ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पूरे देश में इन दवाओं की भारी कमी देखी जा रही है और कई बड़े कैंसर अस्पतालों में मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
सरकार का ये कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दवाओं की कमी अब गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है. पिछले कई महीनों से दवा कंपनियां नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) से इन दवाओं की कीमतों में 75 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग कर रही थीं. उनका कहना था कि मौजूदा कीमतों पर उत्पादन करना घाटे का सौदा बन गया है.
क्यों अहम हैं ये दवाएं?
सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन भारत की राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) में शामिल हैं. यानी सरकार इन्हें पब्लिक हेल्थ सिस्टम के लिए बेहद जरूरी मानती है. फेफड़ों के कैंसर, सिर और गर्दन के कैंसर, ओवरी और सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ टेस्टिकुलर कैंसर के इलाज में इन दवाओं का व्यापक इस्तेमाल होता है.
