पुराने जमाने में खजाने अक्सर जमीन के नीचे बने कमरों, खंडहर, पुरानी इमारत या फिर गुप्त सुरंग में छिपाए जाते थे. ये जगह आमतौर पर सालों तक बंद और शांत रहती थी. इस वजह से वहां ठंडा, अंधेरा और सुरक्षित माहौल बन जाता था और यह सब सांपों को काफी पसंद होता है.

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पुराने खंडहर और जमीन के नीचे की जगह अक्सर चूहों, छिपकलियों और कीड़े मकोड़ों का घर बन जाती हैं. क्योंकि चूहे सांपों के भोजन का मुख्य स्रोत हैं इस वजह से वह शिकार की तलाश में स्वाभाविक रूप से ऐसी जगह की तरफ खिंचे चले आते हैं.


सांप ठंडे खून वाले जानवर होते हैं. इसका मतलब है कि वह अपने शरीर के तापमान को अपने आप कंट्रोल नहीं कर सकते. काफी ज्यादा गर्मी या फिर ठंड के मौसम में वह अपने शरीर का सही तापमान बनाए रखने के लिए जमीन के नीचे बनी सुरंग, बिल या फिर गुप्त कमरों में चले जाते हैं.



वैज्ञानिक साफ तौर पर रहते हैं कि सांप सोने, चांदी या फिर छिपी हुई दौलत की तरफ आकर्षित नहीं होते. दबे हुए खजाने के पास उनकी मौजूदगी सिर्फ एक इत्तेफाक होती है और यह उनके रहने की जगह और भोजन की उपलब्धता से जुड़ी होती है.




भारतीय पौराणिक कथाओं में सांप देवताओं या फिर नाग को अक्सर छिपी हुई दौलत का रक्षक बताया जाता है. समय के साथ कहानी, लोक कथा, फिल्म और उपन्यासों ने इस विश्वास को और भी मजबूत किया है.


इतिहासकार कहते हैं कि राजा और अमीर लोग कभी-कभी चोरों को खजाने के पास आने से रोकने के लिए खजाने के पास खतरनाक सांपों के होने की अफवाह फैलाते थे. कुछ मामलों में सुरक्षा के लिए गुप्त जगह के आसपास जानबूझकर भी जहरीले सांप छोड़े जाते थे.


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