कुलसुम खान फार्म कब्जा विवाद: हाईकोर्ट सख्त, एसडीएम और SHO को 6 जुलाई को तलब

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नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा स्थित पिपलिया मोड़ के कुलसुम खान फार्म पर कथित जबरन कब्जे और वहां रह रही महिलाओं, बच्चों एवं बेजुबान पशुओं की सुरक्षा से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने संबंधित एसडीएम और कोतवाली के एसएचओ को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सिविल कोर्ट के 11 जून 2026 के आदेश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई भी 6 जुलाई को होगी।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


शुक्रवार को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में सिकंदर आलम खान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया कि ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा क्षेत्र के पिपलिया मोड़ स्थित कुलसुम खान फार्म को लेकर स्वामित्व विवाद चल रहा है।
याचिका के अनुसार, एक पक्ष में प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा हैं, जबकि दूसरे पक्ष में नसरीन सांगा हैं। दोनों पक्ष फार्म पर अपना अधिकार जता रहे हैं। दावा किया गया कि फार्म की मालकिन कुलसुम खान ने वर्ष 2024 में अपनी पंजीकृत वसीयत सायरा और अपने चचेरे भाई सिकंदर आलम खान के नाम की थी। कुलसुम खान का निधन 18 दिसंबर 2025 को हो गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुलसुम खान के निधन की जानकारी मिलते ही दूसरे पक्ष के लोग छह अन्य व्यक्तियों के साथ फार्म पर पहुंचे और प्रशासन की मिलीभगत से कब्जा कर लिया। आरोप है कि वहां रह रहे पुरुषों को बाहर निकाल दिया गया, जबकि महिलाओं, बच्चों और बेजुबान पशुओं को परिसर से बाहर जाने से रोक दिया गया तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके पास मूल पंजीकृत वसीयत मौजूद है और उन्हें 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट से स्थगन (स्टे) आदेश भी मिला था। आरोप है कि आदेश की प्रति दिखाने के बावजूद प्रशासन ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया और दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया।
याचिका में इसे अदालत के आदेश की अवमानना बताते हुए हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने और प्रभावित महिलाओं, बच्चों तथा पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।


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