केंद्र सरकार ने अगले आर्मी चीफ के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. वर्तमान में वाइस आर्मी चीफ के रूप में कार्यरत वह 30 जून 2026 को भारत के 31वें आर्मी चीफ के रूप में कार्यभार संभालेंगे.

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लगभग चार दशकों की सैन्य सेवा के साथ लेफ्टिनेंट जनरल सेठ भारतीय सेना के लिए एक जरूरी समय पर कमान संभालेंगे. आइए जानते हैं कि उन्हें कितना वेतन दिया जाएगा.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।

नए आर्मी चीफ को कितना वेतन मिलेगा?

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को हर महीने ₹2,50,000 का निश्चित मूल वेतन दिया जाएगा. आर्मी चीफ का वेतन भारत सरकार के वेतन मैट्रिक्स के स्तर 18 के तहत निर्धारित किया जाता है. इसे आमतौर पर कैबिनेट सचिव ग्रेड के रूप में जाना जाता है. यह सरकारी अधिकारियों के लिए उपलब्ध उच्चतम वेतन स्तर है.

महंगाई भत्ता और अतिरिक्त लाभ

निर्धारित मूल वेतन के अलावा सेना प्रमुख महंगाई भत्ते के भी हकदार हैं. इसकी गणना मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में की जाती है और सरकार द्वारा समय समय पर संशोधित की जाती है. डीए को शामिल करने से मासिक पैकेज काफी बढ़ जाता है.

आवास और दूसरे भत्ते

आर्मी चीफ को या तो मकान किराया भत्ता या फिर पूरी तरह से सुसज्जित आधिकारिक आवास दिया जाता है. इसके अलावा इस पद पर कई सेवा संबंधी भत्ते दिए जाते हैं. इनमें सरकारी नियमों के मुताबिक खास कमांड संबंधित लाभ और मुफ्त राशन शामिल है.

आधिकारिक सुविधाएं

यह पद कई आधिकारिक विशेषाधिकारों और सुविधाओं के साथ आता है. इनमें एक विशाल सरकारी बंगला, एक समर्पित बुलेटप्रूफ वाहन, चालक सेवा, घरेलू कर्मचारी और कार्यालय के कामकाज के लिए जरूरी उच्च स्तरीय प्रशासनिक सहायता तक पहुंच शामिल है.

चिकित्सा लाभ और पेंशन

सेना प्रमुख पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना और दूसरे सैन्य स्वास्थ्य देखभाल नेटवर्क के जरिए से व्यापक चिकित्सा सुविधा के हकदार हैं. सेवानिवृत्ति के बाद अधिकारी सशस्त्र बलों के नियमों के तहत निर्धारित पेंशन और दूसरे सेवानिवृत्ति लाभों के लिए भी पात्र है.

स्वीकृत नियुक्ति के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल सेठ के 31 अगस्त 2028 तक सेना प्रमुख के रूप में काम करने की उम्मीद है. सेना प्रमुख का कार्यकाल आम तौर पर तीन साल या 62 साल की उम्र तक जो भी पहले हो, होता है.

वह 30 जून 2026 को वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे।

रक्षा मंत्रालय ने इस नियुक्ति की घोषणा करते हुए बताया कि भारत की राष्ट्रपति ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। वह 30 जून 2026 से जनरल के पद पर पदोन्नत होकर सेना प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे और उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक रहेगा।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर (बख्तरबंद कोर) से संबंधित अधिकारी हैं। वर्ष 1986 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें सेना में कमीशन मिला था। उनका सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है, जिसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमान और रणनीतिक जिम्मेदारियां निभाई हैं।

सेना प्रमुख बनने से पहले वह दक्षिणी कमान (Southern Command) के प्रमुख भी रह चुके हैं, जिसे भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण परिचालन कमानों में से एक माना जाता है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और भारत की पश्चिमी सीमा पर आयोजित महत्वपूर्ण त्रि-सेवा सैन्य अभ्यासों की निगरानी में भी अहम भूमिका निभाई थी।

अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने आर्मर्ड रेजिमेंट, आर्मर्ड ब्रिगेड, काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स और प्रतिष्ठित सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया है। वह दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) भी रह चुके हैं।

इसके अलावा उन्होंने फ्रांसअमेरिका और भारत के प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वह अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन का भी हिस्सा रह चुके हैं।

रक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली से जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्तमान में उप-सेनाप्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ आगामी 30 जून 2026 की दोपहर को देश के नए सैन्य प्रमुख के रूप में अपना पदभार ग्रहण करेंगे। वह वर्तमान थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे, जो उसी दिन अपनी गौरवशाली सैन्य सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

चार दशकों का बेदाग और शानदार सैन्य करियर तथा आर्मर्ड कोर का गौरव
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला के गौरवशाली पूर्व छात्र हैं और उन्हें दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित आर्मर्ड कोर में कमीशन दिया गया था। लगभग चार दशकों के अपने असाधारण और विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान उन्होंने परिचालन, रणनीतिक, कूटनीतिक और संगठनात्मक स्तरों पर व्यापक अनुभव हासिल किया है।

सैन्य इतिहास के दृष्टिकोण से यह नियुक्ति इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि साल 1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी की सेवानिवृत्ति के बाद लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ पहले ऐसे अधिकारी होंगे जो आर्मर्ड कोर से आकर थल सेनाध्यक्ष का सर्वोच्च पद संभालेंगे। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भी सेना में एडजुटेंट जनरल रह चुके हैं और बाद में उन्होंने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दी थीं।


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