आजकल सोशल मीडिया और विभिन्न वेबसाइटों पर कीड़ा जड़ी (यार्सागुम्बा) को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। कहीं इसे शिलाजीत से हजार गुना ताकतवर बताया जाता है तो कहीं इसे “हिमालयन वियाग्रा” कहकर प्रचारित किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में इसके प्रभाव उतने ही चमत्कारी हैं जितने बताए जाते हैं?
वर्ष 2006 के आसपास मेरे मित्र नवनीत नारंग द्वारा मार्केटिंग के उद्देश्य से कीड़ा जड़ी का एक नमूना मेरे कार्यालय में रखा गया था। उस समय इसे लेकर काफी चर्चाएं थीं और कई लोगों को इसका सैंपल भी दिखाया गया। बाद में जब इसकी मार्केटिंग का कोई विशेष परिणाम नहीं निकला, तब मैंने स्वयं लगभग 100 ग्राम कीड़ा जड़ी को दूध में उबालकर दो दिनों में सेवन किया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
मेरे व्यक्तिगत अनुभव में इसके सेवन से न तो कोई आश्चर्यजनक शारीरिक परिवर्तन दिखाई दिया और न ही किसी प्रकार का विशेष प्रभाव महसूस हुआ। साथ ही कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हुआ। इस अनुभव के बाद मुझे लगा कि इसके बारे में किए जाने वाले अधिकांश दावे वास्तविकता से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए जाते हैं।
यह सही है कि कीड़ा जड़ी हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक दुर्लभ जैविक संरचना है और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका उल्लेख मिलता है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके कुछ संभावित लाभों पर शोध भी हुआ है, लेकिन इसे किसी चमत्कारी औषधि, यौन शक्ति बढ़ाने वाली गारंटीशुदा दवा या कैंसर की अचूक दवा बताना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है।
आज स्थिति यह है कि कीड़ा जड़ी लाखों रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रही है। इसकी दुर्लभता, सीमित उपलब्धता और भारी प्रचार-प्रसार ने इसकी कीमतों को असाधारण रूप से बढ़ा दिया है। लेकिन केवल महंगी कीमत किसी वस्तु की प्रभावशीलता का प्रमाण नहीं होती।
जनता को चाहिए कि वे सोशल मीडिया के वायरल दावों और चमत्कारी इलाज के विज्ञापनों से सावधान रहें। किसी भी जड़ी-बूटी या सप्लीमेंट को उपयोग करने से पहले वैज्ञानिक प्रमाणों, चिकित्सकीय सलाह और विश्वसनीय जानकारी पर भरोसा करें। स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली ही सबसे प्रभावी और प्रमाणित उपाय हैं।
— अवतार सिंह बिष्ट
यह लेख कीड़ा जड़ी के बारे में किए जाने वाले अतिरंजित दावों पर सवाल उठाता है और लोगों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
Writing
सोशल मीडिया पर कीड़ा जड़ी को लेकर ऐसे दावे किए जाते हैं मानो यही वह जड़ी हो जिससे वियाग्रा जैसी शक्तिशाली दवाएं बनाई जाती हैं और इसके सेवन से चमत्कारी ताकत मिल जाती है। जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है। वियाग्रा का सक्रिय तत्व वैज्ञानिक शोध और आधुनिक दवा निर्माण प्रक्रिया से विकसित किया गया है, न कि सीधे कीड़ा जड़ी से। कीड़ा जड़ी के बारे में वायरल होने वाले अधिकांश दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं। लोग सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर इसे महंगे दामों पर खरीद लेते हैं, जबकि इसके चमत्कारी लाभों के ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
