रुद्रपुर,बदरीनाथ। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने अपनी जांच शुरू कर दी है। मंदिर समिति ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
बीकेटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों की इस चार सदस्यीय समिति को पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति मंदिर परिसर में उपलब्ध सभी साक्ष्यों की बारीकी से जांच करेगी। इसमें विशेष रूप से मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, संबंधित दस्तावेज और आवश्यक रिकॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा आरोपों से जुड़े सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी। उनका कहना है कि कुछ ही दिनों में पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी और वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
जांच समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समिति ने सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि समिति ने अपना कार्य शुरू कर दिया है और सात से दस दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता गोदियाल ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच अथवा उत्तराखंड विधानसभा की संयुक्त समिति (जेएसी) से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए जांच पूरी तरह पारदर्शी और स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे।
कांग्रेस की इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए जांच समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान में गठित समिति प्रारंभिक जांच कर रही है। यदि उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे विस्तृत या उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता महसूस होती है तो शासन के समक्ष प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए सभी विकल्प खुले हैं और आवश्यकता पड़ने पर बड़ी से बड़ी जांच कराने से भी मंदिर समिति पीछे नहीं हटेगी।
इसी बीच मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने समिति के लैपटॉप गायब होने संबंधी आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले एक बैंक द्वारा मंदिर समिति को आठ लैपटॉप उपलब्ध कराए गए थे। ये सभी लैपटॉप कर्मचारियों को कार्यालयी कार्यों के संचालन के लिए दिए गए हैं और उनके उपयोग का रिकॉर्ड उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि लैपटॉप गायब होने के आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे इस विवाद ने श्रद्धालुओं और आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
