रुद्रपुर उत्तराखंड,देश में खुदरा महंगाई दर एक बार फिर रिजर्व बैंक के तय लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई है। जून महीने में खुदरा महंगाई (सीपीआई) बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई, जबकि मई में यह 3.93 फीसदी थी। पिछले 17 महीनों में यह पहला अवसर है जब महंगाई दर आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य को पार कर गई है। सांख्यिकी मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को ऊपर धकेला है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और मानसून को लेकर बनी अनिश्चितता भी कीमतों पर दबाव बढ़ा रही है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
महंगाई बढ़ने का सबसे अधिक असर आम लोगों की रसोई पर दिखाई दे रहा है। जून में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 5.32 फीसदी पहुंच गई, जो मई में 4.78 फीसदी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.45 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 5.09 फीसदी दर्ज की गई। हालांकि आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट से कुछ राहत मिली है, लेकिन दाल, खाद्य तेल, दूध, मसाले और अन्य जरूरी वस्तुओं की महंगाई ने इस राहत का असर कम कर दिया।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जून में परिवहन महंगाई दर 4.31 फीसदी रही। मई के दौरान पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हुई, जिससे बाजार तक पहुंचने वाले अधिकांश सामान की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है।
उत्तराखंड पर क्या होगा असर?
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में महंगाई का असर मैदानी राज्यों की तुलना में अधिक महसूस हो सकता है। राज्य के अधिकांश पर्वतीय जिलों में खाद्यान्न, सब्जियां, फल, गैस सिलेंडर और दैनिक उपयोग का सामान बाहर से आता है। परिवहन लागत बढ़ने पर इन वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।
चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान बढ़ी आवाजाही के बीच ईंधन महंगा होने से टैक्सी, बस और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने की संभावना है। इसका असर होटल, रेस्तरां और स्थानीय बाजारों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
आगे भी बनी रह सकती है महंगाई की चुनौती
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि मानसून कमजोर रहा या पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं तो महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।
लोन हो सकते हैं महंगे
रिजर्व बैंक ने हालिया मौद्रिक नीति में रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई इसी तरह बनी रही तो वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में 0.50 फीसदी तक बढ़ोतरी की जा सकती है। ऐसे में घर, वाहन और अन्य ऋणों की ईएमआई भी बढ़ सकती है।
महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच उत्तराखंड के उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीनों में घरेलू बजट संभालना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब खाद्य सामग्री, परिवहन और ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहे।
