आगरा में खौफनाक वारदात: ‘दृश्यम’ फिल्म से आइडिया लेकर पत्नी ने की पति की हत्या, 45 दिन बाद बाथरूम से मिला शव [1]

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आगरा में रूबी ने कथित तौर पर पति सुरेंद्र कुमार शर्मा की नींद की गोलियां मिलाकर खीर से हत्या कर दी और शव को बाथरूम के फर्श के नीचे दफना दिया। करीब 45 दिनों तक गुमराह करने के बाद, पेंशन विवाद में जुबान फिसलने से राज खुला।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

रूबी ने पति की मारपीट से तंग आकर यह कदम उठाने की बात कबूल की है। उसने ‘दृश्यम’ फिल्म से शव छिपाने का आइडिया लिया था। पुलिस को बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता का भी शक है और मोबाइल की कॉल डिटेल व सर्च हिस्ट्री खंगाली जा रही है। खबर बनाएं संपादकीय English +9 आगरा में खौफनाक वारदात: ‘दृश्यम’ फिल्म से आइडिया लेकर पत्नी ने की पति की हत्या, 45 दिन बाद बाथरूम से मिला शवआगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र की रेणुका धाम कॉलोनी में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ रूबी नामक महिला ने अपने 45 वर्षीय पति सुरेंद्र कुमार शर्मा की नींद की गोलियां मिली हुई खीर खिलाकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद, उसने शव को घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफना दिया और उस पर कंक्रीट डालकर टाइल्स लगवा दिए।45 दिनों तक पुलिस और परिवार को गुमराह करती रही पत्नीआरोपी रूबी ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने हिंदी फिल्म ‘दृश्यम’ से शव को ठिकाने लगाने का आइडिया लिया था। सुरेंद्र की हत्या के बाद, वह लगभग 45 दिनों तक अपने पति के लापता होने का नाटक करती रही। मृत सुरेंद्र के भाई अनिल शर्मा ने जब गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और पुलिस ने दबाव बनाकर पूछताछ की, तो रूबी की जुबान फिसल गई और उसने पूरा सच उगल दिया। रूबी का दावा है कि उसके पति बेरोजगार थे, शराब के आदी थे और आए दिन उसके साथ बेरहमी से मारपीट करते थे, जिससे तंग आकर उसने यह कदम उठाया।पुलिस जांच और बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता का शकपुलिस ने आरोपी महिला रूबी को हिरासत में ले लिया है और बाथरूम के फर्श को खुदवाकर शव (कंकाल) बरामद कर लिया है। पुलिस को शक है कि इस जघन्य हत्याकांड में किसी बाहरी व्यक्ति (प्रेमी या अन्य) की भी संलिप्तता हो सकती है। सच का पता लगाने के लिए पुलिस रूबी के मोबाइल की कॉल डिटेल, सर्च हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाल रही है।संपादकीय टिप्पणी (Editorial Note)आगरा की यह हृदयविदारक घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे में घुलते जहर और पारिवारिक मूल्यों के पतन का एक गहरा उदाहरण है। इस हत्याकांड ने भारतीय समाज के मूल चरित्र, विश्वास और रिश्तों की पवित्रता को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। फिल्म ‘दृश्यम’ से अपराधियों द्वारा अपराध छिपाने का तरीका सीखना, मीडिया और मनोरंजन के नकारात्मक प्रभाव को उजागर करता है।हिंसा का कोई विकल्प नहीं, कानून का सहारा लेंमानसिक तनाव और घरेलू हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकते। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से प्रताड़ित हो रहा है, तो कानून की मदद लेने (जैसे महिला हेल्पलाइन या पुलिस) के बजाय खूनी रास्ता चुनना खुद को भी अपराधी बना देता है। पुलिस जांच में जिस तरह से बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता का अंदेशा जताया जा रहा है, वह बताता है कि इस साजिश की जड़ें गहरी हो सकती हैं। पुलिस प्रशासन को इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कड़ी सजा मिले। यह घटना समाज और परिवार, दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी है


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