उत्तराखंड अब ट्रैफिक सिग्नल पर रेड लाइट और ग्रीन लाइट की झंझट खत्म होने वाली है. इसका समाधान एआई करेगा और इसे जयपुर में लागू किया जा रहा है. ट्रैफिक को बेहतर बनाने के लिए राजस्थान पुलिस नए प्लान पर काम कर रही है.

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पिंकसिटी की सड़कों को जाममुक्त और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए एआई की मदद ली जाएगी. अब शहर का ट्रैफिक फिक्स टाइमर के भरोसे नहीं, बल्कि पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित होगा. ट्रैफिक पुलिस ने ‘डेटा कोर इन्फोटेक’ के सहयोग से सफल ट्रायल किया. ट्रायल के लिए जयपुर के सबसे व्यस्त रामबाग सर्किल पर 39 दिनों का ट्रायल हुआ. ट्रैफिक डीसीपी योगेश गोयल ने खुद इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग की थी. ट्रायल की सफलता के बाद 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों को इस एआई-आधारित स्मार्ट कैमरे और ‘इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS)’ से जोड़ने पर काम हो रहा है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

जानिए कैसे काम करेगा AI-ITMS

डेटा कोर इन्फोटेक के निदेशक बसंत गोस्वामी और ओजस शुक्ला ने बताया कि चाहे सड़क के एक तरफ ट्रैफिक ना हो और दूसरी तरफ 1 किलोमीटर लंबा जाम हो, चौराहों पर रेड और ग्रीन लाइट के लिए समय (जैसे 60 या 90 सेकंड) तय रहता है. लेकिन आईटीएमएस (ITMS) इससे बिल्कुल अलग है. चौराहे पर लगे एआई कैमरे 24 घंटे लाइव वाहनों की संख्या और कतार की लंबाई को खुद मापेंगे.

नया सिस्टम कुछ ऐसे काम करेगा कि जिस सड़क पर वाहनों का दबाव ज्यादा होगा, एआई सिस्टम वहां का ग्रीन टाइम बढ़ा देगा और खाली सड़क का समय घटा देगा. इस सिस्टम को चलाने के लिए किसी ट्रैफिक पुलिसकर्मी को रिमोट या बटन दबाने की जरूरत नहीं पड़ती, यह 24 घंटे पूरी तरह ऑटोमैटिक काम करता है.

हर वाहन चालक का 45 सेकंड बचेगा

पायलट प्रोजेक्ट के दौरान 4 लाख 88 हजार 140 से अधिक गाड़ियों पर परीक्षण किया गया. सामने आया है कि किसी इंसानी मॉनिटरिंग के एआई कंट्रोल से वाहन चालकों को हर लेन में 8 से 45 सेकंड की सीधी बचत हुई और औसत लेन ग्रीन टाइम 33.63 सेकंड रिकॉर्ड किया गया. चौराहों पर वाहनों के कम समय रुकने और स्मूथ ट्रैफिक फ्लो के कारण 39 दिनों में कुल 2535 किलो कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन कम हुआ, जो हर दिन के मुकाबले 65 किलो तक कम है.

पेंडिंग चालान भी पकड़ेगा सिस्टम

यह एआई सिस्टम केवल ट्रैफिक ही मैनेज नहीं करेगा, बल्कि चौराहों पर नियमों के उल्लंघन पर भी सख्ती बरतेगा. हर दिन एक कैमरा करीब 4200 गाड़ियों को रीड करता है, जिसमें से औसतन 450 वाहनों के चालान की सटीक जानकारी सिस्टम में दर्ज हो जाती है. इसके लागू होने से ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और लेन उल्लंघन करने वाले वाहन अब बच नहीं पाएंगे.

इसके अलावा, अगर किसी वाहन पर पहले से कोई चालान बकाया या लंबित है तो एआई कैमरा उस गाड़ी के नंबर प्लेट को स्कैन करते ही पूरी जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम को उपलब्ध करा देगा. इसे भविष्य में पूरे स्मार्ट सिटी मिशन से जोड़े जाने की तैयारी है. वीआईपी मूवमेंट, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियों को ऑटोमैटिक प्रायोरिटी ग्रीन सिग्नल देने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि मरीजों को जाम में न फंसना पड़े.


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