आंदोलनकारी परिषद ने मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग, कहा—तकनीकी त्रुटियों के कारण किसी पात्र अभ्यर्थी का अधिकार न छीना जाय
राज्य आंदोलनकारियों की मांगों के समाधान का भरोसा, अध्यक्ष हुकुम सिंह कुँवर बोले—जल्द धरातल पर उतरेंगे फैसले
मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा प्रस्ताव, सभी विभागों के गेस्ट हाउस में ₹300 में आवास, टोल-पार्किंग छूट और 10% आरक्षण प्रमुख मांगें
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुँवर से राज्य आंदोलनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों के अधिकारों और सुविधाओं से जुड़ी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने अध्यक्ष हुकुम सिंह कुँवर का स्वागत करते हुए उनके समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में वर्षों से लंबित मांगों का समाधान होगा।
बैठक में सबसे प्रमुख मांग यह रही कि उत्तराखंड के सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), जिला पंचायत, कुमाऊँ मंडल विकास निगम, गढ़वाल मंडल विकास निगम तथा राज्य के सभी सरकारी गेस्ट हाउसों में राज्य आंदोलनकारियों को केवल अपना पहचान पत्र दिखाने पर लंबी और जटिल प्रक्रिया के बिना मात्र ₹300 में आवास सुविधा उपलब्ध कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह उनके सम्मान से जुड़ा विषय है और इसे शीघ्र लागू किया जाना चाहिए।
इसके अलावा 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन, पेंशन में बढ़ोतरी, निःशुल्क या रियायती चिकित्सा सुविधा, रेल एवं हवाई यात्रा में रियायत, उत्तराखंड के सभी टोल प्लाजाओं पर पूर्ण छूट, निःशुल्क पार्किंग, शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार योजनाओं में प्राथमिकता सहित कई महत्वपूर्ण मांगों को भी परिषद की ओर से प्रमुखता से रखा गया।
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुँवर ने कहा कि सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री के समक्ष सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान से जुड़े मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा। उन्होंने आंदोलनकारियों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए विश्वास दिलाया कि उनकी मांगों का सकारात्मक निस्तारण कराया जाएगा।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में हुकुम सिंह कुँवर ने कहा कि सम्मान परिषद राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है तथा सरकार से सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही अधिकांश मांगों को धरातल पर उतारा जाएगा।
इस अवसर पर पूर्व दर्जा राज्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश पनेरु ने हुकुम सिंह कुँवर को सम्मान परिषद का अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान किसी दल की राजनीति से ऊपर है। उन्होंने कहा कि यदि इन मांगों का समाधान हो जाता है तो सभी राज्य आंदोलनकारी मिलकर हुकुम सिंह कुँवर का भव्य सम्मान समारोह आयोजित करेंगे। वहीं यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलनकारी लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का रास्ता अपनाने के लिए भी बाध्य होंगे।
इस दौरान उपस्थित सभी आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों को सम्मानजनक सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है और सरकार को इस दिशा में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
हरीश पनेरु, अवतार सिंह बिष्ट, पी.सी. शर्मा, एस.के. नैय्यर, डॉ. गणेश उपाध्याय, जगमोहन चीलवाल, डॉ. बालम सिंह बिष्ट, बी.एस. सौतेला, दीपक चनियाल, कार्तिक चंद्र दास तथा नरेश चंद्र कांडपाल सहित अनेक राज्य आंदोलनकारी।
हल्द्वानी ,उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2024 के संबंध में जारी विज्ञप्ति के बाद उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी एवं उनके आश्रितों के आरक्षण को लेकर नया विवाद सामने आया है। आयोग ने 6 जुलाई 2026 को जारी विस्तृत विज्ञप्ति में उन अभ्यर्थियों की सूची जारी की है जिन्होंने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी आश्रित (UKRAA) आरक्षण का दावा किया था, लेकिन उनके प्रमाण-पत्रों में तकनीकी कमियां पाई गईं।
आयोग ने ऐसे अभ्यर्थियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में वे अभ्यर्थी हैं जिनके प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रारूप में नहीं हैं। दूसरी श्रेणी में वे अभ्यर्थी शामिल हैं जिनके प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रारूप पर तो हैं, लेकिन आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी किए गए। तीसरी श्रेणी में वे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने आवेदन के साथ प्रमाण-पत्र संलग्न ही नहीं किया।
आयोग ने इन सभी अभ्यर्थियों को 21 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है। स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय के बाद प्राप्त किसी भी प्रत्यावेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
इस बीच उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकम सिंह कुँवर को राज्य आंदोलनकारी डॉ. गणेश उपाध्याय पूर्व दर्जा राज्य मंत्री आंदोलनकारी हरीश पनेरु, जगमोहन चिलवाल डा बालम सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि केवल तकनीकी या प्रक्रियागत त्रुटियों के आधार पर वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों को आरक्षण के लाभ से वंचित न किया जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण हजारों आंदोलनकारियों के संघर्ष, बलिदान और शहादत का परिणाम है। इसलिए आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। परिषद ने मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों की पात्रता निर्विवाद है, उन्हें प्रमाण-पत्र संबंधी त्रुटियां सुधारने का अंतिम अवसर दिया जाए तथा प्रशासनिक देरी का खामियाजा अभ्यर्थियों को न भुगतना पड़े।
परिषद ने भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का डिजिटल डाटाबेस और ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली विकसित करने का भी सुझाव दिया है, ताकि प्रत्येक भर्ती में बार-बार प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता न पड़े।
इसके साथ ही आंदोलनकारी परिषद ने राज्य सरकार के समक्ष आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए व्यापक सुविधाओं की भी मांग रखी है। इनमें सरकारी विश्राम गृहों में आवास सुविधा, सभी सरकारी भर्तियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन, निःशुल्क या रियायती चिकित्सा, रेल और हवाई यात्रा में रियायत, टोल प्लाजा और पार्किंग में छूट, शिक्षा, रोजगार एवं स्वरोजगार योजनाओं में प्राथमिकता तथा स्वतंत्रता सेनानियों के समान सम्मानजनक सुविधाएं शामिल हैं।
