पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से करीब एक करोड़ रुपये कीमत के 325 हाई-एंड मोबाइल फोन बरामद किए हैं.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह पिछले करीब एक साल से दिल्ली समेत कई राज्यों से चोरी हुए मोबाइलों को विदेश भेज रहा था.
200 अपराधियों की फाइलें खंगालीं,तब जाकर टूटी कड़ी
इस गिरोह तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं था. स्पेशल स्टाफ ने करीब 200 पुराने अपराधियों की फाइलें खंगालीं, सैकड़ों संदिग्धों की प्रोफाइल तैयार की और कई दिनों तक तकनीकी निगरानी, मुखबिर तंत्र और फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया. पुलिस ने चोरी के मोबाइलों की लोकेशन, डिजिटल रिकॉर्ड और कुरियर बुकिंग तक की गहन जांच की.
रोहिणी के फ्लैट में बना रखा था मोबाइल का गोदाम
जांच में सामने आया कि रोहिणी के अवंतिका इलाके में किराये का एक फ्लैट इस गिरोह का गोदाम बना हुआ था. यहां चोरी के मोबाइल जमा किए जाते थे, उनकी छंटाई होती थी. पैकिंग की जाती थी और फिर कुरियर के जरिए कोलकाता भेज दिया जाता था.
कुरियर की एक रसीद ने खोल दिया पूरा राज
19 जून को पुलिस ने राजा उर्फ राजू, करण और गोविंद को गिरफ्तार कर 101 मोबाइल बरामद किए. गोविंद की तलाशी के दौरान मिली एक कुरियर रसीद पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हुई. इससे पता चला कि करीब 200 चोरी के मोबाइल पहले ही कोलकाता भेजे जा चुके हैं. इसी सुराग के आधार पर पुलिस आगे बढ़ी और पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया.
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तीन चरणों में हुई दिल्ली पुलिस को बड़ी बरामदगी
पुलिस ने पहले 101, फिर 100 और उसके बाद 124 मोबाइल बरामद किए. इस तरह कुल 325 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए. जांच के दौरान अजय कुमार, अली खान, ऋषिकेश उर्फ डब्लू, संजीव कुमार और सनी उर्फ राहुल समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. दो कुरियर कंपनी से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी भी हुई, जिन पर चोरी के मोबाइल भेजने में मदद करने का आरोप हैं.
बांग्लादेश और नेपाल तक जाता था माल
पुलिस के मुताबिक, चोरी के मोबाइल पहले दिल्ली से कुरियर के जरिए कोलकाता भेजे जाते थे, वहां से मालदा और मुर्शिदाबाद के रास्ते बांग्लादेश पहुंचाए जाते थे. वहीं, एक दूसरा नेटवर्क उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल तक मोबाइल पहुंचाता था. जांच में बांग्लादेश के मोहम्मद शैदुल इस्लाम और शाहाबुद्दीन उर्फ शाहिद के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है.
एक साल में 10 से 12 हजार मोबाइल विदेश भेजने का शक
पुलिस का दावा है कि यह गिरोह पिछले करीब एक साल से सक्रिय था और इस दौरान 10 से 12 हजार चोरी के मोबाइल बांग्लादेश और नेपाल भेज चुका है. जांच एजेंसियां अब पुराने पार्सलों, अन्य आरोपियों और पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की तलाश में जुटी है.
150 मोबाइल पहले ही केसों से लिंक
अब तक बरामद 325 मोबाइलों में से करीब 150 मोबाइल दिल्ली में दर्ज चोरी, स्नैचिंग, लूट और सेंधमारी के मामलों से जोड़े जा चुके हैं. बाकी मोबाइलों का मिलान भी किया जा रहा है. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये मोबाइल उनके असली मालिकों को वापस सौंपे जाएंगे.
पुलिस की नजर अब पूरे नेटवर्क पर
पुलिस का कहना है कि मामला सिर्फ चोरी के मोबाइल खरीदने-बेचने का नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट का है. इसी वजह से संगठित अपराध से जुड़े प्रावधान भी लगाए गए हैं. अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, कुरियर चैनल और सीमा पार बैठे सरगनाओं की तलाश में जुटी हुई है.
