अवैध खनन में 2 करोड़ वसूली के आरोप: सियासत गरम, सच्चाई की दरकार

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रुद्रपुर की सियासत एक बार फिर आरोप–प्रत्यारोप के दलदल में फंसती नजर आ रही है। विकास सागर पर अवैध खनन से जुड़े डंपरों से 2 करोड़ रुपये की कथित वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


विकास सागर, जो स्थानीय विधायक एवं मीना शर्मा के समर्थक माने जाते हैं तथा पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के विरोधी खेमे से जुड़े हैं, ने प्रेस वार्ता कर इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह सब राजनीतिक साजिश के तहत उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास है।
लेकिन सवाल यह है कि यदि आरोप निराधार हैं, तो अवैध खनन और उससे जुड़ी उगाही की शिकायतें बार-बार सामने क्यों आती हैं? क्या प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष है या कहीं न कहीं राजनीतिक संरक्षण इस पूरे खेल को बढ़ावा दे रहा है?

अवैध खनन, वसूली और पुलिस निष्क्रियता पर उठे सवाल, पीड़ित ने की न्याय की मांग
रुद्रपुर/उधमसिंह नगर। जनपद में अवैध खनन, ओवरलोडेड डम्परों के संचालन और कथित अवैध वसूली का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। जाफरपुर निवासी डम्पर चालक रामसिंह ने आरोप लगाया है कि 16 अप्रैल 2026 को कोतवाली रुद्रपुर में दी गई लिखित तहरीर के बावजूद दो सप्ताह बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित का कहना है कि कथित रूप से विकास सागर और उसके सहयोगियों द्वारा डम्पर चालकों से अवैध धन वसूली की जा रही है, जिससे वह मानसिक प्रताड़ना और तनाव में जीवन जीने को मजबूर है।
मामले को और संवेदनशील बनाते हुए पीड़ित ने पूर्व में कुंडा थाना क्षेत्र में सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण का भी जिक्र किया, जिसमें पुलिस पर सहयोग न देने के आरोप लगे थे। अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन फिर किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है।
पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वह जनहित में धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होगा।


जरूरत इस बात की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। केवल प्रेस वार्ता से आरोपों का खंडन पर्याप्त नहीं, बल्कि ठोस प्रमाण और पारदर्शी जांच ही विश्वास बहाल कर सकती है। वरना, यह प्रकरण भी राजनीतिक शोर-शराबे में दबकर रह जाएगा और असली मुद्दा—अवैध खनन—ज्यों का त्यों चलता रहेगा।

संपादकीय | सवालों के घेरे में सिस्टम, जवाबदेही कब?अवैध खनन और कथित वसूली के ताज़ा आरोपों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उत्तराखंड में संसाधनों की लूट का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स मानता है कि यह केवल आरोप–प्रत्यारोप का मामला नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा है।
जब बार-बार डंपरों से अवैध उगाही और राजनीतिक संरक्षण की बातें सामने आती हैं, तो यह महज़ संयोग नहीं हो सकता। संबंधित पक्षों द्वारा प्रेस वार्ता कर सफाई देना एक पक्ष है, लेकिन जनता अब ठोस कार्रवाई और पारदर्शी जांच चाहती है।
यदि सरकार और प्रशासन इस मामले में निष्पक्षता नहीं दिखाते, तो यह संदेश जाएगा कि प्रभावशाली लोगों के लिए अलग नियम हैं। ऐसे में जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
समय की मांग है कि सच्चाई को सामने लाया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो—वरना “जीरो टॉलरेंस” के दावे खोखले साबित होंगे।


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