ईरान ने ठीक इसी वक्त एक ऐसा ‘विस्फोटक’ दांव चल दिया है जिसने ड्रैगन की नींद उड़ा दी है. ईरान ने रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ की परिभाषा बदलकर पूरी दुनिया को हिला दिया है. तेहरान का ये कदम न केवल तेल के बाजार में आग लगाने वाला है, बल्कि इसने जिनपिंग के लिए स्वागत की मेज पर एक नई मुसीबत परोस दी है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
ईरान का नया ‘चोकपॉइंट’ प्लान
ईरान ने एक झटके में उस समुद्री रास्ते का दायरा बढ़ा दिया है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधिकारी मोहम्मद अकबरजादा ने ऐलान किया है कि अब होर्मुज जलडमरूमध्य केवल कुछ द्वीपों तक सीमित नहीं रहेगा. अब इसका विस्तार दक्षिण-पूर्वी ईरान के जास्क तट से लेकर ग्रेटर टुनब द्वीप तक होगा.
जास्क असल में फारस की खाड़ी के बाहर ओमान की खाड़ी में है. इसका मतलब यह है कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय पानी को अपनी जागीर बताते हुए अपने ‘ऑपरेशनल जोन’ को सैकड़ों मील आगे बढ़ा दिया है. अब जो भी टैंकर वहां से गुजरेगा, उसे ईरान की बंदूकों की नोक से होकर गुजरना होगा.
जिनपिंग को क्यों हो रही टेंशन?
अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही ईरान की जंग ने पहले ही इस रास्ते को ‘किलर जोन’ बना दिया है. तेल टैंकर अब इस रास्ते पर जाने से डर रहे हैं. जहाजों को अब अरब प्रायद्वीप का पूरा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है.
बीजिंग अपनी जरूरत का 12% तेल अकेले ईरान से लेता है. तेल की सप्लाई रुकने का मतलब है चीन की फैक्ट्रियों में ताला लग जाना.
यही वजह है कि शी जिनपिंग इस वक्त जबरदस्त दबाव में हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे ट्रंप का स्वागत करें या ईरान की इस नई ‘सिरदर्दी’ से निपटें.
ट्रंप के स्वागत में ‘कांटे’ बिछाए!
ईरान ने इस घोषणा के लिए उस वक्त को चुना जब ट्रंप हवा में थे और बीजिंग पहुंचने वाले थे. ये एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल है. ईरान किसी समिट के नतीजों का इंतजार नहीं करेगा. चीन अब हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकता, उसे ईरान के लिए ट्रंप से डील करनी ही होगी.
क्या दुनिया में आने वाला है ‘ तेल ब्लैकआउट’?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की ये केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि युद्ध की सीधी तैयारी है. तेहरान ने साफ कह दिया है कि वो अपने पानी में किसी का भी दखल बर्दाश्त नहीं करेगा. अगर ट्रंप और जिनपिंग की बातचीत में ईरान को मनमाफिक रियायतें नहीं मिलीं तो ईरान इस ‘चोकपॉइंट’ का गला पूरी तरह घोंट सकता है.

