

स्थानीय खुफिया इकाई व जांच अधिकारी इन संदिग्धों से ठोस इनपुट का इंतजार कर रहे हैं।

इसके लिए पुलिस ने पांच युवतियों व तीन युवकों के मोबाइल इलेक्ट्रानिक सर्विलांस में लगाए गए हैं। यह सभी पुलिस की रडार पर हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
कुछ संदिग्ध शामिल
मदरसन कंपनी में हुए हंगामे के बाद पुलिस ने दावा किया है कि इसमें कुछ संदिग्ध लोग शामिल थे। जो नोएडा हिंसा के सूत्रधार हैं और वहीं से आपरेट हो रहे थे। यह संदिग्ध नेपाल के जेन-जी आंदोलन के बाद नोएडा में श्रमिकों के उपद्रव से काफी प्रेरित हैं। इन संदिग्धों ने ही श्रमिकों को उग्र आंदोलन के लिए उकसाया है।
बीते दिन पहले एसएसपी मंजुनाथ टीसी का कहना था कि इन संदिग्धों की कुंडली खंगालने के लिए टीमें जुट गई हैं। जो इंटरनेट मीडिया अकाउंट में नजरें बनाए हुए हैं। इन संदिग्धों ने ही श्रमिकों को हंगामा करने के लिए बरगलाया था।
एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि संदिग्धों के साथ ही जिन अज्ञातों पर प्राथमिकी दर्ज है। वह सभी पुलिस रडार पर हैं। संदिग्धों के मामले की जांच चल रही है, इसके लिए बकायदा एक जांच अधिकारी नियुक्ति किया है। इन संदिग्धों से ठोस इनपुट जुटाने के लिए इनके मोबाइल फोन सर्विलांस में लगाए गए हैं।कुछ ठोस जानकारी हासिल करने के बाद ही पुलिस इनपर कार्रवाई करते हुए इनके नाम सार्वजनिक करेगी।
मदरसन कंपनी हंगामे के बाद पुलिस द्वारा पांच युवतियों और तीन युवकों के मोबाइल सर्विलांस पर लगाने तथा उन्हें “संदिग्ध” बताने की कार्रवाई कई सवाल खड़े कर रही है। सिडकुल पंतनगर समेत उत्तराखंड की अनेक कंपनियों में लंबे समय से श्रमिक अधिकारों के हनन, कम वेतन, ठेका प्रथा, शोषण और खराब कार्य परिस्थितियों की शिकायतें उठती रही हैं। यदि मजदूर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करते हैं तो क्या उन्हें बाहरी तत्व या संदिग्ध करार देना उचित है? असली जांच यह होनी चाहिए कि आखिर श्रमिक आक्रोश की जड़ क्या है और कंपनियों में श्रम कानूनों का कितना पालन हो रहा है।




