई हो, लेकिन उनके विचार, उनके सिद्धांत और उनकी निर्भीक पत्रकारिता हमेशा जीवित रहेगी।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल दें।




