विकास की ‘रिवर्स गियर’ रफ्तार: जनता सड़कों के गड्ढों में, नेताजी फॉर्च्यूनर के एयरबैग में!””चमत्कारी 5 साल: उत्तराखंड भले न बना आत्मनिर्भर, पर हमारे माननीय हो गए ‘अरबपति’!””अद्भुत क्रोनोलॉजी: दो कमरों के आशियाने से शुरू हुआ सफर, आलीशान रिसॉर्ट पर जाकर रुका!””गिफ्ट डिप्लोमेसी: आकाओं को दिया सूटकेस और रिसॉर्ट का नजराना, रातों-रात मिल गया मंत्री पद का बहाना!””कागजी कानून और चमचमाते विज्ञापन: जनता ढूंढ रही बिजली-पानी, नेता मना रहे ‘कमाई’ का जश्न!”
रुद्रपुर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लगातार पांच वर्ष पूरे होने पर सरकार उत्सव के मूड में है। “सेवा सप्ताह” मनाया जाएगा, “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान चलेगा और उपलब्धियों की लंबी सूची जनता के सामने रखी जाएगी। पोस्टर लगेंगे, भाषण होंगे, सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आएगी।
उधर जनता भी तैयार है—फर्क सिर्फ इतना है कि सरकार उपलब्धियां गिनाएगी और जनता अपनी परेशानियां।
कहा जा रहा है कि इस बार विकास का प्रचार इतना व्यापक होगा कि यदि गड्ढों वाली सड़क पर भी पोस्टर लग जाए तो शायद राहगीरों को कुछ देर के लिए गड्ढे दिखाई ही न दें। बेरोजगार युवाओं से कहा जाएगा कि धैर्य रखें, क्योंकि उम्मीदों का भी अपना “सेवा सप्ताह” होता है।
सूत्र बताते हैं कि सरकार पांच साल की उपलब्धियों का ब्योरा पेश करेगी। वहीं जनता चाहती है कि एक प्रदर्शनी उन अधूरे पुलों, लटकी जांचों, अधूरी सड़कों और वर्षों से फाइलों में घूम रही योजनाओं की भी लगाई जाए, ताकि तस्वीर थोड़ी संतुलित दिखे।
व्यंग्यकारों का कहना है कि यदि हर उद्घाटन का शिलापट्ट लगाया जा सकता है तो हर अधूरे प्रोजेक्ट के बाहर भी एक बोर्ड होना चाहिए—”कार्य प्रगति पर है, कृपया अगली सरकार तक प्रतीक्षा करें।”
बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पलायन और मूलभूत सुविधाओं जैसे मुद्दे अभी भी आम लोगों की चर्चा में हैं। जनता पूछ रही है कि पांच साल के उत्सव में क्या इन सवालों के जवाब भी शामिल होंगे या फिर वे अगले समारोह तक सुरक्षित रख दिए जाएंगे।
राजनीतिक गलियारों में यह कटाक्ष भी सुनाई देता है कि प्रदेश का विकास भले ही आंकड़ों और विज्ञापनों में तेजी से हुआ हो, लेकिन नेताओं की राजनीतिक हैसियत और निजी प्रभाव का विकास उससे भी तेज रफ्तार से हुआ है। आखिर सत्ता में स्थिरता का कुछ तो लाभ दिखना चाहिए।
लोकतंत्र में सरकारें अपनी उपलब्धियां बताती हैं और विपक्ष कमियां गिनाता है। अंतिम फैसला हमेशा जनता करती है। इसलिए यह कार्यकाल पूरा होना राजनीतिक दृष्टि से निश्चित ही एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बधाई के पात्र हैं।
अब निगाहें अगले पांच वर्षों पर नहीं, बल्कि उन अधूरे वादों पर हैं जो पिछले पांच वर्षों से जनता की प्रतीक्षा सूची में खड़े हैं। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि विज्ञापन नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और जनता का विश्वास होती है।
पांच साल पूरे: उपलब्धियों का महाउत्सव, समस्याओं का मौन व्रत!
