रुद्रपुर। किसी भी शहर का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से तय नहीं होता, बल्कि उस शहर के लोगों, विशेषकर युवाओं की सोच, सपनों और भागीदारी से तय होता है। यही सोच लेकर रुद्रपुर नगर निगम और महापौर विकास शर्मा ने “नई सोच नया रुद्रपुर युवा संवाद-2026” का आयोजन किया, जिसने शहर के विकास को लेकर एक नई बहस और नई उम्मीद को जन्म दिया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि युवाओं और नेतृत्व के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक ऐसा मंच बना, जहां भविष्य के रुद्रपुर की तस्वीर युवाओं ने स्वयं प्रस्तुत की।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
रुद्रपुर के एक होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया और शहर के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुलकर अपने विचार रखे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, यातायात, पर्यावरण, डिजिटल सुविधाएं, महिला सुरक्षा, खेल, मानसिक स्वास्थ्य और शहरी विकास जैसे विषयों पर युवाओं ने न केवल समस्याओं को सामने रखा बल्कि उनके समाधान भी सुझाए।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब देशभर में युवाओं की भागीदारी को लोकतांत्रिक और विकासात्मक प्रक्रियाओं में बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। रुद्रपुर में इससे पहले भी विकास योजनाओं और शहर के बुनियादी ढांचे को लेकर कई पहलें सामने आई हैं तथा नगर के विकास के लिए बड़ी परियोजनाओं की घोषणाएं की जा चुकी हैं। �
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युवाओं को मिला अपनी बात कहने का मंच
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि यहां युवाओं को केवल श्रोता बनाकर नहीं बुलाया गया था। उन्हें शहर के विकास का सहभागी बनाया गया। मंच पर आने वाले प्रत्येक युवा को अपने विचार रखने का अवसर मिला।
महापौर विकास शर्मा ने उद्घाटन सत्र में कहा कि युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि शहर को स्मार्ट, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है तो युवाओं की भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि नगर निगम युवाओं के सुझावों को गंभीरता से लेगा और जो सुझाव व्यवहारिक एवं जनहित में होंगे उन्हें योजनाओं में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
“अगर मैं मेयर होता” सत्र ने खींचा सबका ध्यान
कार्यक्रम का सबसे चर्चित सत्र “अगर मैं मेयर होता” रहा। इस सत्र में युवाओं ने खुद को महापौर की भूमिका में रखकर बताया कि वे शहर के लिए क्या करना चाहेंगे।
कई युवाओं ने कहा कि स्मार्ट सिटी की शुरुआत स्वच्छता और वेस्ट मैनेजमेंट से होनी चाहिए। उनका मानना था कि रुद्रपुर की बढ़ती आबादी के साथ कचरा प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ रही है। यदि समय रहते आधुनिक कचरा निस्तारण प्रणाली विकसित नहीं की गई तो भविष्य में यह गंभीर समस्या बन सकती है।
युवाओं ने शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली कल्याणी नदी के पुनर्जीवन पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि नदी का संरक्षण केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान और जल प्रबंधन से भी जुड़ा हुआ विषय है।
डिजिटल रुद्रपुर का सपना
जेनरेशन-ज़ेड की सोच कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। अधिकांश युवाओं ने डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि नगर निगम एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करे जहां नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकें और उनके समाधान की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकें।
युवाओं ने “सिटी डिजिटल डैशबोर्ड” की अवधारणा भी रखी जिसमें शहर की सफाई, यातायात, जल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग और सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित आंकड़े रियल टाइम में उपलब्ध हों।
कुछ युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की भी वकालत की।
शिक्षा को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि रुद्रपुर के युवाओं के लिए शिक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है।
युवाओं का कहना था कि इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को देहरादून, हल्द्वानी, दिल्ली या अन्य शहरों की ओर जाना पड़ता है। इससे आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की चुनौतियां पैदा होती हैं।
उन्होंने शहर में गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और प्रोफेशनल कॉलेज स्थापित करने की मांग रखी।
युवाओं ने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर डिजिटल शिक्षा, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग और स्किल डेवलपमेंट जैसे विषयों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस
रुद्रपुर औद्योगिक नगरी के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन युवाओं का मानना है कि स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्होंने स्किल डेवलपमेंट सेंटर, रोजगार मार्गदर्शन केंद्र और स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया।
महापौर विकास शर्मा ने बताया कि युवतियों के लिए निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने हेतु तीन करोड़ रुपये के स्किल प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जा चुका है। यह पहल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी हुई गंभीर चर्चा
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि यहां केवल बुनियादी सुविधाओं की बात नहीं हुई बल्कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय भी उठाए गए।
एक छात्रा ने कहा कि प्रतियोगी माहौल, सोशल मीडिया का दबाव और भविष्य की अनिश्चितताएं युवाओं को मानसिक तनाव की ओर धकेल रही हैं।
उसने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलिंग व्यवस्था विकसित की जाए तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
इस सुझाव को उपस्थित लोगों ने काफी सराहा।
महिलाओं की सुरक्षा पर जोर
महिला प्रतिभागियों ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि शहर की प्रत्येक गली और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए। साथ ही महिलाओं के लिए हेल्पलाइन और त्वरित सहायता प्रणाली को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
युवाओं का मानना था कि सुरक्षित वातावरण ही महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में आगे बढ़ने का अवसर देगा।
ट्रैफिक और जाम बना प्रमुख मुद्दा
रुद्रपुर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यातायात व्यवस्था है। कार्यक्रम में युवाओं ने इसे प्रमुख समस्या बताया।
मनीष सिन्हा सहित कई युवाओं ने सुझाव दिया कि ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित किया जाए, उनके लिए निश्चित रूट तय किए जाएं और भारी वाहनों के शहर में प्रवेश का समय निर्धारित किया जाए।
युवाओं ने ट्रैफिक लाइट व्यवस्था मजबूत करने, फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने और पार्किंग सुविधाएं विकसित करने की मांग भी रखी।
उन्होंने कहा कि यदि अभी से ट्रैफिक प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और जटिल हो सकती है।
पर्यावरण संरक्षण की नई सोच
रुद्रपुर के युवा पर्यावरण के प्रति भी गंभीर दिखाई दिए।
आरुषी अरोरा ने जापान की प्रसिद्ध मियावाकी तकनीक के माध्यम से घने शहरी जंगल विकसित करने का सुझाव दिया।
युवाओं ने बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में ठोस प्रयासों की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच पर्यावरण संरक्षण को विकास के साथ जोड़ना होगा।
कल्याणी नदी को बचाने की मुहिम
कल्याणी नदी का मुद्दा कार्यक्रम में बार-बार उठता रहा।
युवाओं का कहना था कि नदी केवल जल स्रोत नहीं बल्कि शहर की पहचान है। यदि इसका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर से वंचित हो जाएंगी।
महापौर विकास शर्मा ने बताया कि नदी के पुनर्जीवन के लिए नमामि गंगे योजना के तहत लगभग 300 करोड़ रुपये की परियोजना केंद्र सरकार को भेजी गई है। साथ ही सिडकुल एसटीपी प्लांट का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, जिससे दूषित जल को नदी में जाने से रोका जा सकेगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग
कार्यक्रम में युवाओं ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।
महापौर ने बताया कि नगर निगम द्वारा आठ आरोग्य स्वास्थ्य केंद्र शुरू किए जा चुके हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
खेल और युवा प्रतिभा का विकास
युवाओं ने शहर में निःशुल्क स्पोर्ट्स एकेडमी और आधुनिक खेल सुविधाओं की मांग रखी।
महापौर ने जानकारी दी कि किच्छा रोड पर लगभग आठ एकड़ भूमि में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
यदि यह परियोजना साकार होती है तो रुद्रपुर के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकेंगी।
लाइव पोल ने बताया युवाओं की प्राथमिकता
कार्यक्रम के दौरान आयोजित लाइव पोल में युवाओं से पूछा गया कि आने वाले पांच वर्षों में शहर की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए।
अधिकांश युवाओं ने शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
इससे स्पष्ट हुआ कि युवा केवल आधारभूत सुविधाएं ही नहीं बल्कि अपने भविष्य को लेकर भी गंभीर हैं।
विशेषज्ञों ने भी साझा किए विचार
पैनल चर्चा में आईएएस शांभवी तिवारी, आईपीएस जितेन्द्र चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता विपुल शर्मा और भाजपा नेता विवेकदीप सिंह ने भी अपने विचार रखे।
शांभवी तिवारी ने कहा कि तकनीक और सुशासन के माध्यम से ही स्मार्ट सिटी का सपना साकार हो सकता है।
आईपीएस जितेन्द्र चौधरी ने युवाओं से स्वयं नियमों का पालन करने और दूसरों को प्रेरित करने की अपील की।
विपुल शर्मा ने कहा कि युवाओं को नौकरी मांगने के साथ रोजगार देने वाला बनने की सोच भी विकसित करनी होगी।
नई राजनीति और नई भागीदारी का संकेत
“नई सोच नया रुद्रपुर युवा संवाद-2026” केवल एक नगर स्तरीय कार्यक्रम नहीं था। यह बदलते भारत में उभरती नई राजनीतिक और सामाजिक संस्कृति का संकेत भी था।
आज का युवा केवल दर्शक नहीं रहना चाहता। वह निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहता है। वह चाहता है कि उसकी बात सुनी जाए और उसकी राय को महत्व मिले।
रुद्रपुर में हुआ यह संवाद इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
भविष्य के लिए एक मॉडल
यदि कार्यक्रम में आए सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाता है और युवाओं की स्थायी सलाहकार समिति बनाई जाती है तो यह मॉडल अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
शहरों का विकास तब अधिक प्रभावी होता है जब उसमें नागरिकों की भागीदारी हो और युवा उसके केंद्र में हों।
रुद्रपुर में शुरू हुई यह पहल इसी विचार को मजबूत करती है कि विकास केवल भवनों और सड़कों का निर्माण नहीं है, बल्कि लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को साकार करने की प्रक्रिया भी है।
“नई सोच नया रुद्रपुर युवा संवाद-2026” ने यह साबित कर दिया कि युवा केवल समस्याओं की चर्चा नहीं करते, बल्कि समाधान भी प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, खेल, तकनीक और सुशासन जैसे विषयों पर परिपक्व सोच का परिचय दिया।
महापौर विकास शर्मा द्वारा युवाओं को शहर के विकास का सहभागी बनाने की यह पहल रुद्रपुर के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। यदि इन सुझावों को योजनाओं और नीतियों में स्थान मिलता है तो आने वाले वर्षों में रुद्रपुर वास्तव में एक आधुनिक, सुरक्षित, हरित और अवसरों से भरपूर शहर के रूप में उभर सकता है।
युवाओं की आवाज को विकास की दिशा बनाने का यह प्रयास न केवल रुद्रपुर बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन सकता है। रुद्रपुर के भविष्य का रोडमैप अब केवल सरकारी फाइलों में नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और विचारों में भी दिखाई देने लगा है।
